मुंबई के चेंबूर (पूर्व) इलाके में 30 जून 2026 को हुए एक दर्दनाक हादसे ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है. डायमंड गार्डन के पास 11वीं रोड पर एक भारी-भरकम पीपल का पेड़ उखड़कर यूनिवर्सल स्कूल की बस पर गिर गया. इस हादसे में 11 वर्षीय मासूम छात्र विहान श्रीवास्तव की दर्दनाक मौत हो गई. इस घटना के बाद जनता में भारी आक्रोश है, जिसके दबाव में बृहन्मुंबई नगर निगम ने बड़ी कार्रवाई की है.
असिस्टेंट गार्डन सुपरिटेंडेंट निलंबित, हाई-लेवल जांच के आदेश
हादसे के तुरंत बाद कार्रवाई करते हुए BMC कमिश्नर अश्विनी भिड़े ने एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया है. इस समिति का नेतृत्व डिप्टी म्युनिसिपल कमिश्नर रैंक के अधिकारी करेंगे. समिति को 8 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है. यह जांच समिति पेड़ गिरने के कारणों का पता लगाएगी और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करेगी.
इसी बीच, प्राथमिक जांच में प्रथम दृष्टया लापरवाही पाए जाने पर BMC ने असिस्टेंट गार्डन सुपरिटेंडेंट जगदीश भोईर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. विभागीय जांच पूरी होने तक वे निलंबन के अधीन रहेंगे.

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'क्रिकेट बॉल भी साथ दफन कर दी'... गमगीन माहौल में हुआ विहान का अंतिम संस्कार
हादसे का शिकार हुआ विहान अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था. जब विहान का अंतिम संस्कार किया जा रहा था, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं. परिजनों ने रोते हुए बताया, "हमने उसकी क्रिकेट बॉल भी उसके साथ ही दफन कर दी."
विहान के दादा एस. एन. श्रीवास्तव ने इस घटना को पूरी तरह प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा बताया. उन्होंने कहा "यह हादसा टाला जा सकता था. वह पेड़ पहले से ही बेहद खतरनाक स्थिति में झुका हुआ था. स्थानीय निवासियों ने इसे लेकर प्रशासन को पहले भी चेताया था, लेकिन समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की गई. मेरा पोता तो अब कभी वापस नहीं आएगा, लेकिन दोषियों के खिलाफ सख्त आपराधिक कार्रवाई होनी चाहिए ताकि किसी और का बच्चा ऐसी लापरवाही की भेंट न चढ़े." परिजनों का कहना है कि वे इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ औपचारिक कानूनी शिकायत दर्ज कराने पर विचार कर रहे हैं.
राजनीतिक दलों में आक्रोश, सरकार और BMC पर उठे सवाल
इस हादसे को लेकर मुंबई की राजनीति भी गरमा गई है. विपक्ष ने बीएमसी का संचालन कर रही सत्ताधारी पार्टी और महाराष्ट्र सरकार को आड़े हाथों लिया है. सांसद अनिल देसाई ने इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि "यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना है. मुझे उम्मीद नहीं थी कि बीएमसी की लापरवाही की कीमत एक मासूम बच्चे को अपनी जान देकर चुकानी पड़ेगी. जिस पेड़ की शाखाएं काटी जानी चाहिए थीं, उसकी समय पर छंटाई क्यों नहीं हुई? संबंधित ठेकेदार से जवाब मांगा जाना चाहिए कि पेड़ का उचित निरीक्षण क्यों नहीं किया गया. उन्होंने आगे कहा कि वे खुद इस मुद्दे को लेकर बीएमसी आयुक्त से मुलाकात करेंगे और दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग करेंगे.
मंत्री संजय शिरसाट के बयान पर पलटवार
महाराष्ट्र के मंत्री संजय शिरसाट द्वारा इस घटना पर कथित तौर पर दिए गए एक संवेदनहीन बयान के बाद विपक्ष का गुस्सा और भड़क गया है. शिरसाट के बयान पर टिप्पणी करते हुए सांसद अनिल देसाई ने कहा, "जिन लोगों के मन में किसी के दुख के लिए कोई संवेदना नहीं है, उनके बयानों पर मैं कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता. ऐसे लोगों की बातों पर ध्यान देना ही बेकार है." इस बीच, विपक्ष ने मांग की है कि बीजेपी के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार और बीएमसी को इस हादसे की पूरी जिम्मेदारी लेनी चाहिए और केवल एक अधिकारी के निलंबन से न्याय नहीं होगा, बल्कि इसके लिए जिम्मेदार उच्च अधिकारियों और ठेकेदारों को जेल भेजा जाना चाहिए.
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