मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है. पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है... इस मशहूर शेर को मुंबई की चॉल में पले-बढ़े 7 युवा खिलाड़ियों ने सच्चे अर्थों में चरितार्थ कर दिखाया है. मुंबई की चॉल में पले-बढ़े इन 7 युवा खिलाड़ियों ने सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया है. भूटान में आयोजित दक्षिण एशियाई बॉक्स लंगड़ी चैंपियनशिप में इन खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए व्यक्तिगत स्वर्ण पदक अपने नाम किए और भारत को चैंपियनशिप ट्रॉफी दिलाने में अहम भूमिका निभाई.
चॉल की गलियों से अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर
इन खिलाड़ियों की सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि इन्होंने बेहद सीमित सुविधाओं के बीच अपनी प्रतिभा को निखारा. चॉल की संकरी जगहों और सार्वजनिक मैदानों में अभ्यास करने से लेकर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करने तक का उनका सफर मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प की मिसाल है.
आर्थिक कठिनाइयों और पर्याप्त प्रशिक्षण सुविधाओं के अभाव के बावजूद इन खिलाड़ियों ने हार नहीं मानी. अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने भूटान में आयोजित दक्षिण एशियाई बॉक्स लंगड़ी चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन किया और भारत के लिए गौरव हासिल किया.
मुंबईतील चाळीतून थेट चॅम्पियनशिप ट्रॉफीपर्यंत : एक प्रेरणादायी प्रवास
— Ravindra Chavan (@RaviDadaChavan) August 20, 2026
मुंबईतील चाळीत आणि वंचित कुटुंबांत वाढलेल्या ७ खेळाडूंनी भूतानमध्ये झालेल्या ‘दक्षिण आशियाई बॉक्स लंगडी चॅम्पियनशिप'मध्ये आपल्या बहारदार खेळीतून भारताचा तिरंगा अभिमानाने उंचावला.
विराज भिलारे, गौरव सोनावणे,… pic.twitter.com/ioTgfhFRSk
इन 7 खिलाड़ियों ने जीते पदक
चैंपियनशिप में भारत के लिए व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतने वाले खिलाड़ियों में विराज भिलारे, गौरव सोनावणे, ऋग्वेद राहुल मोहिते, प्रथमेश चव्हाण, श्री धाधम, प्रथमेश पगारे और ऋषभ इंगळे शामिल हैं. इन सातों खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने न केवल उन्हें व्यक्तिगत सफलता दिलाई, बल्कि भारत को चैंपियनशिप ट्रॉफी दिलाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया.
इन खिलाड़ियों को महाराष्ट्र भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष और विधायक रविंद्र चव्हाण ने बधाई दी है. सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए रविंद्र चव्हाण ने इन खिलाड़ियों की सफलता की सराहना की. उनके संघर्ष को सम्मान दिया.
रविंद्र चव्हाण ने दी बधाई
इन खिलाड़ियों की उपलब्धि अब तक व्यापक स्तर पर चर्चा में नहीं आई थी. ऐसे में रविंद्र चव्हाण द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से उनकी उपलब्धि को सामने लाने और सराहना करने के बाद यह मामला चर्चा में आया है.
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