भारत के हेड कोच गौतम गंभीर ने वेस्ट इंडीज़ के खिलाफ़ दूसरे वनडे में 406 रन का लक्ष्य हासिल करने के बाद गुवाहाटी की पिच की आलोचना की. उन्होंने कहा कि "बल्ले और गेंद के बीच थोड़ा और मुकाबला" होना चाहिए और तर्क दिया कि ऐसी परिस्थितियाँ जिनमें गेंदबाज़ों को बहुत कम मदद मिलती है, वे "सही नहीं" हैं. भारत ने बुधवार को अपने वनडे इतिहास में सबसे बड़ा सफल रन चेज किया.टीम ने सिर्फ़ 43.3 ओवर में लक्ष्य हासिल कर आठ विकेट से जीत दर्ज की और तीन मैचों की सीरीज़ अपने नाम कर ली.
क्रिकइन्फो के अनुसार, मैच के बाद स्टार स्पोर्ट्स से बात करते हुए गंभीर ने कहा,"देखिए, अगर मैं पूरी तरह ईमानदार रहूं, तो मुझे लगता है कि बल्ले और गेंद के बीच थोड़ा और मुकाबला होना चाहिए, क्योंकि हम क्रिकेट की बात करते हैं - लेकिन यह क्रिकेट नहीं है, यह सिर्फ़ बल्लेबाजी है."
गंभीर ने कहा,"क्योंकि जरा सोचिए कि कोई युवा गेंदबाज़ इस विकेट पर गेंदबाजी कर रहा हो, और विरोधी टीम 400 रन बना ले और फिर हम 400 रन का पीछा करें. जाहिर है, रिकॉर्ड के लिए यह शानदार है, दर्शकों के लिए यह शानदार है, ब्रॉडकास्टर के लिए यह शानदार है, लेकिन अगर आप मुझसे एक सच्चे क्रिकेट फैन और कोच के तौर पर पूछें - तो मुझे गेंदबाजों के प्रति भी सहानुभूति रखनी होगी." उन्होंने आगे कहा,"जब आप इस तरह की पिच पर गेंदबाजी करते हैं, तो यह गेंदबाज़ों के लिए सही नहीं होता. इसलिए हमें गेंदबाज़ों को कुछ ऐसा देना होगा जिससे उन्हें कुछ मदद मिल सके और वे उसका इस्तेमाल कर सकें."
गंभीर का यह बयान उस मुकाबले के बाद आया है, जिसमें दोनों पारियों को मिलाकर 811 रन बने. वेस्टइंडीज ने जॉन कैंपबेल, शाई होप और अमीर जांगू के शतकों की मदद से 7 विकेट पर 405 रन बनाए. इसके जवाब में भारत के लिए शुभमन गिल ने 133 गेंदों पर नाबाद 223 रनों की रिकॉर्डतोड़ पारी खेली, जबकि रोहित शर्मा ने 75 गेंदों पर 101 रन बनाए, जिससे भारत ने 43.3 ओवर में 2 विकेट पर 408 रन बना लिए.
गिल और रोहित ने ओपनिंग विकेट के लिए 255 रन जोड़े - जो पुरुषों के वनडे में भारत की दूसरी सबसे बड़ी ओपनिंग पार्टनरशिप है - जिसके बाद रोहित अपना शतक पूरा करके आउट हो गए. विराट कोहली, जिन्होंने पहले वनडे में शतक लगाया था, आउट होने से पहले 19 गेंदों पर 29 रन बनाए, लेकिन गिल नाबाद रहे और ऋतुराज गायकवाड़ के 37 गेंदों पर 31 रनों ने भारत को लक्ष्य हासिल करने में मदद की. वनडे इतिहास में 400 या उससे ज़्यादा के लक्ष्य का यह केवल दूसरा सफल पीछा था. इससे पहले 2006 में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ दक्षिण अफ़्रीका ने 438 रनों का लक्ष्य हासिल किया था.
गेंदबाजों के बचाव में आए गंभीर
हालांकि, गंभीर ने कहा कि ऐसे हालात में गेंदबाज़ों का आकलन करते समय उनके बॉलिंग आंकड़ों को अकेले नहीं देखना चाहिए. भारतीय कोच ने आगे कहा,"पहली बात तो यह है कि आपको गेंदबाज़ों के प्रति थोड़ी सहानुभूति और थोड़ी गुंजाइश रखनी चाहिए. अक्सर आप गेंदबाज़ों के प्रति सख़्त नहीं हो सकते, क्योंकि कभी-कभी बॉलिंग के आंकड़े ऐसे होते हैं जिनसे लगता है कि उन्होंने बहुत खराब गेंदबाज़ी की है, जबकि असल में ऐसा नहीं होता. क्योंकि मार्जिन बहुत कम होता है. साथ ही, मुझे लगता है कि आप सिर्फ़ अच्छी जगहों पर ही गेंदबाज़ी कर सकते हैं क्योंकि इसके अलावा, अंदर पांच फ़ील्डर, दो नई गेंदें और आजकल जिस तरह की पावर-हिटिंग होती है, उसे देखते हुए गेंदबाज़ों के पास असल में ज़्यादा विकल्प नहीं होते हैं."
पूर्व विस्फोटक ओपनर ने कहा,"इसीलिए, एक कोच या सपोर्ट स्टाफ़ के तौर पर, सबसे पहले आप यह देखते हैं कि क्या वे अपनी बॉलिंग या अपने प्लान को ठीक से लागू कर पाए? अगर वे ऐसा कर पाए, तो आपको उन पर ज़्यादा सख़्त नहीं होना चाहिए. अगर आप सिर्फ़ उनके आंकड़ों को देखकर उन पर बहुत सख़्त हो जाते हैं, तो हम कभी भी अच्छे गेंदबाज़ तैयार नहीं कर पाएंगे. सोचिए, आकिब अपना पहला मैच खेल रहे थे... कहीं न कहीं आपको उन्हें थोड़ा सपोर्ट देना होगा और उनके लिए थोड़ा एक्स्ट्रा कुशन या एक्स्ट्रा ऑप्शन रखना होगा. लेकिन अफ़सोस की बात है कि आज किसी भी गेंदबाज़ के लिए ज़्यादा कुछ नहीं था."
गेंदबाजों को आजमाना, वर्ल्ड कप के प्लान का हिस्सा
भारत ने 1-0 की बढ़त होने के बावजूद आकिब नबी को डेब्यू का मौका दिया, और गंभीर ने कहा कि युवा गेंदबाज़ों को दबाव वाले हालात में उतारना 2027 वनडे वर्ल्ड कप के लिए भारत की तैयारी का हिस्सा था. उन्होंने आगे कहा,"हम आकिब को अगले मैच में भी मौका दे सकते थे, जो एक 'डेड रबर' होगा, लेकिन 'डेड रबर' में वह दबाव नहीं होता जो सीरीज़ जीतने के दबाव के साथ आता है. और हम सब जानते हैं कि वर्ल्ड कप पूरी तरह से दबाव का खेल है. क्रिकेट वैसे नहीं बदलेगा, बस दबाव अलग होगा क्योंकि वर्ल्ड कप चार साल में एक बार आता है, इसलिए हम गेंदबाज़ों को दबाव में डालना चाहते हैं."
उन्होंने आगे कहा,"उदाहरण के लिए, गुरनूर. गुरनूर से पहले 10 ओवरों में बॉलिंग करवाना, डेथ ओवरों में बॉलिंग करवाना - मुझे पता है कि लोग उनके आंकड़ों (एनालिसिस) के बारे में बात करेंगे, लेकिन वे जितने ज़्यादा मुश्किल हालात में बॉलिंग करेंगे, भारतीय क्रिकेट के लिए उतना ही अच्छा होगा. क्योंकि आप उनसे मिडिल ओवरों में बॉलिंग करवाकर अच्छे आंकड़े या अच्छे स्टैट्स हासिल कर सकते हैं, उनसे डिफेंसिव बॉलिंग करवा सकते हैं, लेकिन हम उन्हें ऐसे समय में जितना ज़्यादा आज़माएंगे. भारतीय क्रिकेट के लिए उतना ही बेहतर होगा."
विश्व कप में अधिक समय नहीं
2027 वर्ल्ड कप में एक साल से भी कम समय बचा है, ऐसे में गंभीर ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि भारत के पास अपने विकल्पों को परखने के लिए बहुत कम वनडे मैच बचे हैं. उन्होंने कहा,"आपने कहा कि एक साल का समय है, लेकिन उस एक साल में तीन महीने IPL में और तीन महीने भारत-ऑस्ट्रेलिया सीरीज़ में चले जाएंगे. इसलिए इस सीरीज़ के बाद हमारे पास मुश्किल से 20 वनडे मैच बचेंगे, और 20 वनडे मैच बहुत ज़्यादा नहीं होते. इनमें श्रीलंका और ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ तीन-तीन मैच भी शामिल हैं. मेरा मानना है कि ज़्यादा समय नहीं है. इसलिए हम जो भी प्लान बनाएं या जो भी विकल्प तैयार करें, हमें वह जल्द से जल्द करना होगा."
उन्होंने आगे कहा,"इसलिए IPL के बाद हमारे पास जो भी विकल्प होंगे या हमारी बड़ी और व्यापक योजना में जो भी टीम तैयार होगी, हम उन्हें IPL के बाद ही खिलाएंगे. तो अभी हमारे लिए अलग-अलग विकल्पों को आज़माने का समय है. जैसे आज आकिब को मौका मिला, वैसे ही हम ज़िम्बाब्वे सीरीज़ तक दूसरे खिलाड़ियों को भी मौका देने की कोशिश करेंगे और देखेंगे कि वे इस फ़ॉर्मेट में कैसा प्रदर्शन करते हैं."
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