मुंबई के घाटकोपर में एक हाउसिंग सोसायटी में जैन मुनियों के स्वागत के लिए सफेद रंग से खींची गई एक लाइन को लेकर मराठी और जैन समुदाय के लोगों के बीच विवाद खड़ा हो गया है. अब इस विवाद मामले को लेकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेता संदीप देशपांडे ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक पोस्ट शेयर कर चेतावनी दी है. उन्होंने लिखा, 'सफेद पट्टियां बनाकर सांस्कृतिक आतंकवाद फैलाने की कोशिश करने वालों को मुंह काला किया जाएगा.' वहीं जैन समुदाय का कहना है कि उन्होंने सोसायटी की कमेटी से अनुमति लेने के बाद इस लाइन को खींचा है.
पांढऱ्या पट्ट्या मारून सांस्कृतिक दहशतवाद परसवण्याचा प्रयत्न करणाऱ्यांची या पुढे तोंड काळी करण्यात येतील.
— Sandeep Deshpande (@SandeepDadarMNS) June 10, 2026
दरअसल, घाटकोपर स्थित 'कैलाश एवेन्यू' सोसाइटी में रहने वाले एक जैन परिवार ने सोसाइटी के परिसर में जैन मुनियों के स्वागत के लिए सफेद लाइन बनाई. जैन समुदाय का तर्क है कि ये लाइन जैन संतों के पैदल चलने के लिए अस्थायी रूप से बनाई गई है. हालांकि उनहोंने सोसाइटी कमेटी की अनुमति से यह लाइन बनाई है.
जैन समुदाय का तर्क
जैन समुदाय ने तर्क दिया कि मानसून चातुर्मास के दौरान टाइल्स या पेवर ब्लॉक्स पर काई जम जाती है. जैन धर्म में अहिंसा का पालन किया जाता है और काई में सूक्ष्म जीव होते हैं. जैन मुनि साधु-साध्वी जब भिक्षा लेने के लिए पैदल आते हैं, तो वे इन जीवों पर पैर रखने से बचने के लिए काई पर नहीं चलते. यह सफेद लाइन इसलिए बनाई गई, ताकि जैन मुनि इस साफ रास्ते से बिना किसी जीव को नुकसान पहुंचाए आसानी से आ-जा सकें.
सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ने उठाया मुद्दा
इसी सोसाइटी में रहने वाले एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर प्रसाद वेदपाठक और अन्य गैर-जैन निवासियों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई. उनका कहना है कि किसी भी सोसाइटी की साझा जगह, कॉमन एरिया या सार्वजनिक फुटपाथ पर इस तरह का धार्मिक चिन्हांकन करना पूरी तरह गलत है और यह सोसाइटी में विभाजन पैदा करता है.
यह मामला तब और ज्यादा बढ़ गया, जब विरोध कर रहे पक्ष ने कहा कि यदि सार्वजनिक या साझा जगहों पर किसी एक धर्म के लिए ऐसी स्थायी व्यवस्था की जाएगी, तो कल अन्य समुदायों के लोग भी अपनी धार्मिक परंपराओं जैसे पशु बलि या अन्य रीति-रिवाज को भी सोसाइटी के कॉमन एरिया में करने की मांग करेंगे.
जैन परिवार ने क्या कहा?
विवाद बढ़ने के बाद जैन परिवारों का कहना है कि उनका इरादा किसी की भावना को ठेस पहुंचाना नहीं था और अगर लोगों को सच में तकलीफ है, तो वे इसे हटाने या बारिश में इसके अपने आप मिटने का इंतजार करने को तैयार हैं.
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