- बिहार में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के विरोध में छात्रों ने बड़े पैमाने पर उग्र प्रदर्शन किया
- इंस्टाग्राम इंफ्लूएंसर्स के समर्थन से पटना में आयोजित मार्च में बड़ी संख्या में छात्र शामिल हुए
- भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के कारण बिहार के छात्र सरकार के खिलाफ स्वाभाविक रूप से गुस्सा जाहिर कर रहे हैं
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के लिए देशभर में प्रदर्शन हुए. पुलिस ने लाठीचार्ज किया, भीड़ ने भी कई जगहों पर उग्र प्रदर्शन किया. छात्रों को हिरासत में लिया गया, आंसू गैल के गोले, वॉटर कैनन और हवाई फायरिंग के इस्तेमाल से भीड़ को रोकने की कोशिशें हुई. वो तस्वीरें हमने देखी. दिल्ली के प्रदर्शन के बाद जिस प्रदर्शन ने सबसे अधिक सुर्खियां बटोरीं, वो था बिहार में विद्यार्थियों का प्रदर्शन. पटना, जहानाबाद, औरंगाबाद, सिवान, छपरा, भागलपुर, मुजफ्फरपुर सहित बिहार के सभी जिलों में उग्र प्रदर्शन हुए.
1. प्रदर्शन में इंस्टाग्राम इंफ्लूएंसर्स की बड़ी भूमिका
पटना में 22 जुलाई का मार्च AISA ने बुलाया था, लेकिन इसे बड़ी संख्या में आम स्टूडेंट का समर्थन मिला. बड़ी संख्या में इंस्टाग्राम इंफ्लूएंसर्स ने अपने अकाउंट से इस मार्च में आने की अपील की. ये एक बड़ी वजह थी कि सड़कों पर इतनी भीड़ आई, जिसकी उम्मीद न तो आयोजकों को थी और न ही पुलिस को. इसके बाद बड़ी संख्या में क्रिएटर्स ने प्रोटेस्ट से जुड़े वीडियो पोस्ट किए. जिससे इस प्रोटेस्ट को बड़ी ऑडियंस मिली.

2. भर्ती परीक्षाओं की तैयारी करने वालों का स्वाभाविक गुस्सा
पटना देश के उन शहरों में शुमार है, जहां भर्ती परीक्षाओं की तैयारी करने वाले सबसे अधिक स्टूडेंट्स रहते हैं. शिक्षक रजनीश झा बताते हैं, "भर्ती परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र सबसे अधिक ठगा हुआ महसूस करते हैं. बिहार लोक सेवा आयोग की दो परीक्षाओं पर सवाल उठे. AEDO की परीक्षा रद्द करनी पड़ी, 70वीं BPSC स्थगित हो गई. BSSC सिर्फ नाम का है. उसकी भर्तियां सालों - साल नहीं आती. इसलिए सरकार के खिलाफ एक स्वाभाविक गुस्सा है, तो जब भी सत्ता विरोधी कोई आंदोलन होता है, ये स्टूडेंट इसमें शामिल हो जाते हैं. चाहे आंदोलन किसी भी संगठन का हो.
3. जेपी आंदोलन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
बिहार छात्र राजनीति का केंद्र रहा है, 1974 के छात्र आंदोलन में बिहार के छात्रों की सबसे बड़ी भूमिका थी. बिहार के वरिष्ठ पत्रकार रवि उपाध्याय मानते हैं कि बिहार के छात्र स्वाभाविक रूप से अपने आप को उस विरासत से जुड़ा हुआ पाते हैं, इसलिए वे आंदोलन में जाने से झिझकते नहीं. दिल्ली के जंतर मंतर पर जो प्रदर्शन हुआ, उसमें भी बिहारी छात्रों की काफी तादाद थी. इसलिए पटना में हुए प्रदर्शन में आप जेपी से जुड़े नारे सुन सकते थे.

4. AISA के मार्च में सभी संगठनों से जुड़े लोग शामिल हुए
22 जुलाई को राजभवन मार्च बुलाया था, लेकिन इसमें सभी संगठनों के लोग शामिल हुए थे. पटना विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष शांतनु शेखर भी प्रदर्शन के दौरान दिखे थे. उन्हें पुलिस ने हिरासत में भी लिया था. इसके अलावा दूसरे छात्र संगठनों के छात्र नेता भी प्रदर्शन में शामिल हुए थे. इसलिए प्रदर्शनकारियों की संख्या और बढ़ी थी.
5. पुलिस की अपील बेअसर, मुकदमों के बाद भी सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारी
22 जुलाई को पटना में हुए प्रदर्शन के बाद पटना पुलिस ने दर्जनों छात्र नेताओं को हिरासत में लिया. 24 जुलाई को पालीगंज विधायक संदीप सौरव को गिरफ्तार किया गया. पटना SSP कार्तिकेय शर्मा ने मीडिया से बात करते हुए कहा था कि प्रदर्शनकारियों में अराजक तत्व शामिल थे. उन सभी की पहचान की जा रही है. पटना पुलिस ने सौ से अधिक प्रदर्शनकारियों की तस्वीर सार्वजनिक की थी. कार्तिकेय शर्मा ने कहा था कि छात्र ऐसे हिंसक प्रदर्शनों में हिस्सा न लें। शांतिपूर्वक प्रदर्शन करें. अभिभावकों से भी अपील की थी कि बच्चों का ध्यान रखें, ताकि उन्हें कोई बहला-फुसलाकर न ले जाए. लेकिन छात्रों का गुस्सा इस अपील पर भारी दिखा. 25 जुलाई को भी प्रदर्शनकारियों ने पटना में खूब हंगामा किया.

6. गिरफ्तारी के बाद तेज होगा आंदोलन?
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर मंतर पर आंदोलन समाप्त हो गया है, लेकिन गिरफ्तारियों पर बिहार में राजनीति तेज है. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि अगर गिरफ्तार छात्रों की जल्द रिहाई नहीं होती है और मुकदमे वापस नहीं लिए जाते हैं तो वह प्रदेश भर में उग्र आंदोलन करेंगे. AISA ने 30 तारीख को राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है, यानी अभी आंदोलन का बिहार चैप्टर बाकी है.
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