महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है. मनसे नेता अमित ठाकरे ने ऑटो और टैक्सी चालकों को लेकर चेतावनी भरा बयान देते हुए कहा है कि यदि कोई यात्रियों पर हिंदी बोलने का दबाव बनाएगा या दुर्व्यवहार करेगा तो उनकी पार्टी कार्रवाई करेगी. उन्होंने मराठी सीखने के लिए दी गई एक साल की अतिरिक्त मोहलत पर भी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को निशाने पर लिया. इस बीच राज्य सरकार के मराठी अनिवार्यता आदेश को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती भी दी गई है, जिससे यह मुद्दा राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का केंद्र बन गया है.
'अगर हमें पता चला तो पीटेंगे...'
मनसे प्रमुख राज ठाकरे के बेटे अमित ठाकरे ने कहा कि अगर पार्टी को यह शिकायत मिलती है कि कोई ऑटो-रिक्शा चालक हिंदी में बात कर रहा है या यात्रियों के साथ दुर्व्यवहार कर रहा है, तो उनकी पार्टी कार्रवाई करेगी. उन्होंने कहा, ‘अगर हमें पता चला कि कोई ऑटो-रिक्शा चालक हिंदी में बात कर रहा है या लोगों के साथ बदसलूकी कर रहा है, तो हम उन्हें पीटेंगे. अगर आप लोगों को परेशान करेंगे, तो आपको पिटाई झेलनी पड़ेगी. लोगों से यह मत कहिए कि उन्हें उत्तर प्रदेश की भाषा बोलनी होगी या हिंदी बोलनी होगी. हम मराठी बोलेंगे. आपको इतना समझना चाहिए.'
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि चालक संगठनों के प्रतिनिधियों ने अधिक समय की मांग की थी, क्योंकि इस क्षेत्र में अलग-अलग उम्र और शैक्षणिक पृष्ठभूमि के लोग काम करते हैं.
फडणवीस की भी घेरे में लिया
अमित ठाकरे ने मराठी सीखने के लिए एक साल की मोहलत दिए जाने पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की भी आलोचना की. उन्होंने आरोप लगाया कि आगामी उत्तर प्रदेश चुनावों को ध्यान में रखकर यह फैसला लिया गया है. उन्होंने कहा, ‘उन्हें 10 साल का विस्तार दे दीजिए. उन्हें 15 साल का विस्तार दे दीजिए. हम समझ गए हैं कि आपको मराठी भाषा और हमारे राज्य से कितना प्रेम है.'
महाराष्ट्र सरकार ने 12 अगस्त से ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और ऐप आधारित कैब सहित व्यावसायिक यात्री वाहनों के चालकों के लिए मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान अनिवार्य कर दिया था.
नए नियम में क्या है?
संशोधित नियमों के अनुसार, यदि कोई चालक मराठी का कामचलाऊ ज्ञान प्रदर्शित नहीं कर पाता है, तो उसके ड्राइविंग लाइसेंस के प्राधिकार को तीन महीने के लिए निलंबित किया जा सकता है. बार-बार नियम का उल्लंघन करने पर उसका परमिट स्थायी रूप से रद्द भी किया जा सकता है. हाई कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि यह नियम संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है. याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 में ड्राइविंग लाइसेंस के लिए किसी भाषा के ज्ञान की अनिवार्यता का प्रावधान नहीं है.
यह भी पढ़ें : मुंबई में ऑटो-टैक्सी चालकों को मराठी भाषा सीखने के लिए मिला एक साल का एक्सटेंशन
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं