वेस्टइंडीज के खिलाफ आगामी सीमित ओवरों की (व्हाइट-बॉल) सीरीज के लिए बुधवार को भारत की टीम की घोषणा की गई, जिसमें अनुभवी जोड़ी रोहित शर्मा और विराट कोहली ने टीम में अपनी जगह बरकरार रखी है. वेस्टइंडीज सीरीज के बाद 2027 वनडे विश्व कप की तैयारियों को गति देने के लिए भारत का मुकाबला न्यूजीलैंड से होगा. इस प्रमुख टूर्नामेंट के लिए भारत की टीम में रोहित की जगह को लेकर अनिश्चितता के बीच भारत के पूर्व ऑलराउंडर युवराज सिंह ने एक बड़ा बयान दिया है. साल 2007 टी20 विश्व कप और 2011 वनडे विश्व कप विजेता भारतीय टीम का हिस्सा रहे युवराज ने कहा कि चयन समिति को एक मजबूत मुख्य (कोर) समूह बनाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर खिलाड़ी को पर्याप्त मैच खेलने का मौका मिले.
क्रिकइन्फो से बात करते हुए युवराज ने कहा, 'उन्हें एक साल के समय में खेलने वाली एक ही टीम बनाने पर ध्यान देना होगा, क्योंकि आप आखिरी मौके पर बड़े बदलाव नहीं करना चाहते हैं.' उन्होंने आगे कहा, 'आपके खिलाड़ी चाहे जो भी हों, चाहे वे 16 हों या 20, यह महत्वपूर्ण है कि सभी को खेलने का समय मिले क्योंकि जाहिर तौर पर अब टी20 ज्यादा और 50 ओवरों का क्रिकेट कम हो रहा है. जो भी मैच उपलब्ध हैं, उनमें यह महत्वपूर्ण है कि खिलाड़ियों को विश्व कप की तैयारी के लिए पर्याप्त मैच खेलने का समय मिले.' युवराज ने कहा कि भारत को अतीत में उन टूर्नामेंटों में संघर्ष करना पड़ा है जहां उन्होंने महत्वपूर्ण मोड़ों पर बड़े बदलाव किए, और उन्होंने विश्व कप अभियान के लिए चुने गए खिलाड़ियों का समर्थन करने की आवश्यकता पर जोर दिया.
हर हालात में खिलाड़ियों का साथ दे प्रबंधन
एक ओवर में लगातार 6 छक्कों का रिकॉर्ड अपनी झोली में डालने वाले युवी ने कहा, 'भारत जब भी चूका है, तब हुआ है जब उन्होंने आखिरी मौके पर या टूर्नामेंट के दौरान कुछ बड़े बदलाव किए हैं. इसलिए मुझे लगता है कि यह महत्वपूर्ण है कि हम उस टीम पर कायम रहें. हमें विश्वास है कि वह 2027 का विश्व कप उठा सकती है. भारतीय प्रबंधन उस समय तक उन खिलाड़ियों का साथ दें. फिर चाहे वे असफल हों या सफल हों. टीम में विश्वास बहुत महत्वपूर्ण है.' पूर्व ऑलराउंडर ने सीमित ओवरों के क्रिकेट में भारत के निरंतर प्रदर्शन को भी रेखांकित किया और कहा कि तत्काल ध्यान एक ऐसी टीम बनाने पर होना चाहिए जो विभिन्न परिस्थितियों से निपटने में सक्षम हो.
'यह है कंगारुओं की सफलता का मंत्र'
युवराज ने कहा, 'सफेद गेंद के क्रिकेट में हमारे पास काफी निरंतरता रही है. उन्हें पहले सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई करने और फिर अंतिम दो में खेलने के बारे में सोचना होगा. मुझे लगता है कि वह अभी दूर की बात है। ध्यान एक ऐसी टीम तैयार करने पर होना चाहिए जो एकजुट हो और किसी भी स्थिति में लड़ने के लिए तैयार हो." युवराज ने ऑस्ट्रेलिया की विश्व कप सफलताओं की ओर भी इशारा किया और कहा कि व्यक्तिगत मैच-विनर्स पर भरोसा करने की उनकी क्षमता उनकी उपलब्धियों के पीछे एक मुख्य कारक रही है. उन्होंने कहा, 'यही कारण है कि ऑस्ट्रेलिया सफल रहा है, क्योंकि मेरा मानना है कि ऑस्ट्रेलियाई टीम ने जब भी विश्व कप जीता है, उनके पास कई ऐसे मैच-विनर रहे हैं जो व्यक्तिगत रूप से मैच जिता सकते हैं। किसी खास दिन पर कोई एक काम कर देता है. और जब वे सभी मुश्किल में होते हैं, तो वे मिलकर टीम को बाहर निकाल लेते हैं.'
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