करीब छह साल पुराने दिशा सालियान मौत मामले में अब जांच का नया अध्याय शुरू हो गया है. मुंबई हाईकोर्ट के आदेश के बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली है. हालांकि एजेंसी ने अभी किसी भी व्यक्ति को आरोपी के तौर पर नामजद नहीं किया है. इस कदम के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में भी हलचल बढ़ गई है. जहां राज्य सरकार का कहना है कि जांच अदालत के निर्देशों के अनुरूप आगे बढ़ रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रहा है. मामले को लेकर भाजपा और विपक्षी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है.
हाईकोर्ट के आदेश के बाद दर्ज हुई FIR
दिशा सालियान की मौत के मामले में दो सितंबर को मुंबई हाईकोर्ट ने CBI जांच के आदेश दिए थे. अदालत ने मामले में छह वर्षों तक प्राथमिकी दर्ज नहीं होने पर मुंबई पुलिस को फटकार भी लगाई थी. इसके बाद CBI ने 13 सितंबर को औपचारिक रूप से FIR दर्ज कर ली. अधिकारियों के अनुसार, अदालत के निर्देशों का पालन करते हुए अभी किसी भी व्यक्ति को नामजद आरोपी नहीं बनाया गया है.
महाराष्ट्र सरकार ने क्या कहा?
महाराष्ट्र के गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पूरा प्रकरण अब CBI को सौंप दिया गया है और जांच न्यायालय के निर्देशों के अनुसार आगे बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि जांच में जिनकी भी भूमिका संदिग्ध है या जिनसे पूछताछ, जांच होना जरूरी है, उनके खिलाफ नियमानुसार उचित कार्रवाई की जा रही है. जांच और आगे की सभी कार्रवाई न्यायालय के निर्देशों का सख्ती से पालन करते हुए ही की जा रही है.
सुप्रिया सुले ने उठाए सवाल
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने इस मामले में FIR दर्ज होने पर हैरानी जताते हुए कहा कि यही सरकार पहले इस मामले को बंद कर चुकी थी, ऐसे में अब दोबारा जांच शुरू होने पर सवाल उठना स्वाभाविक है. सुले ने कहा कि वह पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के वरिष्ठ नेता संजय राउत से भी बातचीत करेंगी. उन्होंने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ करने की प्रवृत्ति पहले भी देखने को मिलती रही है और इस मामले में भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं.
भाजपा ने जांच पर जताया भरोसा
भाजपा नेता और मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि मामला न्यायालय के विचाराधीन है, इसलिए इस पर अधिक बोलना उचित नहीं होगा. उन्होंने कहा कि जांच से सच्चाई सामने आ जाएगी और दूध का दूध तथा पानी का पानी हो जाएगा. भाजपा का कहना है कि जांच एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से अपना काम करने देना चाहिए.
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