
- महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलन कार्यकर्ता मनोज जरांगे लगातार तीसरे दिन आजाद मैदान में भूख हड़ताल पर हैं.
- मनोज जरांगे का कहना है कि मराठा आरक्षण की मांग पूरी न होने तक वह मुंबई नहीं छोड़ेंगे.
- राज्य सरकार मराठा आरक्षण के मुद्दे को सुलझाने के लिए कैबिनेट उप-समिति के माध्यम से कानूनी सलाह ले रही है.
Maratha Reservation Movement: महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलन लगातार जारी है. मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने रविवार को कहा कि जब तक मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की उनकी मांग पूरी नहीं हो जाती, तब तक वह मुंबई नहीं छोड़ेंगे. उनका अनशन रविवार को तीसरे दिन भी जारी रहा. जरांगे ने यह भी दावा किया कि उनकी मांग संवैधानिक रूप से वैध है और सरकार के पास ऐसे रिकॉर्ड मौजूद हैं, जो दर्शाते हैं कि कुनबी और मराठा एक ही जाति हैं. दूसरी ओर रविवार को एनसीपी शरद पवार गुट की सांसद सुप्रिया सुले मनोज जारंगे पाटिल से मिलने आजाद मैदान पहुंचीं.
मनोज जरांगे से मिलने पहुंचीं सुप्रियो सुले को भीड़ ने घेरा
लेकिन इस दौरान वहां मौजूद भीड़ ने सुप्रियो सुले को घेर लिया. वहां मौजूद लोग सुप्रिया सुले से मराठा आंदोलन के मुद्दे पर जवाब मांग रहे थे. बड़ी मुश्किल से सुप्रिला सुले भीड़ से निकलने में सफल हो पाई. सुले से पहले भी पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मनोज से बातचीत कर चुके हैं, हालाँकि बातचीत का विवरण अभी गुप्त रखा गया है.
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— NDTV Marathi (@NDTVMarathi) August 31, 2025
अपने कार्यक्रम रद्द कर मुंबई पहुंचे डिप्टी सीएम
उप-मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अजित पवार, रविवार को पुणे और दरेगांव के निर्धारित कार्यक्रमों को रद्द कर मुंबई लौट रहे हैं. शरद पवार के भी आज रात शहर पहुंचने की उम्मीद है, और उनके जारंगे पाटिल से मिलने की संभावना है. गौरतलब है कि कल ही पवार ने सुझाव दिया था कि तमिलनाडु की तरह, महाराष्ट्र भी 50% आरक्षण की सीमा को पार करने के लिए संशोधन पर विचार कर सकता है.

मंत्री बोले- सरकार मामला सुलझाने पर कर रही काम
रविवार को महाराष्ट्र के मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने रविवार को कहा कि राज्य सरकार मराठा आरक्षण के मुद्दे को सुलझाने के लिए काम कर रही है और इस मामले पर कार्यकर्ता मनोज जरांगे के प्रस्ताव पर कानूनी सलाह लेगी. विखे पाटिल ने पत्रकारों से बात करते हुए विपक्षी महा विकास आघाडी (एमवीए) के नेताओं पर मुद्दे के समाधान में योगदान देने के बजाय 'राजनीति करने' का आरोप लगाया.
दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में भूख हड़ताल पर मनोज जरांगे
जरांगे मराठा समुदाय के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर शुक्रवार से दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में भूख हड़ताल पर हैं. वह चाहते हैं कि मराठों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में शामिल कृषक जाति कुनबी के रूप में मान्यता दी जाए, ताकि उन्हें सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण मिल सके, हालांकि ओबीसी नेता इसका विरोध कर रहे हैं.
बीती रात सीएम के साथ एक घंटे तक चली मीटिंग
विखे पाटिल ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए शनिवार देर रात मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की थी. सूत्रों के अनुसार, यह बैठक एक घंटे तक चली. रविवार को विखे पाटिल के निवास पर कैबिनेट उप-समिति की बैठक हुई, जिसमें ओबीसी श्रेणी में मराठों को आरक्षण देने के जरांगे के प्रस्ताव पर विचार-विमर्श किया गया.
बैठक में कई वरिष्ठ नेता थे मौजूद
बैठक में मंत्री गिरीश महाजन, दादा भुसे, मकरंद पाटिल, शिवेंद्रराजे भोसले और अन्य ने भाग लिया. कुछ ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से भाग लिया. विधि एवं न्यायपालिका विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे. बैठक के बाद विखे पाटिल ने कहा कि जरांगे के प्रस्ताव पर चर्चा सकारात्मक रही.

मंत्री बोले- उप-समिति इस मामले को सुलझाने में जुटी है
उन्होंने कहा, 'मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस के नेतृत्व में उप-समिति इस मामले को सुलझाने के लिए काम कर रही है. हमने हैदराबाद और सतारा गजेटियर से जुड़े मुद्दों पर भी गौर किया है. कार्यान्वयन के दौरान कानूनी बाधाओं से बचने के लिए, हम राज्य के महाधिवक्ता से परामर्श करेंगे.' विखे पाटिल ने कहा कि बीड के विधायकों द्वारा दिए गए सुझावों समेत कई सुझावों पर समिति विचार कर रही है.
4 बार सीएम रहे शरद पवार ने क्यों नहीं उठाया कदमः मंत्री
जरांगे से मुलाकात को लेकर उठे राजनीतिक विवाद पर उन्होंने कहा, 'किसी को भी उनसे मिलने पर कोई आपत्ति नहीं है. लेकिन जो लोग केवल राजनीतिक लाभ के लिए उनसे मिल रहे हैं, उनसे आरक्षण के मुद्दे पर उनके रुख के बारे में भी पूछा जाना चाहिए.' राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार पर निशाना साधते हुए मंत्री ने पूछा कि चार बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे और एक दशक तक केंद्रीय मंत्री रहे पवार ने पहले कोई कदम क्यों नहीं उठाया.
शरद पवार को उपदेश देने के बदले रास्ता बताना चाहिएः मंत्री
उन्होंने कहा, 'पवार अब मराठा आरक्षण के मुद्दे को सुलझाने के लिए संविधान में संशोधन की बात कर रहे हैं. उन्होने मंडल आयोग के सामने या सत्ता में रहते हुए यह मुद्दा क्यों नहीं उठाया? उन्होंने तब मराठों के लिए आरक्षण क्यों सुनिश्चित नहीं किया. उन्हें अब उपदेश देने के बजाय यह स्पष्ट करना चाहिए कि मराठों को ओबीसी (श्रेणी) के तहत आरक्षण मिल सकता है या नहीं.'

शरद पवार ने आरक्षण की मांग का किया है समर्थन
शरद पवार ने शनिवार को कहा था कि न्यायालय ने कुल आरक्षण पर 52 प्रतिशत की सीमा तय की है और इसे बढ़ाने के लिए संविधान संशोधन आवश्यक है. उन्होंने कहा कि न्यायालय ने आरक्षण पर 52 प्रतिशत की सीमा लगाई है, लेकिन अदालत ने तमिलनाडु में 72 प्रतिशत आरक्षण की पुष्टि की है. उन्होंने कहा था कि इस मुद्दे पर केंद्र की भूमिका पारदर्शी और स्पष्ट होनी चाहिये.
आंदोलन के चलते सीएसटी के पास यातायात प्रभावित
पुलिस के अनुसार, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) पर बड़ी संख्या में आंदोलनकारियों की मौजूदगी के कारण इलाके और आसपास के चौराहों पर यातायात प्रभावित हुआ.
मुंबई यातायात पुलिस ने ‘एक्स' पर पोस्ट कर कहा, ‘‘आजाद मैदान में आंदोलन अभी जारी है. आंदोलनकारी सीएसएमटी चौराहे पर मौजूद हैं, जिससे इलाके और आसपास के चौराहों पर यातायात प्रभावित हो रहा है. वाहन चालकों को सलाह दी जाती है कि वे इन मार्गों से बचें और अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्ग अपनाएं.''

7 बार अनशन कर चुके जरांगे लड़ रहे अंतिम लड़ाई
जरांगे ने कहा कि मराठा समुदाय के लोग अपने दिल में बहुत दर्द लेकर आंदोलन में भाग लेने मुंबई आए हैं और उन्होंने महाराष्ट्र सरकार से आग्रह किया कि उन्हें ‘‘भीड़'' न समझा जाए. आरक्षण कार्यकर्ता आरक्षण की मांग को लेकर शुक्रवार से दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन अनशन पर हैं. बताते चले कि सात बार अनशन कर चुके जरांगे ने कहा कि यह आंदोलन आरक्षण पाने के लिए समुदाय की ‘‘अंतिम लड़ाई'' है.
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