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Income Tax की वसूली में बड़ी राहत: बकाया होने पर अब नहीं होगी गिरफ्तारी, CBDT ने बदले नियम

Income Tax Rules 2026: CBDT ने आयकर नियम 2026 के 'नियम 225' में संशोधन करते हुए बकाया टैक्स वसूली की प्रक्रिया से गिरफ्तारी और हिरासत के प्रावधान पूरी तरह हटा दिए हैं, जिसे 1 अप्रैल 2026 से लागू माना जाएगा.

Income Tax की वसूली में बड़ी राहत: बकाया होने पर अब नहीं होगी गिरफ्तारी, CBDT ने बदले नियम
Income Tax Recovery Rules: अब बकाया टैक्स की वसूली में गिरफ्तारी और हिरासत का प्रावधान नहीं होगा.

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने टैक्स वसूली से जुड़े नियमों में बदलाव किया है, जिससे टैक्स डिफॉल्टर्स को बड़ी राहत मिलने वाली है.अब अगर आपका इनकम टैक्स बकाया है तो अब उसकी वसूली के लिए आपको गिरफ्तार करके जेल नहीं भेजा जा सकता है. नए नियमों के तहत बकाया टैक्स की वसूली के लिए संपत्ति कुर्क करने और उसे बेचने जैसे तरीकों का इस्तेमाल किया जाएगा.

1 अप्रैल 2026 से लागू बदलाव

CBDT ने इनकम टैक्स नियम, 2026 के नियम 225 में बदलाव  करते हुए टैक्स की वसूली की प्रक्रिया में गिरफ्तारी और हिरासत से जुड़े प्रावधान हटा दिए गए हैं. इन बदलावों को 1 अप्रैल 2026 से लागू माना गया है. बता दें कि नियम 225 में गिरफ्तारी की शक्ति से जुड़ा प्रावधान हटाया गया है. एक दूसरे प्रावधान से ‘गिरफ्तारी और हिरासत को छोड़कर' जैसे शब्द भी हटा दिए गए हैं. 

अब संपत्ति से होगी वसूली

नए बदलाव के बाद बकाया टैक्स की वसूली संपत्ति कुर्क करके उसे बेचने या दूसरे संपत्ति आधारित तरीकों से की जाएगी. इसका मतलब यह है कि टैक्स वसूली की प्रक्रिया जारी रहेगी, लेकिन गिरफ्तारी अब तय वसूली प्रक्रिया का हिस्सा नहीं होगी. यह बदलाव वित्त अधिनियम, 2026 में किए गए बदलावों के अनुरूप है और वसूली को संपत्ति आधारित तरीकों की ओर ले जाता है.

वैल्यूअर्स को 6 महीने की राहत

CBDT ने वैल्यूअर्स और ऑथराइज्ड इनकम टैक्स प्रैक्टिसनर्स के लिए भी राहत दी है. नियम 246 और 256 के तहत रजिस्ट्रेशन की आखिरी तारीख 30 सितंबर 2026 से बढ़ाकर 31 मार्च 2027 कर दी गई है.वैल्यूअर्स के लिए फॉर्म 169 में बदलाव किया गया है. अब इसमें उन्हें अपनी पर्सनल डिटेल, संपत्ति की कैटेगरी, पढ़ाई, पुरानी नौकरी और अनुभव की जानकारी भरनी होगी. इसके अलावा, पिछले तीन सालों में किए गए सभी वैल्यूएशन काम का ब्योरा भी देना अनिवार्य होगा.

11 तरह की संपत्तियों का हो सकेगा वैल्यूएशन

वैल्यूअर्स कुल 11 तरह की संपत्तियों के वैल्यूएशन के लिए रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं. इनमें जमीन-मकान, खेती की जमीन, बागान, जंगल, खदानें, शेयर-बॉन्ड,सिक्योरिटीज, मशीनरी, आभूषण और आर्ट वर्क जैसी संपत्तियां शामिल हैं.हर तरह की संपत्ति के लिए अलग से आवेदन करना होगा, जिसकी फीस ₹10,000 तय की गई है. हालांकि, वेल्थ टैक्स एक्ट, 1957 के तहत पहले से रजिस्टर्ड वैल्यूअर्स को छूट दी गई है उन्हें यह फीस नहीं देनी होगी.

इनकम टैक्स प्रैक्टिसनर्स को भी मिला समय

इनकम टैक्स प्रैक्टिसनर्स के लिए फॉर्म 171 में भी बदलाव किया गया है. अब इसमें अपनी पढ़ाई-लिखाई और पुराने रजिस्ट्रेशन की पूरी जानकारी भरनी होगी. साथ ही, आवेदक को यह भी बताना होगा कि वह कम से कम एक साल से इनकम टैक्स अधिकारियों के सामने प्रैक्टिस कर रहा है.

इलेक्ट्रॉनिक तरीके से भेजे जाएंगे नोटिस

नियमों में एक और बड़ा बदलाव किया गया है. अब कुछ जरूरी सूचनाएं भेजने के लिए ‘डिजिटल सिग्नेचर' की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है. इसकी जगह अब सीधे ‘इलेक्ट्रॉनिक माध्यम' जैसे ईमेल या ऑनलाइन पोर्टल से ही जानकारी भेजी जा सकेगी.

CBDT ने ये सभी बदलाव 17 सितंबर 2026 को जारी इनकम-टैक्स फोर्थ अमेंडमेंट रूल्स, 2026 के तहत किए हैं. कुछ बदलाव 17 सितंबर से लागू हुए हैं, जबकि नियम 225 समेत नियम 2 से 4 में किए गए बदलावों को 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी माना गया है.

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