- उल्हासनगर क्राइम ब्रांच ने साइबर अपराध और ऑनलाइन सट्टेबाजी के एक अंतरराज्यीय गिरोह को गिरफ्तार किया है
- गिरोह ने देशभर के लोगों से लगभग अट्ठावन करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की और फर्जी बैंक खाते बनाये थे
- छापेमारी में 21 मोबाइल, 155 सिम कार्ड, 105 बैंक पासबुक और तीन लैपटॉप जब्त किए गए हैं
महाराष्ट्र के उल्हासनगर में क्राइम ब्रांच ने साइबर अपराध और ऑनलाइन सट्टेबाजी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है. गुप्त सूचना के आधार पर की गई कार्रवाई में पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार किया. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह गिरोह साइबर अपराधियों को फर्जी बैंक खाते उपलब्ध कराने के साथ ऑनलाइन सट्टा बाजार भी संचालित कर रहा था.
58 करोड़ रुपये की ठगी का खुलासा
पुलिस जांच में पता चला है कि गिरोह ने अपने नेटवर्क के जरिए देशभर के लोगों को निशाना बनाकर करीब 58 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की. ठगी की रकम अलग-अलग बैंक खातों के माध्यम से इकट्ठा की जाती थी और फिर उसे विभिन्न चैनलों से आगे भेजा जाता था. इस खुलासे ने जांच एजेंसियों को भी चौंका दिया है.
छापेमारी में मिला बड़ा जखीरा
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी की. वहां से साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाली बड़ी मात्रा में सामग्री बरामद हुई. पुलिस ने 21 मोबाइल फोन, 155 सिम कार्ड, 105 बैंक पासबुक और तीन लैपटॉप जब्त किए हैं. जांच एजेंसियों का मानना है कि इन उपकरणों का उपयोग फर्जी खाते खोलने, ठगी की रकम ट्रांसफर करने और ऑनलाइन सट्टेबाजी संचालित करने में किया जाता था.
कई राज्यों तक फैला था नेटवर्क
क्राइम ब्रांच की पूछताछ में खुलासा हुआ है कि गिरोह का नेटवर्क केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं था. इसके तार दिल्ली, पंजाब और ओडिशा समेत कई राज्यों से जुड़े हुए हैं. आरोपी देशभर के लोगों को अलग-अलग तरीकों से अपने जाल में फंसाकर आर्थिक नुकसान पहुंचाते थे. पुलिस को आशंका है कि इस नेटवर्क से जुड़े और भी लोग सामने आ सकते हैं.
मास्टरमाइंड की तलाश में जुटी पुलिस
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस बड़े रैकेट का असली मास्टरमाइंड कौन है और इसमें अन्य लोगों की क्या भूमिका रही. साथ ही यह भी खंगाला जा रहा है कि ठगी के करोड़ों रुपये आखिर कहां भेजे गए और क्या इसमें हवाला या किसी अन्य नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया. अधिकारियों का मानना है कि इस गिरोह के पकड़े जाने से कई अन्य साइबर ठगी के मामलों का भी खुलासा हो सकता है.
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