विज्ञापन

हर रोज तीन सुसाइड, महाराष्ट्र के किसानों की सासें कौन निचोड़ रहा

महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. राज्य में हर दिन औसतन तीन किसान आत्मघाती कदम उठा रहे हैं. मराठवाड़ा का बीड जिला सबसे ज्यादा प्रभावित आ रहा है. जबकि छत्रपति संभाजीनगर दूसरे स्थान पर है.

हर रोज तीन सुसाइड, महाराष्ट्र के किसानों की सासें कौन निचोड़ रहा
महाराष्ट्र में गहराता जा रहा किसानों पर संकट (फाइल फोटो)
  • महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में किसानों की समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं.
  • मराठवाड़ा इलाके में पिछले 8 महीनों में यहां 653 किसानों ने आत्महत्याएं की हैं.
  • आंकड़ों के मुताबिक हर दिन औसतन तीन किसान आत्महत्या कर रहे हैं.

महाराष्ट्र में मौसम किसानों का साथ बिल्कुल भी नहीं दे रहा है. कभी अतिवृष्टि, कभी सूखा, तो कभी फसलों को उचित दाम न मिलने से अन्नदाता की आर्थिक कमर टूट चुकी है. जिससे महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. हालात हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि इस साल के पहले आठ महीनों में मराठवाड़ा के 653 किसानों ने आत्महत्या कर ली है. यानी औसतन हर दिन तीन किसान जिंदगी की जंग हार रहे हैं. सबसे चिंताजनक स्थिति बीड और छत्रपति संभाजीनगर जिलों की है, जहां आत्महत्याओं के सबसे अधिक मामले सामने आए हैं. जबकि इस साल भी महाराष्ट्र के 75 फीसदी हिस्से को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है. 

मराठवाड़ा सबसे ज्यादा प्रभावित

मराठवाड़ा लंबे समय से प्राकृतिक आपदाओं और कृषि संकट का सामना करता रहा है. पिछले साल हुई अतिवृष्टि ने किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया था. किसान अभी उस नुकसान से उबर भी नहीं पाए थे कि इस साल कई इलाकों में सूखे जैसे हालात बन गए. बारिश की कमी सिंचाई के सीमित साधन और फसलों के घटते उत्पादन ने किसानों की परेशानियां और बढ़ा दी हैं. सोयाबीन, कपास, तूर और अन्य प्रमुख फसलों की पैदावार प्रभावित होने से किसानों की आय में भारी गिरावट आई है. दूसरी ओर खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही है. कर्ज, नुकसान और भविष्य की अनिश्चितता ने किसानों को मानसिक और आर्थिक संकट में धकेल दिया है. यही वजह है कि जनवरी से अगस्त तक मात्र आठ महीनों में मराठवाड़ा में 653 किसानों ने आत्महत्या की है.

हर तीन किसान कर रहे आत्महत्या

यह आंकड़ा सिर्फ एक संख्या नहीं, बल्कि कृषि व्यवस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की गंभीर स्थिति को उजागर करता है. हर दिन औसतन तीन किसानों का आत्महत्या करना पूरे समाज और प्रशासन के लिए गंभीर चेतावनी माना जा रहा है. जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो बीड जिला सबसे अधिक प्रभावित दिखाई देता है. यहां आठ महीनों में 149 किसानों ने आत्महत्या की है. इसके बाद छत्रपति संभाजीनगर जिले में 138 किसानों ने अपनी जीवनलीला समाप्त की. विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार सूखा, फसल नुकसान, बढ़ता कर्ज और आय के सीमित साधन इन जिलों के किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं.

महाराष्ट्र के इन जिलों में सबसे ज्यादा संख्या

  • बीड: 149
  • छत्रपति संभाजीनगर: 138
  • धाराशिव: 88
  • नांदेड़: 82
  • जालना: 61
  • लातूर: 46
  • परभणी: 45
  • हिंगोली: 44

ये वीडियो भी देखिए

पूरा मराठवाड़ा सूखा घोषित 

इसका मतलब है कि मराठवाड़ा का कोई भी जिला इस संकट से अछूता नहीं है. कई किसान परिवारों का कहना है कि फसल बर्बाद होने के बाद कर्ज चुकाने का दबाव लगातार बढ़ता जाता है। बैंक, सहकारी संस्थाएं और निजी साहूकारों का आर्थिक बोझ किसानों को मानसिक रूप से तोड़ रहा है. 

खेती में इस्तेमाल होने वाले बीज, खाद, कीटनाशकों और मजदूरी की लागत लगातार बढ़ रही है. दूसरी तरफ उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा. कई स्थानों पर किसानों को उत्पादन लागत से भी कम कीमत पर अपनी उपज बेचनी पड़ रही है. ऐसे में किसान परिवारों के सामने रोजमर्रा का खर्च चलाना, बच्चों की पढ़ाई और कर्ज चुकाना बड़ी चुनौती बन गया है. कृषि जानकारों का कहना है कि केवल मुआवजे से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि दीर्घकालिक कृषि सुधार और स्थायी सिंचाई योजनाओं की जरूरत है. 

ये भी पढ़ेंः महाराष्ट्र की सियासत को हिलाने वाले मनोज जरांगे अपने ही गांव में क्यों हारे? 3 साल से सजे मंच का पैकअप

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Maharashtra Farmers, Maharashtra Farmers News, Marathwada Region Of Maharashtra, Maharashtra News, Maharashtra Low Rainfall
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com