- NDTV पाकिस्तानी आतंकी शहजाद भट्टी के नेटवर्क तक पहुंचा. इस नेटवर्क में फंसे 2 युवाओं से डिटेल में बात की.
- दोनों युवाओं ने बताया कि सोशल मीडिया पर शुरू हुआ संपर्क बातचीत और टास्क देने की कोशिश तक पहुंचा.
- भट्टी का नेटवर्क भारत के कई राज्यों में सक्रिय है, जिसमें 253 संदिग्धों की गिरफ्तारी और 80 से अधिक FIR हैं.
Shahzad Bhatti Network: पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के मोहरे और देश के सबसे बड़े दुश्मन आतंकी शहजाद भट्टी के नेटवर्क तक NDTV की टीम पहुंची है. हमने भट्टी के गैंग में शामिल होने जा रहे दो युवाओं से बातचीत की है, NDTV पहला चैनल है जिसने भट्टी के गैंग में शामिल होने जा रहे युवाओं से बातचीत की है और उसके पूरे नेटवर्क को बेनकाब किया है. इन दोनों लड़कों से बातचीत पाकिस्तान की भारत के खिलाफ साजिश के जिंदा सबूत है. दोनों युवाओं को गुजरात ATS ने समय रहते पकड़ लिया. दोनों का दावा है कि उन्हें किसी आतंकी वारदात को अंजाम देने का टास्क मिलने से पहले ही एजेंसियों ने रोक लिया.
आतंकी शहजाद भट्टी के नेटवर्क को लेकर NDTV को दो ऐसे युवाओं की कहानी मिली है, जो सोशल मीडिया के जरिए उसके नेटवर्क के संपर्क में आए. इनमें से एक युवक ने भट्टी को सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर समझकर उसे करीब डेढ़-दो साल तक फॉलो किया, जबकि दूसरे युवक को पैसे और लग्जरी लाइफ का लालच देकर उसके नेटवर्क तक पहुंचाया गया.
जांच एजेंसियों के मुताबिक शहजाद भट्टी सोशल मीडिया को सिर्फ प्रचार के लिए नहीं, बल्कि युवाओं तक पहुंच बनाने के लिए भी इस्तेमाल करता है. पहले सोशल मीडिया पर प्रोफाइल दिखाई जाती है, फिर फॉलोअर्स और निजी संदेशों के जरिए संपर्क बनाया जाता है. इसके बाद पैसे, पहचान, लग्जरी लाइफ या विदेश जाने जैसे लालच देकर युवाओं को नेटवर्क के करीब लाने की कोशिश की जाती है. गुजरात ATS की कार्रवाई में सामने आई इन दोनों युवाओं की कहानियां इसी कथित तरीके की अलग-अलग तस्वीर दिखाती हैं.
पहली कहानी: भट्टी को सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर समझ बैठा 29 साल का युवक
गुजरात के बड़गांव का रहने वाला 29 साल का यह युवक 12वीं तक पढ़ा है. परिवार में माता-पिता और एक भाई है. पिता प्रॉपर्टी का काम करते हैं. युवक पिछले करीब पांच साल से जिम ट्रेनर के तौर पर काम कर रहा था और सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहता था.
करीब डेढ़-दो साल पहले इंस्टाग्राम पर उसे शहजाद भट्टी की रील्स दिखाई देने लगीं. युवक के मुताबिक उसे उस समय बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि जिस शख्स को वह सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर समझकर फॉलो कर रहा है, उस पर आतंकी नेटवर्क चलाने के गंभीर आरोप हैं.
युवक ने भट्टी को फॉलो करना शुरू कर दिया. उसकी पोस्ट लाइक की और कमेंट भी किए. करीब डेढ़ साल बाद भट्टी की तरफ से उससे सीधा संपर्क हुआ

शहजाद भट्टी के फंसे गुजरात के युवक से बात करते एनडीटीवी के क्राइम रिपोर्टर मुकेश सिंह सेंगर.
Photo Credit: NDTV
युवक के मुताबिक, “उसके इंस्टाग्राम पर रील आ गई थी, मुझे लगा सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर होगा. सेलिब्रिटी जैसे दिखते थे. फिर उसको फॉलो कर दिया. थोड़े टाइम फॉलो किया, फिर मैसेज किए थे. मैसेज का कोई रिप्लाई नहीं आया था, खाली सलाम का रिप्लाई आया था. भाई सलाम करके रिप्लाई आया था और कहां से हो, बस इतनी बात हुई थी मेरी. बस आगे कोई बात हुई नहीं थी.”
युवक बताता है कि भट्टी से बातचीत शुरू होने के तुरंत बाद गुजरात ATS ने उसे पकड़ लिया. “फिर मुझे दूसरे दिन ही पकड़ के ऑफिस में लाया गया. पूरे दिन रखा ऑफिस में, पूरी पूछताछ हुई. फिर मेरे को बोल दिया ऐसे नहीं करने का. कुछ टास्क दिया भी नहीं था मेरे को और सर ने बोला था कि ऐसा कोई मैसेज या कॉल आए तो मुझे इनफॉर्म कर देना.”
युवक के मुताबिक बातचीत बहुत सीमित थी. उसके पास भट्टी की तरफ से एक ऑडियो मैसेज भी आया था. “इंस्टाग्राम पर एक्टिव रहता था पर अब इंस्टाग्राम भी चलाना छोड़ दिया है. शहजाद भट्टी जैसी आवाज थी उसकी, मैसेज में ही आवाज आई थी, ऑडियो मैसेज था. उसने पूछा कहां से हो और सलाम का जवाब दिया था बस. उतनी बात हुई, आगे कोई बात हुई नहीं थी.”
वह आगे बताता है कि वह भट्टी को काफी समय से फॉलो कर रहा था. “मैं उसे डेढ़-दो साल से फॉलो कर रहा था. उसकी रील आ रही थी, वो देख रहा था. उस टाइम मुझे मालूम नहीं था. मैंने उसके पोस्ट लाइक किए और कमेंट किया. फिर इधर लाया गया, फिर पता चला कि ये आतंकवादी है. मुझे लगा सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर है, हीरो जैसा दिखता था. इस्लामी चीजें बता रहे थे, जैसे कोई मौलाना हो, ऐसी चीजें बोल रहे थे इंस्टाग्राम पर.”
गुजरात ATS की पूछताछ के बाद युवक को समझाया गया कि अगर दोबारा इस तरह का कोई संपर्क होता है तो तुरंत एजेंसी को जानकारी दे.
“मुझे यहां आकर समझाया गया कि ऐसे कोई कॉल या मैसेज आए तो रिप्लाई नहीं करना, तुरंत हमें जानकारी देना. हमने सर को बोल दिया, कुछ भी होगा तो हम आपको बता देंगे.”
“अब युवाओं को कहूंगा, ऐसे मैसेज आए तो पुलिस को बताएं”
युवक के मुताबिक ATS की कार्रवाई के बाद भट्टी की तरफ से उससे कोई संपर्क नहीं हुआ. “मेरे पकड़े जाने के बाद भट्टी ने मुझे कभी संपर्क नहीं किया. मैंने सब दे दिया था, इंस्टाग्राम, वॉट्सऐप का सब दे दिया था और आगे भट्टी का क्या दूसरा संपर्क करेगा तो हम इनफॉर्म कर देंगे.” वह अब दूसरे युवाओं को भी सावधान रहने की अपील करता है.
उसने आगे कहा कि अब युवाओं को बोलेंगे, ऐसे भी कोई मैसेज आए तो उसमें पड़ने का नहीं और नजदीकी पुलिस स्टेशन या पुलिस को इनफॉर्म कर देना. मैं सबको ये बताना चाहता हूं, इसमें पड़ने का नहीं. उसके बाद से ऐसा कुछ दिखा नहीं मेरे को. अब सोशल मीडिया पर ज्यादा एक्टिव नहीं रहता. पहले था. कोई टास्क नहीं दिया. मैं यूथ के लिए बोलना चाहता हूं कि देश के लिए वफादार रहो. जिस देश में खाते हो, उसी देश में रहने का है. देश के लिए वफादार रहो, अपने घरवालों का ध्यान रखो. गलती घरवालों को भी भुगतनी पड़ती है.
दूसरी कहानी- पैसे और लग्जरी लाइफ के सपने ने 19 साल के युवक को खींचा
NDTV को गुजरात के ही वलसाड के रहने वाले दूसरे युवक की कहानी भी पता चली. महज 19 साल का यह युवक पिछले करीब तीन साल से एक कपड़े की दुकान पर काम करता है. परिवार में माता-पिता और बहन हैं और उसने आठवीं तक पढ़ाई की है. इसी साल अप्रैल में वह इंस्टाग्राम पर रील्स स्क्रॉल कर रहा था. तभी उसे ऐसी रील दिखाई दी जिसमें पैसे कमाने, महंगी गाड़ियों और लग्जरी लाइफ के सपने दिखाए जा रहे थे.
युवक के मुताबिक उसे लगा कि वह भी इस तरह पैसा कमा सकता है. उसने रील में दिए गए संपर्क के जरिए बात शुरू कर दी. युवक बताता है ,“मैं इंस्टाग्राम पर रील्स स्क्रॉल कर रहा था. तो उनका आया कि पैसे कमाने के लिए संपर्क करो. तो उनका देखा मैंने इंस्टाग्राम वगैरह पर. स्टाइलिश दिखा रहे थे, महंगी गाड़ी, महंगे घर वगैरह. तो मुझे लगा इनके जैसे कुछ अचीव कर सकते हैं.”

शहजाद भट्टी के नेटवर्क में फंसे दूसरे युवा ने भी हमारे रिपोर्टर से डिटेल में बात की है.
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वह आगे बताता है, “मतलब महंगी गाड़ी, दुबई जैसा घर दिख रहा था, स्विमिंग पूल वगैरह थे. फोन पर बात कर रहे थे, बड़ी-बड़ी गाड़ी में वीडियो बना रहे थे. तो मैंने उन्हें देखकर संपर्क किया. हाय करके डाला तो उनका रिप्लाई आया ,कहां से हो. फिर मैंने अपना पूरा लोकेशन वगैरह बताया. उन्होंने मेरा आईडी प्रूफ वगैरह भी लिया. बोला कि आपको कॉल बैक करेंगे.”
इसके बाद कुछ ही दिनों में उसे दोबारा कॉल आया. उसने बताया कि फिर 2-3 दिन में कॉल आया कि आप टेंशन मत लो, आपको कुछ काम दिया जाएगा. मेरी उनसे तीन बार बातचीत हुई. पहली बार तो मेरा पूरा ले लिया.क्या करते हो वगैरह. और दूसरी बार बोला कि आप टेंशन मत लो, आपको टास्क दिया जाएगा.
युवक के मुताबिक तीसरी बार उसे एक ग्रुप कॉल में जोड़ा गया. “तीसरी बार कोई ग्रुप कॉल वगैरह था. उसमें मुझे म्यूट कर दिया था. वो लोग अंदर बात कर रहे थे. ग्रुप में चार मेंबर थे. बस एक का नाम याद है, उसका नाम है आबिद जट्ट. मेरी शहजाद भट्टी से बात नहीं हुई.
युवक का दावा है कि वह केवल पैसे के लालच में इस संपर्क तक पहुंचा था. “उससे संपर्क किए बस एक ही हफ्ता हुआ था. लालच में जुड़ गया उसमें. थोड़ा बहुत टाइम था तो सोशल मीडिया देखता था. पैसे आ रहा था, लिखा था मेरे जैसे पैसा कमाना है तो मेरा ग्रुप ज्वाइन करो.”
लेकिन इससे पहले कि उसे कोई टास्क दिया जाता, गुजरात ATS ने उसे पकड़ लिया. “उसके बाद मुझे ATS लेकर आई थी. मतलब पहले लोकल SOG जो रहती है जिले की, उसने लिया था. फिर जैसा मैंने आपको बोला, वैसे उसे बोला. फिर उन्होंने इधर बुलाया था मुझे. फिर इधर भी ऐसा बोला ,आगे ऐसी गलती मत करना, ये गलत लोग हैं. उसके बाद बोला कि आपको कुछ भी ऐसा जानकारी आती है तो मुझे बताना. फिर छोड़ दिया और बोला कि इन सब चीजों से दूर रहो.”
युवक का कहना है कि उसे इस पूरे नेटवर्क की असलियत का कोई अंदाजा नहीं था. “मुझे मालूम नहीं था कि आबिद जट्ट कौन है. अगर मुझे मालूम होता तो मैं संपर्क नहीं करता. शहजाद भट्टी कौन है, पहले पता नहीं था. लेकिन अब मालूम चल गया वो आतंकी है.”
वह बताता है कि बातचीत इंस्टाग्राम पर लगातार नहीं हुई बल्कि रील में दिए गए नंबर के जरिए संपर्क हुआ. “उस घटना के बाद उन लोगों ने दोबारा कभी संपर्क नहीं किया. उनका कोई नोटिफिकेशन उसके बाद नहीं आया. उनका मोबाइल नंबर कोई फॉरेन नंबर था. उसकी आईडी पर नंबर था. मैंने उनसे नंबर पर ही बात की, इंस्टाग्राम पर बात नहीं की.”
ग्रुप कॉल में उसे म्यूट कर दिया गया था, इसलिए वह यह भी नहीं सुन सका कि बाकी लोग क्या बात कर रहे थे. “वो ग्रुप में क्या बात कर रहे थे, मुझे नहीं पता. मुझे म्यूट कर दिया था. यहां आने के बाद मैंने बताया कि मुझसे गलती हो गई है. तो उन्होंने बताया कि दोबारा ऐसा मत करना.”
अब यह युवक दूसरे युवाओं को सोशल मीडिया के जरिए मिलने वाले ऐसे ऑफर से दूर रहने की सलाह देता है. “मैं युवाओं को कहना चाहता हूं, आप कितना भी छिप लो, एक दिन तो पकड़ ही लेगी पुलिस. भारत सरकार एक दिन पकड़ ही लेगी. ऐसे काम नहीं करना चाहिए, ये गलत चीज है.”
दोनों मामलों में एक बात समान है. पहले सोशल मीडिया के जरिए संपर्क बना, फिर निजी बातचीत हुई और दूसरे मामले में तो युवक को साफ तौर पर बताया गया कि आगे उसे कोई टास्क दिया जाएगा. लेकिन टास्क मिलने से पहले ही गुजरात ATS की कार्रवाई हो गई.
यानी दोनों मामलों में सोशल मीडिया पर शुरू हुआ संपर्क ऑफलाइन आतंकी गतिविधि तक पहुंचने से पहले ही एजेंसियों की निगरानी में आ गया. सोशल मीडिया के जरिए युवाओं तक पहुंच बनाने का आरोप झेल रहा पाकिस्तानी आतंकी शहजाद भट्टी अब भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की जांच के केंद्र में है.
एजेंसियों के मुताबिक उसके नेटवर्क में पहले सोशल मीडिया के जरिए संपर्क, फिर लालच, उसके बाद हैंडलर से कनेक्शन और अंत में टास्क देने की कोशिश का पैटर्न सामने आया है.

कौन है शहजाद भट्टी?
भारतीय जांच एजेंसियों के मुताबिक शहजाद भट्टी पाकिस्तान के पंजाब प्रांत का रहने वाला है और करीब 45 साल का है. उसके खिलाफ पाकिस्तान में आपराधिक मामलों का रिकॉर्ड होने की बात जांच एजेंसियों की ओर से कही गई है. जांच इनपुट के मुताबिक 2013 के आसपास उसके खिलाफ चोरी और डकैती के मामले दर्ज हुए थे. बाद में उस पर गंभीर आपराधिक आरोप भी लगे. करीब 2015 के आसपास उसके पाकिस्तान छोड़कर दुबई जाने की बात सामने आई. वहां उसने स्क्रैप और डेयरी के कारोबार से जुड़ने के साथ कथित तौर पर फारुख खोकर गैंग से संपर्क बनाया.
दुबई में रहते हुए उसने 333 नाम से सोशल मीडिया पर वीडियो बनाना शुरू किया. भारत-पाकिस्तान संबंध, धार्मिक मुद्दों और सोशल मीडिया पर चलने वाले विवादों से जुड़े वीडियो के जरिए उसने बड़ी संख्या में फॉलोअर्स बनाए. भारतीय एजेंसियों का आरोप है कि सोशल मीडिया पर बनाई गई यह पहचान बाद में युवाओं तक पहुंच बनाने के लिए इस्तेमाल की गई.
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक भट्टी ने कथित तौर पर पाकिस्तान के इस्लामाबाद में ऐसा नेटवर्क तैयार किया, जहां से सोशल मीडिया के जरिए भारतीय युवाओं से संपर्क किया जाता था. जांच एजेंसियों का दावा है कि अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर युवाओं की प्रोफाइल तलाशने के बाद उनसे निजी चैट शुरू की जाती थी. संपर्क बढ़ने के बाद उन्हें नेटवर्क के दूसरे हैंडलर्स से जोड़ा जाता था.
एजेंसियों के मुताबिक इस पूरे मॉडल में पैसे, हथियार, विदेश जाने और बेहतर जिंदगी के सपने जैसे लालच का इस्तेमाल किया जाता था. यानी कथित मॉडल था.सोशल मीडिया पर संपर्क, भरोसा कायम करना, लालच देना, हैंडलर से जोड़ना, टास्क देना और फिर आतंकी गतिविधि में इस्तेमाल करना.
जांच एजेंसियों के मुताबिक इस नेटवर्क में पाकिस्तान से भारत तक फंडिंग और हथियार पहुंचाने की कड़ियों की भी जांच की जा रही है. जांच में रहमान चाचा, यावर खान, मुन्ना झिंगाड़ा, आबिद जट्ट, उजहैर, राणा ह़ुनैन, सोहेल बलोच और अजमल गुज्जर जैसे नाम सामने आने की बात कही गई है. एजेंसियां यह भी जांच कर रही हैं कि इनमें से कुछ नाम वास्तविक पहचान हैं या कोड नेम.
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक शहजाद भट्टी से जुड़े नेटवर्क की जांच कई राज्यों तक पहुंच चुकी है. उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, कर्नाटक, गुजरात, बिहार, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और केरल में कार्रवाई की बात सामने आई है.
12 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के आसपास संभावित गतिविधियों को रोकने के लिए एक मेगा ऑपरेशन में 14 राज्यों से 253 संदिग्धों की गिरफ्तारी का दावा किया गया. इनमें उत्तर प्रदेश में 62, हरियाणा में 52, दिल्ली में 51, पंजाब में 44, राजस्थान में 15, महाराष्ट्र में 8, उत्तराखंड में 5, कर्नाटक, गुजरात और बिहार में 3-3 तथा तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और केरल में 2-2 लोगों को गिरफ्तार किया गया
एजेंसियों के मुताबिक इस नेटवर्क से जुड़े मामलों में 80 से ज्यादा FIR दर्ज हो चुकी हैं. इन मामलों में UAPA, BNS, Arms Act, NDPS Act और Explosives Act जैसी धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है. जांच के दौरान IED, पाकिस्तान ऑर्डिनेंस फैक्ट्री की मार्किंग वाले ग्रेनेड, पिस्टल, जिंदा कारतूस और कथित जासूसी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले CCTV कैमरों की बरामदगी भी हुई है
शहजाद भट्टी के नेटवर्क को लेकर जांच का एक बड़ा हिस्सा पंजाब में हुई टारगेट किलिंग से जुड़ा है. एजेंसियां पंजाब में चार पुलिसकर्मियों की हत्या और पुलिस प्रतिष्ठानों पर हुए ग्रेनेड हमलों के पीछे भी शहजाद भट्टी ग्रुप है. जांच एजेंसियों के मुताबिक कुछ युवाओं को पुलिसकर्मियों की रेकी करने, हमला करने और उसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डालने के बदले पैसे का लालच दिए जाने की जानकारी सामने आई है.
उत्तर प्रदेश में एक पुलिसकर्मी की कथित रेकी की भी जांच हुई. जांच के मुताबिक हमला करने की कोशिश की गई, लेकिन हथियार में तकनीकी खराबी के कारण वारदात नहीं हो सकी. जांच में शहजाद भट्टी के नेटवर्क को 'तेहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान' यानी TTH से जोड़कर भी देखा गया है. दिल्ली पुलिस की जांच में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान दिल्ली और फरीदाबाद में दीवारों पर TTH लिखने और अंग्रेजी का S लिखने के निर्देश दिए जाने की बात सामने आने का दावा किया गया है.
इनमें पंजाब में पुलिसकर्मियों की हत्या, पुलिस प्रतिष्ठानों पर ग्रेनेड हमले, बठिंडा में बीजेपी नेता के क्लीनिक पर पेट्रोल बम हमला, रांची में RSS कार्यालय पर हमला, जालंधर में BSF कैंप के बाहर धमाका और अमृतसर में सेना की छावनी की दीवार के पास धमाके जैसे मामले शामिल बताए गए हैं.
जांच में मार्च 2025 में जालंधर में सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर रोजर संधू के घर ग्रेनेड हमले, नवंबर 2025 में हरियाणा के सिरसा में महिला पुलिस स्टेशन के बाहर ब्लास्ट और जनवरी 2026 में अंबाला के बलदेव नगर पुलिस स्टेशन के बाहर धमाके को भी नेटवर्क से जोड़कर देखा गया है.
इसके अलावा संवेदनशील जगहों की कथित रेकी, लखनऊ में आर्मी कैंट और बमरौली एयरपोर्ट जैसे ठिकानों की जानकारी जुटाने, नेताओं को कथित तौर पर हनी ट्रैप में फंसाने और जंतर-मंतर से जुड़े हमले की साजिश जैसे अलग-अलग मामलों की भी जांच हुई है.
जांच एजेंसियों के मुताबिक दिल्ली में न्यू पुलिस लाइन, आनंद विहार बस अड्डे और रेलवे स्टेशन तथा मुंबई में दादर मार्केट, सिद्धिविनायक मंदिर, BARC, तारापुर परमाणु ऊर्जा केंद्र और जेजे ब्रिज जैसे संवेदनशील स्थानों को लेकर भी कथित साजिशों की जांच की गई है.
GPS लोकेशन और वीडियो पाकिस्तान भेजने का आरोप
मई 2026 में उत्तर प्रदेश ATS की कार्रवाई के दौरान गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में दिल्ली और पंजाब के भीड़भाड़ वाले अस्पतालों तथा एक प्रमुख राजनीतिक दल के कार्यालय की GPS लोकेशन और वीडियो पाकिस्तान भेजे जाने की जानकारी सामने आने का दावा किया गया.
जांच एजेंसियों को शक है कि इन जगहों की जानकारी संभावित हमले की तैयारी के लिए जुटाई गई थी. इसके अलावा पंजाब में स्कूल चलाने वाले एक प्रमुख व्यक्ति की हत्या की कथित साजिश, दिल्ली के एक ऐतिहासिक मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी जुटाने और दिल्ली-सोनीपत हाईवे पर एक ढाबे को ग्रेनेड हमले का निशाना बनाने की कथित योजना की भी जांच की गई.
हरियाणा के हिसार में एक सैन्य प्रतिष्ठान की कथित रेकी कर उसका वीडियो भट्टी तक भेजे जाने की बात भी जांच में सामने आई है. जांच एजेंसियों के मुताबिक इस नेटवर्क से जुड़ी महिलाओं की भूमिका की भी जांच हुई है. पश्चिम बंगाल से अर्पिता नाम की महिला और गाजियाबाद से दो महिलाओं की गिरफ्तारी की हुई थी. इससे जांच एजेंसियों को यह संकेत मिला कि नेटवर्क में सिर्फ पुरुष ही नहीं, बल्कि अलग-अलग भूमिकाओं में महिलाओं को भी कथित तौर पर शामिल किया जा रहा है.
एजेंसियों के मुताबिक 253 गिरफ्तारियों के अलावा बड़ी संख्या में युवाओं की काउंसलिंग और डी-रेडिकलाइजेशन की प्रक्रिया भी की गई है. शहजाद भट्टी नेटवर्क की जांच में सबसे बड़ी चिंता सोशल मीडिया के जरिए युवाओं की कथित भर्ती को लेकर है.
शहजाद भट्टी नेटवर्क की जांच का सबसे अहम पहलू यही है कि आतंक का रास्ता अब सिर्फ बंद कमरों में होने वाली बैठकों से नहीं, बल्कि सोशल मीडिया की स्क्रीन से भी शुरू हो सकता है. एक रील, एक मैसेज, आसान पैसे का लालच, लग्जरी लाइफ का सपना और फिर किसी अनजान शख्स से बातचीतयही वह शुरुआती कड़ी है जिसे सुरक्षा एजेंसियां अब गंभीरता से देख रही हैं.
गुजरात के दोनों युवाओं को कथित तौर पर किसी टास्क को अंजाम देने से पहले ही रोक लिया गया. दोनों अब दूसरे युवाओं को भी सोशल मीडिया पर ऐसे ऑफर और संदिग्ध संपर्क से दूर रहने की सलाह दे रहे हैं.
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