- इजराइल चुनाव में विपक्ष और नेतन्याहू दोनों बहुमत से दूर
- 19 साल से सत्ता के केंद्र में रहे नेतन्याहू को बड़ा झटका
- 77.7% मतदान ने बनाया रिकॉर्ड, किंगमेकर बन सकते हैं अरब दल
इजराइल के आम चुनाव में मतदाताओं ने रिकॉर्ड संख्या में मतदान कर एक नया संदेश दिया है, लेकिन एग्जिट पोल के नतीजों ने सरकार गठन को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है. प्रारंभिक अनुमानों के मुताबिक न तो प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का गठबंधन और न ही विपक्षी खेमे को संसद में स्पष्ट बहुमत मिलता दिख रहा है. खास बात यह है कि नेतन्याहू की लिकुड पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद सत्ता का आसान रास्ता नहीं देख पा रही, जबकि छात्र और बदलाव की राजनीति को समर्थन देने वाले दलों ने गजब का प्रदर्शन किया है.
एग्जिट पोल में किसी को नहीं मिला बहुमत
चैनल 11, 12 और 13 के एग्जिट पोल के अनुसार इजराइल की 120 सदस्यीय नेसेट (संसद) में सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटों का आंकड़ा किसी भी गुट को नहीं मिलता दिख रहा है. अनुमानों के मुताबिक विपक्षी गठबंधन, जिसमें याशार, बी'याचाद, यिसराइल बेइतेनु और डेमोक्रेट्स शामिल हैं, को 50 से 53 सीटें मिलने का अनुमान है. वहीं प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गठबंधन को लगभग 50 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है.
नेतन्याहू और आइजनकोट के बीच है मुकाबला
चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने समर्थकों से बड़ी संख्या में मतदान करने की अपील की थी. उन्होंने चेतावनी दी थी कि विपक्ष और अरब दलों की बढ़ती वोटिंग से 'वामपंथी सरकार' सत्ता में आ सकती है. दूसरी ओर उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी और याशार पार्टी के नेता गादी आइजनकोट ने नेतन्याहू पर मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए 'डर और गलत सूचनाओं' का सहारा लेने का आरोप लगाया.
लिकुड सबसे बड़ी पार्टी, फिर भी राह आसान नहीं
एग्जिट पोल के मुताबिक नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को 24 से 25 सीटें मिल सकती हैं, जिससे वह नई संसद की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर सकती है. हालांकि अकेले सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद लिकुड के लिए सत्ता तक पहुंचना आसान नहीं दिख रहा. गठबंधन के सहयोगी दल अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं और कई छोटे दक्षिणपंथी दल संसद में प्रवेश के लिए जरूरी 3.25 प्रतिशत वोट सीमा पार करते नहीं दिख रहे.
किंगमेकर बन सकती हैं ये पार्टी
चुनाव परिणामों में ज्वाइंट लिस्ट और रा'अम जैसे अरब दलों को 17 से 18 सीटें मिलने का अनुमान है. संख्याबल के लिहाज से ये दल सरकार गठन की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभा सकते हैं. हालांकि विपक्ष के अधिकांश नेताओं ने अरब दलों के साथ गठबंधन की संभावना को फिलहाल खारिज किया है. डेमोक्रेट्स के नेता यायर गोलान को इसका अपवाद माना जा रहा है.
रिकॉर्ड वोटिंग ने बनाया इतिहास
इस चुनाव की सबसे बड़ी कहानी रिकॉर्ड मतदान रही. केंद्रीय चुनाव समिति के अनुसार रात 10 बजे मतदान समाप्त होने तक 77.7 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई. यह 2022 के चुनाव में इसी समय दर्ज 70.6 प्रतिशत मतदान से काफी अधिक है और 1999 के बाद सबसे ज्यादा मतदान माना जा रहा है. दिनभर मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें देखी गईं. दोपहर 12 बजे तक मतदान 31.5 प्रतिशत, शाम 4 बजे तक 55.7 प्रतिशत और शाम 6 बजे तक 66.7 प्रतिशत पहुंच गया था. रात 8 बजे तक यह आंकड़ा 74.3 प्रतिशत हो गया था.
7 अक्टूबर हमले के बाद पहला चुनाव
यह चुनाव 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमास हमले के बाद पहला आम चुनाव था. इसलिए सुरक्षा, नेतृत्व की जवाबदेही और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता जैसे मुद्दे चुनाव प्रचार के केंद्र में रहे. करीब 19 वर्षों से इजराइली राजनीति के केंद्र में रहे नेतन्याहू के सामने इस बार कड़ी चुनौती देखने को मिली. अब एग्जिट पोल के संकेतों ने यह साफ कर दिया है कि इजराइल में अगली सरकार के गठन के लिए लंबी और जटिल गठबंधन वार्ताएं हो सकती हैं.
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