- पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से राजद के डॉ. संजीव कुमार ने भाजपा के नवल किशोर यादव को बड़ी मतों से हराया है.
- डॉ. संजीव कुमार पहले जदयू में थे और खगड़िया के परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं.
- बिहार विधान परिषद में दो सगे भाई डॉ. संजीव और राजीव कुमार अलग-अलग दलों से सदस्य होंगे, लेकिन एक ही गठबंधन में.
पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के RJD उम्मीदवार डॉ. संजीव कुमार चुनाव जीत गए हैं. उन्होंने यहां भाजपा के कद्दावर नेता नवल किशोर यादव का किला ढहा दिया है. संजीव कुमार कुल 4487 वोट मिले. जबकि नवल किशोर यादव 3430 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर हैं. मालूम हो कि एमएलसी चुनाव लड़ने से पहले डॉ. संजीव कुमार खगड़िया के परबत्ता विधानसभा से विधायक भी रह चुके हैं. वो पहले जदयू में थे. लेकिन विधानसभा चुनाव समय जदयू को छोड़कर राजद का दामन थाम लिया था. विधानसभा चुनाव में डॉ. संजीव राजद के टिकट पर हार गए थे. लेकिन अब उसकी कसर उन्होंने पटना में निकाल दी है. डॉ. संजीव की जीत के साथ ही बिहार विधान परिषद में एक अनूठा मामला तय हो गया है. बिहार विधान परिषद में अब दो सगे भाई नजर आएंगे. हालांकि दोनों अलग-अलग दलों का प्रतिनिधित्व करेंगे.
डॉ. संजीव बोले- सरकार हताश, मैं अपने वादें पूरा करूंगा
पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से राष्ट्रीय जनता दल के डॉक्टर संजीव कुमार चुनाव जीत गए हैं. अपनी जीत पर उन्होंने कहा, "सरकार हताश थी और आज मतगणना हॉल में काफी हंगामा भी किया गया...लेकिन हम भी हर तरीके से लड़ने के लिए तैयार थे...मैंने शिक्षकों से जो भी वादे किए हैं, मैं उन्हें पूरा करूंगा और उनके हित में हर काम करूंगा..."
#WATCH | पटना, बिहार: RJD उम्मीदवार डॉ. संजीव कुमार सिंह ने MLC चुनाव में पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से अपनी जीत पर कहा, "सरकार हताश थी और आज मतगणना हॉल में काफी हंगामा भी किया गया...लेकिन हम भी हर तरीके से लड़ने के लिए तैयार थे...मैंने शिक्षकों से जो भी वादे किए हैं, मैं उन्हें पूरा करूंगा और उनके हित में हर काम करूंगा..."
— ANI_HindiNews (@AHindinews) October 27, 2026
डॉ. संजीव के भाई राजीव भी MLC
डॉ. संजीव के भाई राजीव कुमार बेगूसराय स्थानीय प्राधिकार से विधान पार्षद हैं. वे कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते थे. अब कांग्रेस के इकलौते MLC हैं. दो सगे भाइयों के सदन में होने का यह अनूठा मामला होगा. डॉ. संजीव की जीत के बाद अब सदन में दोनों सगे भाई एक साथ नज आएंगे. हालांकि दोनों अलग-अलग दलों से होंगे, लेकिन गठबंधन एक ही है.
डॉ. संजीव पर लगा था जदयू विधायकों को तोड़ने का आरोप
अक्सर मुखर रहने वाले डॉ संजीव के रिश्ते 2024 में जदयू से बिगड़ने लगे. अविश्वास प्रस्ताव के दौरान जदयू के नेता काफी देर तक उनसे संपर्क नहीं कर पा रहे थे. उन पर आरोप लगे थे कि वे राजद के पक्ष में वोट डालने के लिए जदयू विधायकों को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं. बाद में बिहार पुलिस ने उन्हें विधानसभा लेकर आई. उनसे आर्थिक अपराध इकाई ने पूछताछ भी की थी.
राजद से विस चुनाव लड़े, लेकिन हार गए
बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने राजद का दामन थाम लिया था. लेकिन परबत्ता सीट से उन्हें हार का सामना करना पड़ा. यहां लोजपा के बाबूलाल शौर्य ने उन्हें शिकस्त दी थी. डॉ संजीव, खगड़िया सांसद राजेश वर्मा से जुबानी जंग के कारण भी खबरों में रहे हैं.
पिता आरएन सिंह भी बिहार सरकार में मंत्री थे
बताते चले कि डॉ. संजीव के पिता आरएन सिंह परबत्ता से विधायक रहे, बिहार सरकार में मंत्री भी थे. आरएन सिंह नीतीश कुमार के बेहद करीबी थे. आरएन सिंह के निधन के बाद उनके बेटे संजीव और राजीव उनकी राजनैतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं.
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