महाराष्ट्र कांग्रेस में अनुशासन को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है. विधान परिषद चुनाव से ठीक पहले नामांकन वापस लेने वाले दो उम्मीदवारों पर पार्टी ने सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया. पार्टी नेतृत्व ने इस कदम को गंभीर अनुशासनहीनता माना है और साफ संदेश दिया है कि फैसले बिना संगठन को भरोसे में लिए नहीं लिए जा सकते.
नामांकन वापसी पर सख्त कार्रवाई
महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव के दौरान यवतमाल से कांग्रेस उम्मीदवार साहेबराव कांबले और चंद्रपुर से उम्मीदवार शैलेश अग्रवाल ने ऐन वक्त पर अपना नामांकन वापस ले लिया. इस फैसले के सामने आने के बाद पार्टी ने तुरंत सख्ती दिखाई और दोनों नेताओं को निष्कासित कर दिया.
पार्टी को अंधेरे में रखने का आरोप
कांग्रेस का कहना है कि दोनों उम्मीदवारों ने नामांकन वापस लेने से पहले पार्टी नेतृत्व से कोई चर्चा नहीं की और न ही यह फैसला लेने से पहले संगठन को विश्वास में लिया. इसी वजह से पार्टी ने इसे अनुशासनहीनता का गंभीर मामला माना और कड़ा एक्शन लिया.

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प्रदेशाध्यक्ष ने लिया बड़ा फैसला
इस पूरे मामले में महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की. उन्होंने दोनों नेताओं को पार्टी से निष्कासित करते हुए उनकी प्राथमिक सदस्यता भी रद्द कर दी. यह कदम पार्टी के भीतर अनुशासन बनाए रखने के लिए अहम माना जा रहा है.
पार्टी ने दिया सख्त संदेश
इस कार्रवाई के जरिए कांग्रेस नेतृत्व ने यह साफ कर दिया है कि संगठन के खिलाफ जाकर लिए गए फैसले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे. चुनाव जैसे महत्वपूर्ण समय में इस तरह का कदम उठाना पार्टी के लिए नुकसानदायक माना जा रहा है, इसलिए भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्ती जरूरी समझी गई. घटना के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है. माना जा रहा है कि इस कार्रवाई का असर आने वाले चुनावी समीकरणों पर भी पड़ सकता है.
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