Success Story DSP Kritika Yadav: पढ़ाना भले ही बरसों पहले छूट गया हो, लेकिन एक सच्चे शिक्षक का सिखाया सबक और उनका आशीर्वाद कभी बेअसर नहीं होता. विप्रो की नौकरी छोड़कर सिविल सर्विसेज की तैयारी करने वाली कृतिका यादव आज राजस्थान में पुलिस उप अधीक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं. करीब एक दशक बाद जब उन्होंने अपने मार्गदर्शक गुरु को फोन कर पुरानी यादें ताजा कीं, तो साबित हो गया कि एक शिक्षक के लिए दुनिया की सबसे बड़ी दौलत उसके छात्र की सफलता और उसका सम्मान ही होता है. ऐसा ही कुछ जितेंद्र शर्मा के साथ हुआ.
भोपाल RTO जितेंद्र शर्मा ने साझा की कहानी
जितेंद्र शर्मा वर्तमान में मध्य प्रदेश के भोपाल में क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (RTO) के पद पर सेवाएं दे रहे हैं. इससे पहले वे जबलपुर में वेटरनरी ऑफिसर हुआ करते थे. कृतिका यादव की सफलता की कहानी का एक सिरा भी जबलपुर से ही जुड़ा है. मध्य प्रदेश के भिंड-मुरैना के पास जोरा तहसील के गांव बघेल के रहने वाले शर्मा ने सोशल मीडिया पर कृतिका की यह दिलचस्प कहानी शेयर की है.
11 साल बाद आया DSP कृतिका का फोन
जितेंद्र शर्मा ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "कल 5 अगस्त को अचानक राजस्थान पुलिस में DySP कृतिका यादव का फोन आया कि 'सर पहचाना क्या? सर, मैं कृतिका यादव, आपके पास 2015 में जबलपुर में पढ़ती थी. मैं काफी दिनों से आपका नंबर ढूंढ रही थी. मेरा सिलेक्शन 2018 में राजस्थान राज्य प्रशासनिक सेवा में हो गया था. मैं अभी डीएसपी हूं.' मुझे पुरानी बातें याद करने में थोड़ा समय लगा."

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विप्रो की जॉब छोड़कर शुरू की थी तैयारी
एनडीटीवी से बातचीत में जितेंद्र शर्मा ने बताया कि कृतिका यादव जबलपुर की रहने वाली हैं और उनकी शादी राजस्थान में हुई है. कृतिका एक इंजीनियर हैं. RTO बनने से पहले जबलपुर में वेटरनरी ऑफिसर के रूप में सेवाएं देने के दौरान जितेंद्र शर्मा युवाओं को प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने के लिए प्रेरित किया करते थे. वे उनको तैयारी की रणनीति बनाने और किताबों के बारे में गाइड करते थे.
साल 2014 में कृतिका यादव उनके पास आई थीं. उन्होंने जितेंद्र शर्मा को बताया था कि वे विप्रो में इंजीनियर हैं और जॉब छोड़कर सिविल सेवा की तैयारी करना चाहती हैं, जिसके लिए उन्हें मार्गदर्शन चाहिए. उसके बाद कृतिका का 2015 में सबसे पहले दिल्ली मेट्रो में सिलेक्शन हुआ. फिर साल 2018 में उनका चयन राजस्थान प्रशासनिक सेवा में हो गया और वे डीएसपी बनीं.
शिक्षक के लिए इससे बड़ी कोई खुशी नहीं
इधर, जितेंद्र शर्मा का जबलपुर से तबादला हो गया और उन्होंने युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाना भी छोड़ दिया, मगर करीब 11 साल बाद कृतिका यादव के फोन और उनकी सफलता की कहानी ने अहसास करा दिया कि बतौर टीचर इससे बड़ी कोई खुशी नहीं हो सकती.
जितेंद्र शर्मा ने बताया कि उन्होंने खुद भी संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और स्टेट सर्विसेज में कुल 9 बार भाग्य आजमाया. UPSC में वे 2009 और 2010 में इंटरव्यू तक पहुंचे. वहीं, स्टेट सर्विस में 2006, 2010, 2012, 2013 और 2014 में इंटरव्यू तथा साल 2009 में मुख्य परीक्षा तक सफल रहे. साल 2016 में 24वीं रैंक के साथ वे RTO बने. इससे पहले उन्होंने जबलपुर में वेटरनरी ऑफिसर व असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में भी सेवाएं दीं. बतौर RTO भोपाल के अलावा वे दतिया, जबलपुर व नरसिंहपुर में भी पदस्थ रहे हैं.
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