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अन्नामलाई ने बीजेपी से इस्तीफा देकर आंदोलन तो छेड़ दिया, क्या सफल भी होंगे

तमिलनाडु बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष के अन्नामलाई ने पार्टी की प्राथमिकता से इस्तीफा देकर नया राजनीतिक आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है. उनकी ताकत और कमजोरियों के बारे में बता रहे हैं जे सैम डेनियल स्टालिन.

अन्नामलाई ने बीजेपी से इस्तीफा देकर आंदोलन तो छेड़ दिया, क्या सफल भी होंगे
नई दिल्ली:

तमिलनाडु बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष के अन्नामलाई ने बीजपी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. इसकी अटकलें पिछले काफी समय से लगाई जा रही थीं. इसकी खबर एनडीटीवी ने सबसे पहले दी थी. भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के पूर्व अधिकारी अन्नामलाई ने 'वी द लीडर्स' नाम के अपने संगठन का विस्तार कर एक नए राजनीतिक आंदोलन की शुरुआत की घोषणा की है. इसके जरिए उन्होंने आगामी चुनावों से पहले एक राजनीतिक दल की नींव रख दी है.इस आंदोलन की संरचना और चुनावी रूपरेखा अब स्पष्ट है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या अन्नामलाई का यह राजनीतिक संगठन चुनौतियों का सामना कर पाएगा.

अन्नामलाई की सबसे बड़ी ताकत क्या है 

तमिलनाडु में बहुत कम राजनेताओं ने अन्नामलाई जितनी तेजी से सफलता पाई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रेरित होकर, अन्नामलाई ने आईपीएस की नौकरी से इस्तीफा देकर 2020 में बीजेपी में शामिल हुए थे. इसके एक साल के भीतर ही उन्हें पार्टी की तमिलनाडु इकाई का अध्यक्ष बना दिया गया था. 

अपनी भाषण शैली, प्रचार शैली और सोशल मीडिया पर जबरदस्त मौजूदगी के बल पर उन्होंने तमिलनाडु में बीजेपी  की छवि बदलने में सफलता पाई. हालांकि पार्टी चुनावी नजरिए से कमजोर ही रही, लेकिन अन्नामलाई ने यह सुनिश्चित किया कि द्रविड़ दलों के प्रभाव वाले तमिलनाडु में बीजेपी मुख्यधारा की राजनीतिक चर्चाओं का हिस्सा बने. यहां तक ​​कि आलोचक भी मानते हैं कि अन्नामलाई का व्यक्तिगत समर्थन तमिलनाडु में बीजेपी  के समर्थन से कहीं अधिक है.

बीजेपी के टैग से मुक्ति का लाभ

विडंबना यह है कि अन्नामलाई का सबसे बड़ा राजनीतिक लाभ, उनके बीजेपी से अलग होने पर ही मिला है. सालों से कई विश्लेषक यह तर्क देते रहे हैं कि उनका बीजेपी से जुड़ाव तमिलनाडु में उनकी लोकप्रियता को कम करता रहा है, क्योंकि तमिलनाडु के मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा अभी भी बीजेपी को पसंद नहीं करता है. ऐसे एक राजनीति आंदोलन शुरू कर अन्नामलाई अब उन मतदाताओं को आकर्षित कर सकते हैं, जो निजी तौर पर उनकी तारीफ तो करते थे, लेकिन वो बीजेपी  का समर्थन करने को तैयार नहीं थे.

तमिलनाडु में बदलाव का दौर  

अन्नामलाई के इस कदम का समय भी उनके पक्ष में जा सकता है. इस समय तमिलनाडु की राजनीति अभूतपूर्व बदलाव के दौर से गुजर रही है. मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व में टीवीके के उदय ने मतदाताओं की वैकल्पिक दलों को अपनाने की इच्छा को प्रकट किया है. कई दशक बाद यह पहली बार है कि तमिलनाडु में डीएमके और एआईएडीएमके सत्ता से बाहर हैं.तमिलनाडु के इस उथल-पुथल ने नए खिलाड़ियों और नए विचारों के लिए राजनीतिक स्थान बनाया है.

अन्नामलाई अपने सहयोगियों पर हावी होने की बजाय उन्हें सत्ता में हिस्सेदारी देकर भी फायदा उठा सकते हैं. वो राजनीति दलों के पारंपरिक संरचना के विपरीत नए नेताओं को तैयार कर उन्हें अवसर देने पर केंद्रित एक मॉडल पेश करते हुए नजर आ रहे हैं. राजनीतिक विश्लेषकों को लगता है कि इससे द्रविड़ पार्टियों के महत्वाकांक्षी द्वितीय श्रेणी के नेता आकर्षित हो सकते हैं, जिनको अपनी पार्टी में आगे बढ़ने की संभावनाएं सीमित दिखती हैं. उनका यह प्रयोग अगर सफल होता है, तो इससे उन्हें छोटी पार्टियों और उभरते नेताओं को एकजुट कर एक गठबंधन बनाने में मदद मिल सकती है.

जमीनी स्तर का संगठन

कई राजनीतिक दलों के उलट, जो केवल व्यक्ति केंद्रित होते हैं, अन्नामलाई विजय की तरह ही अपने प्रशंसक क्लबों को संगठित कर एक राजनीतिक दल की घोषणा करने से पहले उसके संगठन का ढांचा तैयार करने का प्रयास कर रहे हैं. उनके संगठन की वेबसाइट के जरिए लोग रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं,ट्रेनिंग ले सकते हैं और भविष्य के स्थानीय नेताओं के रूप में उभर सकते हैं. उनके इस आंदोलन की योजना योग्य उम्मीदवारों की पहचान कर उन्हें प्रशिक्षित कर स्थानीय निकाय चुनाव में उतारने की है. यदि यह मॉडल सफल होता है, तो इससे उन्हें व्यक्ति केंद्रित संगठन के बजाय कैडर आधारित संगठन बनाने में मदद मिल सकती है.

अन्नामलाई की चुनौतियां क्या हैं

चुनावी सफलता का अभाव: अपनी लोकप्रियता के बाद भी अन्नामलाई की सबसे बड़ी कमजोरी उनका चुनावी रिकॉर्ड ही है. उनके नेतृत्व में बीजेपी  2024 के लोकसभा चुनाव में जीत हासिल कर पाने में विफल रही, उनके प्रदेश अध्यक्ष न रहते हुए भी बीजेपी ने 2026 के विधानसभा चुनाव में भी कोई उल्लेखनीय सफलता नहीं दर्ज कर पाई. एक तरह जहां उनके समर्थक यह तर्क देते हैं कि उन्होंने पार्टी के वोट शेयर और मौजूदगी को बढ़ाया है, वहीं उनके आलोचकों का कहना है कि चुनावी जीत ही राजनीतिक सफलता का अंतिम पैमाना है.

बीजेपी  का साया: बीजेपी से सौहार्दपूर्ण विदाई के बाद भी अन्नामलाई को उससे अपने जुड़ाव से छुटकारा पाने के लिए संघर्ष करना पड़ सकता है. कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने पहले ही उनके इस पहल को'बीजेपी-आरएसएस का प्लान बी' बताया है. उन्होंने आरोप लगाया है कि इसे बीजेपी का नाम लिए बिना ही मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आशीर्वाद हासिल है. अन्नामलाई के विरोधी उन्हें बीजेपी का अनौपचारिक सहयोगी बता सकते हैं. इसकी वजह से बीजेपी विरोधी वोटों को अपनी ओर आकर्षित करने की उनकी ताकत कमजोर पड़ सकती है.

विचारधारा का अभाव: अन्नामलाई के अभियान का सबसे उल्लेखनीय पहलू वह है, जिसकी उन्होंने घोषणा नहीं की है. उन्होंने नैतिकता, नेतृत्व और राजनीति में प्रयोग पर तो विस्तार से बताया, लेकिन उन्होंने कोई स्पष्ट वैचारिक ढांचा नहीं दिया. उनका कहना था कि कोई भी विचारधारा स्थायी नहीं होती, यह कुछ मतदाताओं को शायद पसंद आए, लेकिन एक स्थायी राजनीतिक आंदोलन को अंततः एक स्पष्ट पहचान और नीतिगत एजेंडा की जरूरत होगी.

शून्य से शुरुआत: इतिहास गवाह है कि तमिलनाडु में एक सफल राजनीतिक दल खड़ा करना बेहद मुश्किल काम है. यहां तक ​​कि प्रभावशाली जनमानस और लोकप्रिय नेताओं को भी लोकप्रियता को संगठनात्मक शक्ति में बदलने में काफी संघर्ष करना पड़ा है. अन्नामलाई के सामने अब जिला इकाइयों का गठन करने, स्थानीय नेताओं को तैयार करने, पार्टी के लिए धन जुटाने और कई सालों तक संगठन को राजनीतिक रूप से सक्रिय बनाए रखने का कठिन टास्क है. 

अन्नामलाई अपनी यह पारी अपनी कई खूबियों के साथ शुरू कर रहे हैं, इसमें शामिल है उनकी लोकप्रियता, बेदाग छवि, संगठनात्मक क्षमता, बीजेपी से मुक्ति और एक व्यापक गठबंधन बनाने की क्षमता. इसके बाद भी उनके सामने कई चुनौतियां भी हैं, इनमें शामिल है- चुनावी सफलता का अभाव, बीजेपी से पुराना रिश्ता, विचारधारा की कमी और पूरे प्रदेश में संगठन को शून्य से खड़ा करने की चुनौती.

क्या वे तमिलनाडु की अगली बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरेंगे या लोकप्रियता को सत्ता में बदलने के लिए संघर्ष करने वाले नेताओं की सूची में शामिल होंगे. इसका जवाब एक सवाल पर निर्भर है, क्या अन्नामलाई इस आंदोलन को एक ऐसे आंदोलन में बदल सकते हैं जो उनके बाद भी चलता रहे. 

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