दिशा सालियान मामले पर शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे का बयान सामने आया है. उन्होंने कहा है कि इस मामले से हमारा कोई लेना-देना नहीं है. कल को इस मामले में आप सभी के नाम भी आ सकते हैं. यह घटना होना ही बहुत बुरा है, लेकिन इसमें हमारा नाम क्यों लिया जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरी तरह से राजनीति से प्ररित है. उद्धव से पहले आदित्य ठाकरे ने भी कहा था कि वो दिशा सालियान से कभी नहीं मिले और न ही उनसे मेरी कोई पहचान थी.
'राजनीति से प्रेरित है मामला'
उद्धव ठाकरे ने कहा कि इस मामले से हमारा कोई लेना-देना नहीं है, कल इसमें आपका भी नाम आ सकता है. यह पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है, मुझे इस पर ज्यादा नहीं बोलना है. इन्होंने ही SIT बनाई है, जो जांच करनी है करो, लेकिन चरित्र हनन मत करो, अन्यथा हमें कानूनी कदम उठाने पड़ेंगे. हमारी (दिशा से) कोई मुलाकात नहीं हुई थी, हमारा इससे कोई संबंध नहीं है.
उन्होंने कहा जो घटना हुई वह बेहद दुखद थी. लेकिन हमारा उससे कोई लेना-देना नहीं है. फिर हमारे नाम क्यों लिए जा रहे हैं? यह मुद्दा बार-बार उठता रहता है. पिछले छह सालों से इस मामले पर मीडिया ट्रायल चल रहा है. प्रतिक्रियाएं आती हैं, फिर पीड़ित के पिता बयान देते हैं.
संजय राउत का भी बयान आया सामने?
इस मामले में संजय राउत ने कहा कि यह ठाकरे परिवार की छवि खराब करने के लिए दिल्ली की एक राजनीतिक साजिश है, क्योंकि यह परिवार लोगों के दिलों में बसता है. जिस तरह से यह मामला कोर्ट में ले जाया गया और कोर्ट ने (केस CBI को सौंपने का) आदेश दिया, वह एक साजिश है. कोर्ट ने खास तौर पर CBI जांच का आदेश दिया है, लेकिन किसी का नाम नहीं लिया है। फिर भी मीडिया में नाम लिए जा रहे हैं.
वहीं बीजेपी नेता राम कदम ने कहा कि न्यायपालिका ने आखिरकार दिशा सालियन के परिवार को न्याय दिलाया है. न्याय में देरी हो सकती है, लेकिन न्याय से इनकार नहीं किया जा सकता. दिशा सालियन के पिता का खुद कहना है कि उनकी बेटी की मौत सामान्य नहीं थी, उसकी हत्या की गई थी, उसे परेशान किया गया, प्रताड़ित किया गया और उस पर अत्याचार किए गए. उस समय की उद्धव ठाकरे सरकार ने एक बड़े नेता को बचाने के लिए मामले को दबाने का गलत काम किया.
क्यों चर्चा में है मामला?
बता दें कि दो दिन पहले दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान ने दावा किया कि उनके पास आदित्य ठाकरे, सूरज पंचोली, डीनो मोरिया, सचिन वाजे, परमबीर सिंह और रिया चक्रवर्ती के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं.
वहीं उनके वकील निलेश ओझा ने आरोप लगाया कि दिशा के साथ गैंगरेप के बाद हत्या की गई, क्योंकि उसके पास आदित्य ठाकरे गैंग के ड्रग्स और बाल तस्करी से जुड़े सबूत थे, जो उसने सुशांत सिंह राजपूत को दिए थे. ओझा ने यह भी कहा कि दिशा का मोबाइल 9 से 17 जून 2020 तक आरोपियों के कब्जे में रहा.
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