Unnat Krishi Mahotsav Raisen: मध्यप्रदेश के किसानों के लिए 11 अप्रैल का दिन सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि बदलती खेती की तस्वीर देखने का मौका बन गया. रायसेन के दशहरा मैदान में आयोजित ‘उन्नत कृषि महोत्सव 2026' में परंपरागत खेती से आगे बढ़कर आधुनिक तकनीक, बाजार से जुड़ाव और सरकारी योजनाओं की सीधी जानकारी किसानों तक पहुंचाई गई. बीज, उर्वरक, सिंचाई, मशीनरी से लेकर बैंकिंग समस्याओं तक खेती से जुड़े हर पहलू को एक ही मंच पर रखा गया. सरकार के दावों और किसानों की ज़मीनी जरूरतों के बीच यह महोत्सव कितना असरदार है, इसकी झलक पहले ही दिन देखने को मिली. शनिवार से शुरू हुए तीन दिवसीय उन्नत कृषि महोत्सव, प्रदर्शनी एवं प्रशिक्षण का भव्य शुभारंभ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया, जहाँ मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए हजारों किसान, कृषि वैज्ञानिक, विशेषज्ञ और कृषि व संबद्ध क्षेत्रों के प्रतिनिधि एक मंच पर जुटे.
रायसेन बना कृषि संवाद का केंद्र
रायसेन के दशहरा मैदान में शुरू हुआ उन्नत कृषि महोत्सव 13 अप्रैल तक चलेगा. पहले ही दिन बड़ी संख्या में किसान यहां पहुंचे. अलग‑अलग विभागों और निजी कंपनियों के स्टॉल लगाए गए थे, जहां किसानों को नई किस्म के बीज, उर्वरक, ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सिंचाई तकनीकों और आधुनिक कृषि यंत्रों की जानकारी दी गई. कई स्टॉलों पर मशीनों का लाइव प्रदर्शन भी किया गया, जिससे किसान तकनीक को केवल कागज़ों में नहीं, ज़मीन पर काम करते देख सकें.
‘ई‑फॉर्म्स' एप से डिजिटल खेती की ओर कदम
महोत्सव के दौरान किसानों के लिए ‘ई‑फॉर्म्स' एप लॉन्च किया गया. इस एप के जरिए किसानों को योजनाओं से जुड़ी जानकारी, आवेदन प्रक्रिया और दस्तावेज़ी परेशानियों से राहत दिलाने का दावा किया गया है. अधिकारियों का कहना है कि इससे बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी और योजनाओं का लाभ सीधे पात्र किसानों तक पहुंचेगा. हालांकि कई किसानों ने यह भी कहा कि एप तभी सफल होगा, जब गांव स्तर पर इसकी जानकारी और तकनीकी सहायता मिले.
मध्यप्रदेश की माटी में कुछ तो खास बात है...
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) April 11, 2026
- माननीय रक्षा मंत्री श्री @rajnathsingh जी pic.twitter.com/KqlEydE2I3
रक्षा मंत्री ने कहा, किसानों की तकदीर बदल सकता है यह मंच
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने महोत्सव को किसानों के लिए उपयोगी मंच बताया. उन्होंने कहा कि यहां किसानों को न सिर्फ सरकारी योजनाओं की जानकारी मिल रही है, बल्कि बाजार से सीधे जुड़ने के रास्ते भी खुल रहे हैं. रक्षा मंत्री ने खेती को चुनौतीपूर्ण कार्य बताते हुए कहा कि किसान देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और उनके हित में धन की कमी आड़े नहीं आने दी जाएगी. उनके भाषण में भरोसे के साथ‑साथ अपेक्षा का संदेश भी साफ दिखाई दिया.
आप सभी के बीच इस उन्नत कृषि महोत्सव में आकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है।
— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) April 11, 2026
रायसेन की धरती पर इस मेले का आयोजन निश्चित रूप से हमारे किसान भाइयों और बहनों के लिए न केवल लाभदायक सिद्ध होगा, बल्कि उनके जीवन की तस्वीर बदलने वाला भी साबित होगा, ऐसा मेरा पूर्ण विश्वास है।
- आदरणीय… pic.twitter.com/W6zw9WwwPa
रक्षा मंत्री ने कहा कि किसान केवल अन्न नहीं उगाता, वह पूरी अर्थव्यवस्था, रोजगार और उद्योग–धंधों को उगाता है, क्योंकि अर्थव्यवस्था के प्राथमिक (खेती-पशुपालन), द्वितीयक (उद्योग) और तृतीयक (सेवाएँ) तीनों क्षेत्रों की जड़ें किसान की जमीन से जुड़ी हैं. उन्होंने उदाहरण दिया कि किसान गेहूँ उगाता है, वही गेहूँ ट्रक से मंडी तक जाता है, आटा मिल में प्रोसेस होकर बिस्कुट–ब्रेड फैक्ट्रियों तक पहुँचता है, वहाँ मजदूर और मशीनें काम करते हैं, फिर पैकेजिंग, ट्रांसपोर्ट और दुकानों के जरिए वह उत्पाद उपभोक्ता तक पहुँचता है- यानी अगर किसान गेहूँ ही न उगाए तो पूरी चेन डगमगा जाएगी. उन्होंने कहा कि इसीलिए वे आत्मविश्वास के साथ कहते हैं कि किसान पूरी अर्थव्यवस्था को चलाता है और सरकार खेती को गर्व का विषय बनाने तथा किसान को पूरी आन–बान–शान के साथ जीवन जीने योग्य बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे ड्रोन, सेंसर, मोबाइल तकनीक, स्मार्ट फार्मिंग, बिना मिट्टी की खेती, संरक्षित खेती, बागवानी और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में स्टार्टअप और नवाचार के साथ कृषि से जुड़ें, क्योंकि कृषि क्षेत्र में अपार संभावनाएँ हैं और गाँव का नौजवान जितना जुड़ता जाएगा, उतनी ही नई तकनीक और अधिक आमदनी के रास्ते खुलते जाएँगे. उन्होंने यह भी बताया कि रक्षा मंत्रालय ने कैंटोनमेंट क्षेत्रों में आसपास के किसानों से ही जैविक सब्जियाँ और श्री अन्न (ज्वार, बाजरा, रागी) खरीदने की पहल की है, जिससे किसानों की आय बढ़ रही है और जवानों को ताज़ा, पौष्टिक भोजन मिल रहा है, और इस तरह ‘जय जवान, जय किसान' के नारे को नए अर्थ के साथ चरितार्थ किया जा रहा है.
किसानों के सर्वांगीण विकास के प्रति प्रतिबद्ध मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 को “कृषक कल्याण वर्ष” के रूप में मनाने का संकल्प लिया है : CM @DrMohanYadav51 @AgriGoI @minmpkrishi #CMMadhyaPradesh #उन्नत_कृषि_महोत्सव pic.twitter.com/1W0E0eG9eq
— Chief Minister, MP (@CMMadhyaPradesh) April 11, 2026
मुख्यमंत्री का दावा, खेती को मिल रहा सही मूल्य
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की छवि वैश्विक स्तर पर बदली है और इसका असर कृषि क्षेत्र में भी दिख रहा है. उन्होंने बताया कि प्रदेश के किसानों को इस साल गेहूं का 2625 रुपये प्रति क्विंटल मूल्य दिया जा रहा है, जिसमें 40 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस शामिल है. मुख्यमंत्री के अनुसार, सिंचाई के रकबे में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और किसानों को अब दिन में भी बिजली मिल रही है, जिससे उत्पादन और लागत दोनों पर असर पड़ा है.
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi के नेतृत्व में आज भारत का मान-सम्मान वैश्विक स्तर पर निरंतर बढ़ रहा है। देश न केवल खाद्यान्न उत्पादन में अग्रणी बन रहा है, बल्कि निर्यात के क्षेत्र में भी नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।
— Chief Minister, MP (@CMMadhyaPradesh) April 11, 2026
मुझे गर्व है कि मध्यप्रदेश का रायसेन जिला 47 देशों… pic.twitter.com/sXxQyJ3Ivf
रायसेन से दुनिया तक बासमती चावल
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में रायसेन जिले का उदाहरण देते हुए कहा कि यहां से दुनिया के 47 देशों में बासमती चावल का निर्यात हो रहा है. यह दावा स्थानीय किसानों के लिए गर्व का विषय जरूर है, लेकिन कई किसानों ने यह सवाल भी उठाया कि निर्यात का सीधा लाभ छोटे और सीमांत किसानों तक कितना पहुंच पा रहा है. महोत्सव के दौरान इस मुद्दे पर भी चर्चाएं सुनाई दीं.
मृदा स्वास्थ्य से लेकर एमएसपी तक चर्चा
महोत्सव में मृदा स्वास्थ्य कार्ड, फसल चयन और उर्वरक की सही मात्रा जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई. विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि मिट्टी की जांच के आधार पर सही फसल और खाद का चयन कैसे किया जाए. न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ाने की बात भी मंच से दोहराई गई, जिसे सुनकर किसानों ने राहत की सांस तो ली, लेकिन ज़मीनी अमल को लेकर सवाल बरकरार रहे.
युवा और स्टार्टअप पर सरकार का फोकस
कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि कृषि क्षेत्र में स्टार्टअप के जरिए युवाओं को जोड़ा जा सकता है. सरकार का मानना है कि इससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी और किसान सीधे बाजार से जुड़ सकेंगे. कई युवा उद्यमियों ने भी यहां अपने मॉडल पेश किए. हालांकि किसानों का कहना था कि स्टार्टअप तभी टिक पाएंगे, जब उन्हें गांव स्तर पर समर्थन और प्रशिक्षण मिले.
आज रायसेन कृषि मेले में देशभर के कृषि वैज्ञानिक, विशेषज्ञ, उन्नतशील किसान और मंत्रीगण आए हैं।
— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) April 11, 2026
यहां हॉर्टिकल्चर, इंटीग्रेटेड फार्मिंग, आधुनिक तकनीक, ड्रोन उपयोग सहित छोटे खेतों में अधिक लाभ कैसे मिले, इसके लिए एकीकृत कृषि प्रणाली का व्यवहारिक प्रदर्शन भी यहां किया जा रहा है। pic.twitter.com/Gem4vBpdNB
एमपी को हॉर्टिकल्चर हब बनाने की तैयारी
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार वर्ष 2026 को कृषि कल्याण वर्ष के रूप में मना रही है. उन्होंने रायसेन को ज्ञान, विज्ञान, अनुसंधान और किसान के महासंगम का उदाहरण बताया. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विकसित कृषि और किसानों की आय बढ़ाए बिना देश का विकास संभव नहीं है. इस दिशा में हर राज्य का कृषि रोडमैप तैयार किया जा रहा है और मध्यप्रदेश को हॉर्टिकल्चर हब बनाने के प्रयास तेज किए जा रहे हैं.
राष्ट्रीय कृषि मेला में केवल भाषण नहीं होगा, वैज्ञानिक पहले प्रेजेंटेशन देंगे, फिर किसान सवाल पूछ सकेंगे।
— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) April 11, 2026
यह मेला अद्भुत है। यहाँ तो पाठशाला की तरह किसानों को सिखाने का काम होगा। pic.twitter.com/nVRrX3AluW
दाल मिलें और एमएसपी पर खरीद का भरोसा
केंद्रीय मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि मध्यप्रदेश में 55 दाल मिलें खोलने का फैसला लिया गया है और दलहन को एमएसपी पर खरीदा जाएगा. यह घोषणा दलहन उत्पादक किसानों के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आई, हालांकि इसके प्रभाव और क्रियान्वयन पर सभी की निगाहें टिकी हैं.
उम्मीद और सवाल
उन्नत कृषि महोत्सव 2026 किसानों के लिए एक ऐसा मंच बनकर उभरा है, जहां उम्मीदें भी हैं और सवाल भी. तकनीक, योजनाएं और घोषणाएं अपनी जगह हैं, लेकिन उनका असर तभी दिखेगा, जब ये बातें खेत तक और किसान की जेब तक पहुंचें. रायसेन से उठी यह पहल आने वाले दिनों में किस दिशा में जाती है, इसका जवाब शायद इस महोत्सव के बाद ज़मीन पर ही मिलेगा.
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