भारत में लापता बच्चों के बढ़ते मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं. अदालत ने कहा कि देश में करीब 47,000 बच्चे अब भी लापता हैं, जो बेहद चिंताजनक स्थिति है. इस पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने देशभर के पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसी भी व्यक्ति के लापता होने की जानकारी मिलते ही बिना देरी के तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए.
न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और आर. महादेवन की पीठ ने मामलों में बढ़ोतरी पर असंतोष जताते हुए कहा कि लापता बच्चे अक्सर संगठित अंतरराज्यीय मानव तस्करी गिरोहों का शिकार बन जाते हैं.
इसके साथ ही सर्वोच्च अदालत ने केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय को निर्देश दिया कि देश के सभी पुलिस थानों को जोड़ने वाला एक एकीकृत नेटवर्क बनाया जाए, जिसमें लापता बच्चों और महिलाओं से जुड़े मामलों के लिए एक विशेष पोर्टल भी शामिल हो, ताकि ऐसे मामलों में समन्वय और कार्रवाई तेज की जा सके. Zudem, कोर्ट ने मानव तस्करी विरोधी इकाइयों को चार सप्ताह के भीतर पूरी तरह सक्रिय करने का भी आदेश दिया है, जिससे तस्करी के नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके.
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