Sukma Wildlife Hunting: छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक इंस्टाग्राम रील ने वन्यजीव शिकार के बड़े मामले का पर्दाफाश कर दिया. गोलापल्ली क्षेत्र के जंगलों में दुर्लभ विशाल भारतीय गिलहरी और एक बंदर का शिकार करने वाले सात आरोपियों को वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने गिरफ्तार कर लिया है. आरोपियों ने न केवल संरक्षित वन्यजीवों का शिकार किया, बल्कि उसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर भी साझा किया. वीडियो वायरल होने के बाद वन विभाग हरकत में आया और त्वरित कार्रवाई करते हुए पूरे गिरोह को पकड़ लिया. पूछताछ में आरोपियों ने शिकार किए गए वन्यजीवों का मांस पकाकर खाने की बात भी स्वीकार की है. सुकमा से NDTV के लिए सलीम शेख की रिपोर्ट.
इंस्टाग्राम रील से हुआ पूरे मामले का खुलासा
सुकमा जिले के कोंटा विकासखंड अंतर्गत ग्राम गोलापल्ली में वन्यजीवों के अवैध शिकार का मामला सामने आया. आरोपियों ने जंगल में शिकार करने के बाद मृत विशाल भारतीय गिलहरियों और बंदर के साथ वीडियो बनाकर इंस्टाग्राम पर अपलोड कर दिया. सोशल मीडिया पर वायरल हुई इस रील पर वन विभाग की नजर पड़ी, जिसके बाद जांच शुरू की गई. वीडियो में दिखाई दे रहे लोगों की पहचान कर वन विभाग ने पुलिस की मदद से दबिश देकर आरोपियों को हिरासत में लिया.
दुर्लभ प्रजाति की तीन विशाल गिलहरियां और एक बंदर का शिकार
सुकमा वनमंडल अधिकारी अक्षय भोंसले ने NDTV को बताया कि जांच में सामने आया कि आरोपियों ने जंगल में तीन विशाल भारतीय गिलहरियों (Indian Giant Squirrel) और एक बंदर का शिकार किया था. पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि शिकार के बाद उन्होंने वन्यजीवों का मांस पकाकर खाया भी था. इस खुलासे के बाद वन विभाग ने मामले को गंभीर वन्यजीव अपराध मानते हुए विस्तृत जांच शुरू की.

शिकार में इस्तेमाल हथियार और मोबाइल जब्त
आरोपियों की निशानदेही पर वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए 1 भरमार देशी बंदूक, 2 हाईटेक गुलेल और वीडियो बनाने में इस्तेमाल मोबाइल फोन जब्त किए हैं. अधिकारियों का कहना है कि जब्त मोबाइल के डेटा की फोरेंसिक जांच कराई जाएगी ताकि वीडियो की प्रामाणिकता और पूरे घटनाक्रम की पुष्टि की जा सके.
फोरेंसिक जांच से मजबूत होगा केस
वन विभाग ने घटनास्थल से वन्यजीवों के बाल और अन्य जैविक साक्ष्य भी एकत्र किए हैं. इन नमूनों को वैज्ञानिक परीक्षण के लिए फोरेंसिक लैब भेजा गया है. विभाग का मानना है कि फोरेंसिक रिपोर्ट अदालत में मामले को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. साइबर फोरेंसिक विशेषज्ञ वायरल वीडियो और मोबाइल डेटा की भी जांच करेंगे.
15 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए आरोपी
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार सातों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया. कोर्ट ने सभी आरोपियों को 15 दिनों की न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है. गिरफ्तार आरोपियों में गोलापल्ली, माड़ीगुड़ा, लक्ष्मीपुरम और सिंगाराम गांवों के निवासी शामिल हैं.

Sukma Wildlife Hunting: पकड़े गए आरोपी
क्यों महत्वपूर्ण है विशाल भारतीय गिलहरी?
विशाल भारतीय गिलहरी (Ratufa indica) देश की एक दुर्लभ और संरक्षित प्रजाति मानी जाती है. यह सामान्य गिलहरियों की तुलना में काफी बड़ी होती है और जंगलों के पारिस्थितिक संतुलन में अहम भूमिका निभाती है. बीजों के प्रसार और वन पुनर्जनन में इसकी महत्वपूर्ण भागीदारी होती है. इसी वजह से वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत इस प्रजाति को विशेष सुरक्षा प्रदान की गई है.
3 से 7 साल तक की सजा का प्रावधान
वन अधिकारियों के अनुसार संरक्षित वन्यजीवों के शिकार का मामला गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आता है. ऐसे मामलों में आरोपी को 3 से 7 वर्ष तक की जेल और भारी आर्थिक दंड का सामना करना पड़ सकता है.
वन विभाग की लोगों से अपील
सुकमा वनमंडल अधिकारी अक्षय भोंसले ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं वन्यजीवों के शिकार, अवैध व्यापार या मांस बिक्री की जानकारी मिले तो तुरंत वन विभाग को सूचित करें. उन्होंने कहा कि सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी.
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