Seed Act 2026 and Pesticides Act: भारत सरकार के केंद्रीय कृषि एवं पंचायत मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने रायपुर मैं एक बड़ी जानकारी दी. मंगलवार को रायपुर से डोंगरगढ़ रवाना होते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार जल्द ही एक कड़ा कानून लाने वाली है. रायपुर में केंद्रीय मंत्री चौहान ने कहा- आज एक महत्वपूर्ण समझौता भारत सरकार और यूरोपियन यूनियन के बीच हुआ है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का सर्वत्र विकास हो रहा है. भारत दुनिया में चावल की उपज में विश्व में पहले स्थान पर पहुंच गया है. पेस्टिसाइड एक्ट (Pesticides Act) और नया सीड एक्ट (Seed Act 2026) पर जनता के सुझाव भी मांगे हैं. जल्द कठोर कानून लाएंगे.
1966 का पुराना कानून अब होगा आधुनिक : शिवराज सिंह चौहान
1966 का सीड एक्ट पुराने समय का था जब न तकनीक थी न डेटा. अब हम एक आधुनिक कानून ला रहे हैं, जो ट्रेसिबिलिटी, डिजिटल रिकॉर्ड और जवाबदेही के सिद्धांत पर आधारित है ताकि भविष्य में कोई भी किसान ठगा न जाए.
नकली खाद, नकली बीज और नकली पेस्टिसाइड, ये किसान की सबसे बड़ी समस्या हैं। हम कोशिश कर रहे हैं कि संसद के इसी सत्र में इन पर कड़ा कानून बनाया जाए।#RepublicDay pic.twitter.com/WIliVarzf2
— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) January 26, 2026
नए सीड एक्ट में क्या है?
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि यह विधेयक किसानों की सुरक्षा, बीज की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने वाला ऐतिहासिक कदम है. इसमें हम लोगों ने कोशिश ये की है कि ट्रेसिबिलिटी (Traceability) का एक सिस्टम बना रहे हैं पूरा. अभी किसान को बीज पता नहीं चलता कि कहां आया, कहां उत्पादित किया गया. अब इसमें ट्रेसिबिलिटी का पूरा एक सिस्टम होगा, जो बीज आएंगे वो ये पता चलेगा कि डीलर के पास कहां से आए.
तो एक खराब बीज या तो आएंगे ही नहीं, या आएंगे तो पता चल जाएगा और जिसने दिए उसको दंड दिया जा सकेगा. इससे सीधे-सीधे किसानों को. अभी जाते हैं दुकान पर और बातें करके कोई भी डीलर उनको बेच देता है कि ये बहुत अच्छा बीज है, इससे ये उत्पादन होगा और वो खरीद लेता है. लेकिन इससे पूरे मूल का पता चलेगा.
सीड कंपनी का रजिस्ट्रेशन होगा
इसमें सीड कंपनी का रजिस्ट्रेशन किया जाएगा. रजिस्ट्रेशन की जो व्यवस्था है, उससे भी कौन-कौन सी पंजीकृत हमारी सीड कंपनीज हैं या सीड बेचने वाले हैं, वो पता चल सकेगा. इससे अनाधिकृत रूप से अगर कोई बीज बेचेगा, तो वो भी जानकारी तत्काल प्राप्त की जा सकेगी.
परंपरागत बीजों का क्या होगा?
परंपरागत बीज, जो किसान बोता चला आया है. उस पर ये प्रतिबंध लागू नहीं होंगे क्योंकि किसान आपस में भी बीजों का विनिमय करता है. किसान खुद का बीज बो सकता है. किसान दूसरे किसान को बीज दे सकता है.
500 के जुर्माना नहीं अब 30 लाख रुपये तक का दंड
कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने बताया कि जैसे ही ट्रेसिबिलिटी लागू होगी, नकली या खराब बीज की पहचान तुरंत हो जाएगी. उन्होंने कहा, “खराब बीज आएंगे ही नहीं, और अगर आएंगे तो पकड़े जाएंगे. जिसने खराब बीज दिया, उसे दंड दिया जाएगा. इससे किसानों को भ्रमित करने वाली कंपनियों और डीलरों की मनमानी पर लगाम लगेगी. बीजों की गुणवत्ता पर अब किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. अभी तक 500 रुपये तक का जुर्माना था, अब प्रस्ताव है कि 30 लाख रुपये तक जुर्माना हो और अगर कोई जानबूझकर अपराध करता है तो सजा का भी प्रावधान है. उन्होंने कहा कि सब कंपनियां खराब नहीं हैं, लेकिन जो किसान को धोखा देंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी.
राज्य सरकारों के अधिकार रहेंगे यथावत
शिवराज सिंह ने कहा कि कुछ लोगों ने यह आशंका जताई थी कि नया कानून राज्यों के अधिकार घटा देगा, इस पर कृषि मंत्री ने साफ कहा, “कृषि राज्य का विषय है. राज्य सरकारों के अधिकार वैसे ही बने रहेंगे. केंद्र केवल समन्वय करेगा और राज्यों के सहयोग से यह कानून लागू होगा.”
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