देश के सबसे चर्चित और संपन्न राजघरानों में शुमार ग्वालियर के सिंधिया राजपरिवार में चल रहा दशकों पुराना संपत्ति विवाद अब अंतिम पड़ाव पर पहुंचता दिखाई दे रहा है. केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया, नेपाल में रहने वाली ऊषा राजे राणा और अन्य पारिवारिक पक्षों के बीच अरबों रुपये की विरासत को लेकर लंबे समय से कानूनी लड़ाई चल रही है. सूत्रों के मुताबिक कई दौर की बैठकों के बाद संपत्ति बंटवारे के फार्मूले पर सहमति बन गई है. ग्वालियर जिला न्यायालय में समझौते की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है. यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है तो देश की विभिन्न अदालतों में लंबित एक दर्जन से अधिक मुकदमों का पटाक्षेप हो सकता है.
सिंधिया राजपरिवार में वर्षों से चल रहा है विरासत विवाद
ग्वालियर राजघराने की संपत्तियों को लेकर लंबे समय से परिवार के विभिन्न सदस्यों के बीच कानूनी विवाद चल रहा है. विवाद के प्रमुख पक्षों में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, उनकी बुआ और राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया, मध्यप्रदेश की पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया, ऊषा राजे राणा और परिवार के अन्य सदस्य शामिल हैं. संपत्ति के स्वामित्व और उत्तराधिकार को लेकर देश की विभिन्न अदालतों में कई मुकदमे वर्षों से लंबित हैं.
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समझौते की दिशा में बढ़े कदम
सूत्रों के अनुसार परिवार के सदस्यों के बीच कई दौर की बातचीत और बैठकों के बाद समझौते का रास्ता लगभग साफ हो गया है. ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से ग्वालियर जिला न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किया गया है, जिसमें आपसी सहमति से विवाद समाप्त करने की इच्छा जताई गई है. बताया जा रहा है कि अन्य पक्षों की ओर से भी समझौते से संबंधित आवेदन जल्द अदालत में पेश किए जा सकते हैं. मामले में अगली सुनवाई 8 जुलाई को प्रस्तावित है.
कई शहरों में चल रहे हैं मुकदमे
संपत्ति विवाद को लेकर ग्वालियर, दिल्ली, मुंबई और पुणे की अदालतों में एक दर्जन से अधिक मामले लंबित बताए जाते हैं. इनमें सबसे अधिक मामले मुंबई की अदालतों में हैं, जबकि ग्वालियर में भी कई मुकदमे विचाराधीन हैं. यदि सभी पक्ष समझौते पर अंतिम सहमति दे देते हैं तो वर्षों पुरानी कानूनी लड़ाई का अंत हो सकता है.
किन संपत्तियों को लेकर है विवाद?
सिंधिया परिवार की विरासत देश के कई शहरों में फैली हुई है. ग्वालियर में प्रमुख संपत्तियों में शामिल हैं:
- जय विलास पैलेस
- ऊषा किरण पैलेस
- छोटी विश्रांति
- हिरण्यवन कोठी
साथ ही और भी राजसी भवन व परिसर हैं. इसके अलावा पुणे का पद्मा विलास पैलेस, मुंबई के समुद्र महल फ्लैट्स, दिल्ली स्थित लेखा विहार, सिंधिया विला और उज्जैन का ऐतिहासिक कालियादेह पैलेस भी इस विरासत का हिस्सा माने जाते हैं.
'जो जहां काबिज, संपत्ति उसी की' फॉर्मूला चर्चा में
पारिवारिक सूत्रों के अनुसार समझौते का आधार एक व्यावहारिक फार्मूला हो सकता है. बताया जा रहा है कि जो सदस्य जिस संपत्ति पर वर्तमान में काबिज है, उस संपत्ति का स्वामित्व उसी के पास रहने देने पर सहमति बनी है. हालांकि इस फार्मूले की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसे विवाद समाप्त करने का सबसे आसान समाधान माना जा रहा है.
जयविलास पैलेस का भी हो सकता है समाधान
जयविलास पैलेस लंबे समय से सिंधिया परिवार की सबसे महत्वपूर्ण धरोहरों में शामिल रहा है. पैलेस का एक हिस्सा संग्रहालय के रूप में संचालित है. वहीं रानी महल वाले हिस्से में वर्तमान में ज्योतिरादित्य सिंधिया का परिवार निवास करता है. यशोधरा राजे सिंधिया भी ग्वालियर आने पर यहीं ठहरती रही हैं. समझौते के बाद इस संपत्ति की स्थिति भी स्पष्ट हो सकती है.
ट्रस्ट और कंपनियों से भी जुड़ा है मामला
संपत्ति विवाद केवल महलों और भवनों तक सीमित नहीं है. ग्वालियर-चंबल अंचल की कई संपत्तियां सर जयाजीराव ट्रस्ट और कृष्ण माधव ट्रस्ट जैसी संस्थाओं के अधीन हैं. वहीं सिंधिया इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड (SIPL) जैसी व्यावसायिक संस्थाओं से भी विरासत जुड़ी हुई है. इन संस्थाओं के स्वामित्व और नियंत्रण को लेकर भी वर्षों से चर्चा और कानूनी प्रक्रिया चलती रही है.
पन्ना का शिवलिंग बना चर्चा में है
संपत्ति बंटवारे की चर्चाओं के बीच राजमाता विजयाराजे सिंधिया से जुड़ा एक विशेष धार्मिक प्रतीक भी चर्चा में है. यह पन्ना (रत्न) से निर्मित शिवलिंग है, जिसकी राजमाता नियमित पूजा करती थीं. सूत्रों के अनुसार यह शिवलिंग फिलहाल वसुंधरा राजे के पास सुरक्षित बताया जाता है. चर्चा है कि नए समझौते में यह धरोहर ज्योतिरादित्य सिंधिया के हिस्से में आ सकती है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है.
कौन-कौन हैं समझौते के प्रमुख पक्ष?
संभावित समझौते में शामिल प्रमुख नाम:
- ज्योतिरादित्य सिंधिया
- वसुंधरा राजे सिंधिया
- यशोधरा राजे सिंधिया
- ऊषा राजे राणा
- चित्रांगदा राजे
- कनिका देवी
- प्रतिमा देवी
- अन्य संबंधित पारिवारिक पक्ष
8 जुलाई की सुनवाई पर टिकी निगाहें
अपर लोक अभियोजक धर्मेंद्र कुमार शर्मा के अनुसार न्यायालय में समझौते संबंधी आवेदन प्रस्तुत किया जा चुका है. अब सभी की नजर 8 जुलाई को होने वाली सुनवाई पर है. कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही समझौते को अंतिम रूप मिल सकेगा.
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