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₹493 करोड़ और 350 एकड़ में बनेगा देश का पहला Telecom Manufacturing Zone, ग्वालियर से बदलेगी तस्वीर

ग्वालियर में 350 एकड़ में देश का पहला Telecom Manufacturing Zone विकसित होगा. केंद्र सरकार ने परियोजना के लिए 493 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है. यहां मोबाइल, फाइबर ऑप्टिक्स, सेमीकंडक्टर, 5G और 6G तकनीक से जुड़े उत्पादों का निर्माण और अनुसंधान होगा.

₹493 करोड़ और 350 एकड़ में बनेगा देश का पहला Telecom Manufacturing Zone, ग्वालियर से बदलेगी तस्वीर
  • ग्वालियर में देश का पहला Telecom Manufacturing Zone बनेगा, जिसके लिए केंद्र ने 493 करोड़ रुपये सहायता दी.
  • यह ज़ोन लगभग 350 एकड़ में आधुनिक Plug-and-Play मॉडल पर आधारित होगा, जिससे उद्योगों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी.
  • इसमें मोबाइल फोन, नेटवर्क उपकरण, फाइबर ऑप्टिक्स, सेमीकंडक्टर और 5G-6G तकनीक के निर्माण और रीसर्च शामिल होंगे.

मध्य प्रदेश के ग्वालियर को देश के टेलीकॉम सेक्टर में एक बड़ी और ऐतिहासिक पहचान मिलने जा रही है. करीब 350 एकड़ क्षेत्र में देश का पहला Telecom Manufacturing Zone (TMZ) विकसित किया जाएगा, जिसके लिए केंद्र सरकार ने पहले चरण में 493 करोड़ रुपये की शत-प्रतिशत वित्तीय सहायता मंजूर की है. 

इस परियोजना से ग्वालियर न केवल भारत के पहले टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभरेगा, बल्कि मोबाइल फोन, नेटवर्क उपकरण, फाइबर ऑप्टिक्स, सेमीकंडक्टर और 5G-6G तकनीक के निर्माण और अनुसंधान का प्रमुख केंद्र भी बनेगा. 30 जुलाई को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में दूरसंचार विभाग और मध्य प्रदेश शासन के उद्योग विभाग के बीच इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए जाएंगे.

विज्ञान भवन में होगा ऐतिहासिक समझौता

केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में 30 जुलाई को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर होंगे. यह करार भारत सरकार के दूरसंचार विभाग और मध्य प्रदेश शासन के उद्योग विभाग के बीच किया जाएगा. इस परियोजना को देश के दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है.

ग्वालियर देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग हब

Telecom Manufacturing Zone को ग्वालियर में लगभग 350 एकड़ भूमि पर आधुनिक Plug-and-Play मॉडल के आधार पर विकसित किया जाएगा. इस मॉडल का उद्देश्य उद्योगों को तैयार आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है, जिससे कंपनियां तेजी से अपना उत्पादन शुरू कर सकें. परियोजना के पहले चरण में बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए केंद्र सरकार ने 493 करोड़ रुपये की पूरी वित्तीय सहायता स्वीकृत की है.

मोबाइल से लेकर 6G तकनीक तक होगा निर्माण

इस एकीकृत विनिर्माण परिसर में मोबाइल फोन, दूरसंचार नेटवर्क उपकरण, फाइबर ऑप्टिक्स और सेमीकंडक्टर जैसे उत्पादों के निर्माण की सुविधाएं विकसित की जाएंगी. इसके साथ ही 5G और भविष्य की 6G तकनीक पर अनुसंधान और विकास का काम भी यहीं किया जाएगा. इससे भारत की टेलीकॉम जरूरतों को घरेलू स्तर पर पूरा करने में मदद मिलेगी और आयात पर निर्भरता कम होगी.

सेमीकंडक्टर मिशन को भी मिलेगा बल

यह परियोजना केंद्र सरकार की Semiconductor Mission और Electronics Component Schemes जैसी राष्ट्रीय योजनाओं के साथ तालमेल बनाकर विकसित की जाएगी. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अनुसंधान, डिजाइन, उत्पादन और सप्लाई की पूरी प्रक्रिया एक ही जगह संचालित हो सकेगी. इससे उद्योगों की लागत और समय दोनों में कमी आएगी तथा उत्पादन क्षमता बढ़ेगी.

निवेश, रोजगार और स्टार्टअप्स को मिलेंगे नए अवसर

Telecom Manufacturing Zone के विकसित होने से ग्वालियर और आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश आने की संभावना है. इसके साथ ही हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे. सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSME) और तकनीक आधारित स्टार्टअप्स को भी नए अवसर मिलेंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.

सिंधिया के प्रयासों से ग्वालियर को मिली बड़ी उपलब्धि

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के विशेष प्रयासों और लगातार की गई पहल के बाद ग्वालियर को देश के पहले Telecom Manufacturing Zone के लिए चुना गया है. यह उपलब्धि सिर्फ मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है. इससे ग्वालियर की पहचान एक आधुनिक औद्योगिक और तकनीकी केंद्र के रूप में और मजबूत होगी.

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