- मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण को लेकर चार अक्टूबर को लखनऊ में धर्म संसद आयोजित की जाएगी
- सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को लखनऊ में पोस्टर के जरिए धर्म संसद में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया है
- विश्व हिंदू रक्षा परिषद ने अखिलेश यादव को मथुरा में मंदिर निर्माण के लिए समर्थन देने की अपील की है
मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बनाने को लेकर होने वाली चार अक्टूबर की धर्म संसद से पहले लखनऊ में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को पोस्टर के जरिए निमंत्रण भेजा गया है. पूरे शहर में अलग-अलग चौराहों पर अखिलेश यादव को मथुरा में भव्य कृष्ण मंदिर बनाने के लिए हो रहे धर्म संसद में आने को लेकर निमंत्रण के पोस्टर लगाए गए हैं.
विश्व हिंदू रक्षा परिषद की महिला विंग अध्यक्ष प्रियंका ठाकुर और वीएचआरपी के प्रदेश अध्यक्ष बादल यादव ने अखिलेश यादव के आवास के पास भी ये पोस्टर लगाए हैं.
पोस्टर में लिखा गया है,
"आदरणीय अखिलेश यादव जी,
हमारे आराध्य कृष्ण भगवान के मथुरा में भव्य मंदिर निर्माण के लिए लखनऊ में अंतरराष्ट्रीय धर्म संसद होने जा रहा है. उम्मीद है कि आप ईद में जिस तरह मुस्लिम वोट की खातिर ईदगाह जाते हैं, उसी तरह आप इस धर्म संसद में आकर विदेशी आक्रांताओं की निशानी को मिटाने और मंदिर बनाने का पक्ष लेकर हम सनातनियों का भी साथ देंगे."
पोस्टर में आगे लिखा है, "अयोध्या, काशी तो बस झांकी है, अब केवल मथुरा ही बाकी है..."
इस पोस्टर में भगवान श्रीकृष्ण के युद्ध करते हुए सुदर्शन चक्र लिए हुए तस्वीर भी लगाई गई है.

'अयोध्या की तर्ज पर मथुरा में भी बनेगा भव्य मंदिर'
गौरतलब है कि हिंदू समाज लंबे समय से अयोध्या की तर्ज पर मथुरा में भी भव्य मंदिर बनाने की मांग कर रहा है. उनका कहना है कि हजारों सालों से षड्यंत्रकारियों ने सनातन को मिटाने का प्रयास किया, चाहे वो मुगल काल रहा हो, चाहे वो ब्रिटिशकाल रहा हो लेकिन सनातन का कोई बाल बांका नहीं कर सका, क्योंकि सनातन ही पुरातन है. आदिकाल की परंपरा ही सनातन है और यही एक ऐसी परंपरा है जो 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' की कामना करती है.
उनका कहना है कि भगवान कृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में निश्चित रूप से दिव्य और भव्य राम मंदिर जैसा कृष्ण जन्मभूमि बनना चाहिए और उसे सनातनियों की आस्था को समर्पित करना चाहिए.

कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद
बता दें कि मथुरा स्थित कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद मामला इलाहाबाद उच्च न्यायालय में चल रहा है. अदालत ने अपने पूर्व के आदेश में कहा है कि ये मुकदमा समय सीमा, वक्फ अधिनियम और पूजा स्थल अधिनियम, 1991 से बाधित नहीं हैं.
पूजा स्थल अधिनियम किसी भी धार्मिक ढांचे को जो 15 अगस्त, 1947 को मौजूद था, उसे परिवर्तित करने से रोकता है.
हिंदू पक्ष ने शाही ईदगाह मस्जिद का ढांचा हटाने के बाद भूमि का कब्जा देने और उस स्थान पर मंदिर बहाल करने की मांग के साथ कुल 18 वाद दायर किए हैं. यह विवाद मथुरा में मुगल सम्राट औरंगजेब के समय की शाही ईदगाह मस्जिद से जुड़ा है जिसे कथित तौर पर भगवान कृष्ण के जन्म स्थान पर एक मंदिर को ध्वस्त करने के बाद बनाया गया था.
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