सागर जिले के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब से जब एक के बाद एक मौत हो रही थी, तब जिला कलेक्टर आईएसएस प्रतिभा पाल ने सबसे जरूरी काम किया था. वो था इलाज के लिए जरूरी एंटीडोट. उनके इस फैसले का असर यह हुआ समय रहते फोमेपिजोल इंजेक्शन की व्यवस्था हो गई जो गंभीर मरीजों की जान बचाने में कारागर रही. इस इंजेक्शन और अन्य उपचार से अब तक 30 से अधिक मरीजों की जान बचाई जा चुकी है.
कहीं नहीं मिल रहा था इंजेक्शन
ऐसे में सागर कलेक्टर प्रतिभा पाल ने फोमेपिजोल की उपलब्धता को लेकर जानकारी लेना शुरू किया. लेकिन, उस समय प्रदेश के किसी भी सरकारी संस्थान में यह इंजेक्शन स्टॉक में नहीं था. भोपाल एम्स से लेकर, सभी बड़े अस्पतालों से जानकारी जुटाई गई, लेकिन कुछ भी हाथ नहीं लगा.
भोपाल से 3 घंटे में पहुंचे 10 इंजेक्शन
फिर शुरू हुआ जान बचाने का सिलसिला
फोमेपिजोल के बीएमसी पहुंचने के बाद गंभीर मरीजों को डॉक्टरों ने तत्काल उपचार देना शुरू किया. संख्या कम होने के कारण एक इंजेक्शन की डोज को तीन मरीजों के लिए इस्तेमाल किया गया. साथ ही, मरीजों की एथिनॉल थेरेपी और डायलिसिस भी की गई. इस उपचार का लाभ ये मिला कि बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में भर्ती पांच गंभीर मरीज वेंटिलेटर से हटकर सामान्य स्थिति में आ गए. सागर प्रशासन के अनुसार, इस इंजेक्शन से 30 से अधिक गंभीर मरीजों को ठीक किया गया है.
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