Primary Health Centre Chitaura: मध्य प्रदेश के सागर जिले के चितौरा स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) की बदहाल स्थिति सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत उजागर कर रही है. लगभग 30 हजार लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाए गए इस स्वास्थ्य केंद्र में आज तक न तो बिजली कनेक्शन की व्यवस्था हो सकी है और न ही पानी की समुचित सप्लाई शुरू हो पाई है. करोड़ों रुपये की लागत से बना यह केंद्र आज बुनियादी सुविधाओं के अभाव में खुद बीमार नजर आ रहा है.
1.84 करोड़ की लागत से हुआ था तैयार
चितौरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण करीब 1 करोड़ 84 लाख रुपये की लागत से किया गया था. इस अस्पताल की आधारशिला बड़े दावों और वादों के साथ रखी गई थी. दावा किया गया था कि यह स्वास्थ्य केंद्र आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा और क्षेत्र के ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराएगा, लेकिन आज स्थिति यह है कि अस्पताल भवन तो खड़ा है, पर सुविधाओं का गंभीर अभाव बना हुआ है.

सफाई न होने से गंदगी का अंबार है.
यह स्वास्थ्य केंद्र आसपास के करीब 10 गांवों के लोगों के लिए प्राथमिक उपचार का मुख्य केंद्र माना जाता है. क्षेत्र की लगभग 30 हजार आबादी इस अस्पताल पर निर्भर है, लेकिन बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं न होने के कारण अस्पताल की सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हो रही हैं. सबसे चिंताजनक स्थिति रात के समय की है, जब अस्पताल में कोई भी मेडिकल स्टाफ रुकने को तैयार नहीं होता. ऐसे में यदि किसी मरीज की हालत रात में गंभीर हो जाए तो उसे तत्काल इलाज के लिए जिला मुख्यालय सागर ले जाना पड़ता है.
चिकित्सा उपकरणों पर जम चुकी है धूल
अस्पताल परिसर की हालत भी बेहद खराब बनी हुई है. भवन के अंदर और बाहर धूल की मोटी परत जमी हुई दिखाई देती है. मरीजों की संख्या भी बेहद कम है, जिससे साफ है कि लोगों का भरोसा इस स्वास्थ्य केंद्र से उठता जा रहा है. अस्पताल में रखी कई जरूरी दवाएं और चिकित्सा उपकरण भी उचित रखरखाव के अभाव में धूल खा रहे हैं.

दवाओं पर जमी धूल.
दवाओं की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल
सबसे गंभीर बात यह है कि दवाओं को सुरक्षित रखने के लिए अस्पताल में रेफ्रिजरेटर तो मौजूद है, लेकिन बिजली कनेक्शन नहीं होने के कारण वह पूरी तरह बेकार पड़ा हुआ है. ऐसे में तापमान नियंत्रित रखने वाली दवाओं की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार कई दवाएं और इंजेक्शन निर्धारित तापमान में सुरक्षित रखने जरूरी होते हैं, अन्यथा उनकी प्रभावशीलता कम हो सकती है. अस्पताल के वॉशरूम और साफ-सफाई की व्यवस्था भी चिंताजनक स्थिति में है. मरीजों और उनके परिजनों को बुनियादी सुविधाओं के अभाव में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. स्वच्छता की कमी स्वास्थ्य केंद्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है.
पत्र लिखने के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
अस्पताल प्रभारी डॉ. शिवम मिश्रा का कहना है कि बिजली कनेक्शन, पानी और अन्य आवश्यक सुविधाओं को लेकर कई बार संबंधित विभागों को पत्र लिखा जा चुका है. उन्होंने बताया कि लगातार पत्राचार के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. इससे अस्पताल संचालन में भारी दिक्कतें आ रही हैं. अब बड़ा सवाल यह है कि जब सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के दावे कर रही है, तब करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए ऐसे स्वास्थ्य केंद्रों की दुर्दशा आखिर क्यों बनी हुई है. चितौरा PHC की स्थिति न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि योजनाओं की घोषणा और जमीनी अमल के बीच कितना बड़ा अंतर है.
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