Success Story: मध्य प्रदेश के सतना जिले के नागौद क्षेत्र स्थित छोटे से गांव सिंहपुर के एक साधारण परिवार के बेटे आर्यन तिवारी ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल में असिस्टेंट कमांडेंट बनकर जिले और पूरे प्रदेश का गौरव बढ़ाया है. गांव में मेडिकल शॉप संचालित करने वाले रमाकांत तिवारी के पुत्र आर्यन ने अपनी मेहनत, लगन और अनुशासन के बल पर यह मुकाम हासिल किया है. आर्यन को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वे पासिंग परेड के बाद मां के गले लगकर फूट-फूटकर रोते नजर आ रहे हैं. उनकी आंखों से खुशी के आंसू थे.
हैदराबाद स्थित नेशनल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी अकादमी (NISA) में आयोजित पासिंग आउट परेड में उन्होंने प्लाटून कमांडर के रूप में उत्कृष्ट नेतृत्व क्षमता का प्रदर्शन किया. उनके शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें 'बेस्ट इन आउटडोर ट्रेनिंग' पुरस्कार से सम्मानित किया गया. यह सम्मान तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने उन्हें प्रदान किया. आर्यन 10 अगस्त को दिल्ली में अपनी नई जिम्मेदारी संभालेंगे.
आर्यन तिवारी की सफलता की कहानी संघर्ष, स्पष्ट लक्ष्य और निरंतर मेहनत की मिसाल है. उनकी प्रारंभिक शिक्षा सिंहपुर स्थित सरस्वती विद्यालय में हुई. इसके बाद उनका चयन जवाहर नवोदय विद्यालय, कटनी में हुआ, जहां उन्होंने विज्ञान संकाय से 95.4 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की. आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित हिंदू कॉलेज से बीएससी की डिग्री प्राप्त की और इसके बाद पंजाब विश्वविद्यालय से एलएलएम किया.
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बिना कोचिंग हासिल की 100वीं रैंक
उच्च शिक्षा के दौरान ही उनका लक्ष्य संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा के माध्यम से केंद्रीय सशस्त्र बलों में अधिकारी बनना था. उन्होंने बिना किसी कोचिंग के स्व-अध्ययन करते हुए अपनी तैयारी जारी रखी. अपने दूसरे प्रयास में उन्होंने वर्ष 2023 की परीक्षा में ऑल इंडिया 100वीं रैंक प्राप्त कर सफलता हासिल की. इसके बाद लगभग डेढ़ वर्ष तक कठोर प्रशिक्षण प्राप्त किया और अब वे CISF में असिस्टेंट कमांडेंट के रूप में अपनी सेवाएं देंगे.
पिता बेटे को बनाना चाहते थे डॉक्टर
आर्यन के पिता रमाकांत तिवारी ने NDTV से खास बातचीत में बताया कि वे चाहते थे कि उनका बेटा डॉक्टर बने. 12वीं के बाद उन्होंने नीट की तैयारी के लिए कोटा में कमरा भी किराए पर ले लिया था. लेकिन इसी दौरान एक शिक्षक ने आर्यन की रुचि और क्षमता को पहचानते हुए उन्हें सिविल सेवाओं और केंद्रीय सुरक्षा बलों की दिशा में आगे बढ़ने की सलाह दी. आर्यन ने इस सलाह को गंभीरता से लिया और अपने लक्ष्य की ओर पूरी निष्ठा से जुट गए.
मंत्रालय में एसओ की नौकरी छोड़ी
संघर्ष के दौरान उन्हें एसएससी के माध्यम से मंत्रालय में सेक्शन ऑफिसर (SO) के पद पर नौकरी भी मिली, लेकिन उन्होंने अपने बड़े लक्ष्य से समझौता नहीं किया. तैयारी को पूरा समय देने के लिए उन्होंने उस नौकरी से इस्तीफा दे दिया. उनकी मां नीता तिवारी गृहिणी हैं, जबकि बहन स्तुति तिवारी जयपुर में कार्यरत हैं. आर्यन तिवारी की इस उपलब्धि से सिंहपुर गांव सहित पूरे नागौद क्षेत्र में हर्ष का माहौल है. स्थानीय निवासियों ने इसे युवाओं के लिए प्रेरणादायक उपलब्धि बताते हुए कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है.
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