President Droupadi Murmu MP Visit: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पांच दिवसीय मध्यप्रदेश दौरे पर हैं, इस बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने उन्हें एक विस्तृत पत्र लिखकर राज्य के आदिवासी समाज की समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया है. देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति होने के नाते उन्होंने राष्ट्रपति से अपेक्षा जताई है कि वे अपने प्रवास के दौरान आदिवासी समाज की वास्तविक स्थिति पर विशेष ध्यान दें. पत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पलायन, वनाधिकार, महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि मध्यप्रदेश का बड़ा आदिवासी वर्ग आज भी विकास और अधिकारों की मुख्यधारा से दूर है. साथ ही राष्ट्रपति से हस्तक्षेप और प्रभावी पहल की मांग भी की गई है.
राष्ट्रपति के नाम लिखा लंबा चौड़ा पत्र
मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को संबोधित पत्र में उनका स्वागत करते हुए कहा कि देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति के रूप में उनका जीवन संघर्ष और संवैधानिक मूल्यों के प्रति समर्पण करोड़ों आदिवासियों के लिए प्रेरणा है. उन्होंने लिखा कि राष्ट्रपति के मध्यप्रदेश प्रवास के अवसर पर राज्य के आदिवासी समाज की समस्याओं को उनके संज्ञान में लाना आवश्यक है, क्योंकि प्रदेश का बड़ा आदिवासी वर्ग आज भी मूलभूत सुविधाओं और अधिकारों से वंचित है.
महामहिम राष्ट्रपति महोदया,
— Jitendra (Jitu) Patwari (@jitupatwari) June 18, 2026
आज आवश्यकता योजनाओं की घोषणा की नहीं, अपितु संवैधानिक न्याय की भावना को धरातल पर उतारने की है।
आप स्वयं आदिवासी समाज से आती हैं, इसलिए हमें विश्वास है कि आपकी संवेदनशीलता और संवैधानिक प्रतिबद्धता इस महत्वपूर्ण विषय को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में… pic.twitter.com/OE8te6bo9F
देश का सबसे बड़ा आदिवासी राज्य, फिर भी चुनौतियां बरकरार
पत्र में उल्लेख किया गया है कि मध्यप्रदेश देश का सबसे बड़ा आदिवासी आबादी वाला राज्य है. प्रदेश में अनुसूचित जनजाति की आबादी करीब 1.53 करोड़ है, जो राज्य की कुल आबादी का लगभग 21 प्रतिशत है. पटवारी ने कहा कि झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी, खरगोन, मंडला, डिंडौरी, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, बैतूल, छिंदवाड़ा, सिवनी और शिवपुरी जैसे आदिवासी अंचलों में विकास की तस्वीर आज भी चिंताजनक बनी हुई है.
शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष ने पत्र में कहा कि आदिवासी समाज के उत्थान का सबसे प्रभावी माध्यम शिक्षा है, लेकिन जमीनी स्थिति बेहद कमजोर है. उन्होंने दावा किया कि आदिवासी समुदाय की साक्षरता दर राज्य के औसत से काफी कम है. आदिवासी इलाकों के अनेक विद्यालयों में शिक्षकों के पद रिक्त हैं और दूरस्थ वन क्षेत्रों में छात्रावासों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है. उच्च शिक्षा तक पहुंच सीमित होने के कारण बड़ी संख्या में युवा शिक्षा से वंचित रह जाते हैं.

President Droupadi Murmu MP Visit Jitu Patwari Letter: राष्ट्रपति के नाम पत्र
स्वास्थ्य सेवाओं को बताया चिंताजनक
पत्र में आदिवासी अंचलों की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई है. पटवारी ने कहा कि कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों और विशेषज्ञों की कमी बनी हुई है. मातृ एवं शिशु मृत्यु दर, कुपोषण, एनीमिया और संक्रामक रोग जैसी समस्याएं अभी भी व्यापक रूप से मौजूद हैं. कई गांवों में लोगों को उपचार के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है.
बेरोजगारी और पलायन का मुद्दा
कांग्रेस नेता ने लिखा कि रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिलने के कारण आदिवासी युवाओं को मजबूरी में पलायन करना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि लघु वनोपज के उचित मूल्य, प्रसंस्करण और विपणन की प्रभावी व्यवस्था नहीं होने के कारण आदिवासी परिवार आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं और गरीबी के दुष्चक्र में फंसे हुए हैं.
महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक न्याय पर चिंता
पत्र में आदिवासी क्षेत्रों में महिलाओं के खिलाफ अपराध, मानव तस्करी, भूमि विवाद और वनाधिकार कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की कमी का भी उल्लेख किया गया है. पटवारी ने कहा कि अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों का प्रभावी पालन नहीं होने से पीड़ित परिवारों को न्याय पाने के लिए लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है.

President Droupadi Murmu MP Visit Jitu Patwari Letter: पत्र का दूसरा पेज
जल, जंगल और जमीन के अधिकार का मुद्दा
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि आदिवासी समाज का अस्तित्व जल, जंगल और जमीन से जुड़ा हुआ है. उन्होंने आरोप लगाया कि वनाधिकार कानून के प्रभावी क्रियान्वयन, सामुदायिक वन अधिकारों की मान्यता और विस्थापन से जुड़े मामलों में अभी भी कई चुनौतियां बनी हुई हैं. विकास परियोजनाओं की कीमत आदिवासी समाज को अपनी भूमि और सांस्कृतिक पहचान खोकर चुकानी पड़ रही है.
राष्ट्रपति से कीं 10 प्रमुख मांगें
पत्र में राष्ट्रपति से आदिवासी क्षेत्रों के लिए विशेष शिक्षा और स्वास्थ्य योजना, रिक्त पदों पर भर्ती, वनाधिकार कानून का प्रभावी क्रियान्वयन, आदिवासी युवाओं के लिए रोजगार मिशन, महिलाओं की सुरक्षा, टीएसपी फंड के पारदर्शी उपयोग और आदिवासी समाज की सामाजिक-आर्थिक स्थिति की उच्चस्तरीय समीक्षा जैसी मांगों पर पहल करने का आग्रह किया गया है.
राष्ट्रपति से संवाद की अपील
जीतू पटवारी ने राष्ट्रपति से आग्रह किया है कि वे अपने मध्यप्रदेश प्रवास के दौरान आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों से संवाद करें तथा राज्य सरकार को आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देशित करें. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज केवल आश्वासन नहीं, बल्कि अधिकार, अवसर और विकास में वास्तविक भागीदारी चाहता है.
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