जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान इंस्टाग्राम रील्स की वायरल रीच ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सोशल मीडिया आज की सियासत के लिए एक बड़ा मैदान बन चुका है. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपने नेताओं को इंस्टाग्राम पर रील्स बनाने और 'जेन-जी' से जुड़ने की सलाह दे चुके हैं. लेकिन मध्यप्रदेश के कई मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड देखें तो ऐसा लगता है कि पीएम की इस डिजिटल सलाह पर खरा उतरने में उन्हें अभी कुछ वक्त लगेगा. राज्य के कई जन प्रतिनिधियों की टाइमलाइन आज भी पुराने दौर की तरह केवल भाषणों, स्वागत-सत्कार और सरकारी बैठकों की फोटो से अटी पड़ी है, जिससे सवाल उठ रहा है कि क्या वे नई पीढ़ी की भाषा में उनसे संवाद कर भी पा रहे हैं या नहीं?
पीएम मोदी की 'रील' वाली सलाह के बाद भी पुराने ढर्रे पर मंत्री!
यह पूरा मामला इसलिए भी बेहद अहम हो जाता है क्योंकि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने मंत्रियों और पार्टी नेताओं को लगातार सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने और इंस्टाग्राम पर रील्स के जरिए युवाओं से जुड़ने की सलाह दे चुके हैं. पीएम मोदी ने साफ कहा था कि आज का युवा लंबी-चौड़ी बातों के बजाय छोटे वीडियो (Reels) और विजुअल कंटेंट के जरिए संदेशों को जल्दी समझता है. लेकिन, मध्य प्रदेश के कई मंत्रियों का सोशल मीडिया हैंडल देखकर ऐसा लगता है कि पीएम की इस 'डिजिटल सलाह' का उन पर कोई खास असर नहीं हुआ है. वे आज भी पारंपरिक भाषणों, फीता काटने और सरकारी कार्यक्रमों की फोटो अपलोड करने तक ही सीमित हैं.

सीएम के 20 लाख फॉलोअर्स ,कई मंत्रियों का खाता 'हजारों' में अटका
मध्यप्रदेश के दिग्गजों की डिजिटल मौजूदगी के आंकड़ों पर नजर डालें तो वहां बड़ा विरोधाभास दिखाई देता है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 20 लाख (2 Million) से अधिक फॉलोअर्स और करीब 10.9 हजार पोस्ट के साथ डिजिटल स्पेस में काफी मजबूत स्थिति में हैं. वहीं, वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी 7.44 लाख फॉलोअर्स के साथ अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं. उप-मुख्यमंत्रियों में राजेंद्र शुक्ला के 1.55 लाख फॉलोअर्स हैं, तो जगदीश देवड़ा के खाते में 26.9 हजार फॉलोअर्स दर्ज हैं. लेकिन इस तस्वीर का दूसरा पहलू यह है कि राज्य सरकार के कई कैबिनेट और राज्य मंत्रियों की मौजूदगी हजारों में सिमटी हुई है. PHE मंत्री राधा सिंह के 3,144 पोस्ट के बावजूद सिर्फ 3,112 फॉलोअर्स हैं. वहीं जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह (4,316 फॉलोअर्स), सामाजिक न्याय मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा (9,477 फॉलोअर्स) और कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्य मंत्री दिलीप जायसवाल (7,355 फॉलोअर्स) जैसे नाम भी फॉलोअर्स के मामले में काफी पीछे नजर आते हैं.

हजारों पोस्ट के बावजूद फॉलोअर्स का इंतजार!
इस पूरे डिजिटल ट्रेंड में सबसे महत्वपूर्ण बात केवल फॉलोअर्स की संख्या नहीं, बल्कि पोस्ट किया जाने वाला 'कंटेन्ट' (Content) है. अधिकांश मंत्रियों के इंस्टाग्राम पेज को देखें तो पता चलता है कि हजारों की संख्या में पोस्ट अपलोड होने के बाद भी उनका जुड़ाव काफी सीमित है. इसका मुख्य कारण यह है कि अधिकांश पेजों पर पारंपरिक स्वागत-सत्कार, माल्यार्पण और बैठकों की औपचारिक तस्वीरें ही ज्यादा दिखाई देती हैं. जिस दौर में युवाओं की उंगलियां हर कुछ सेकंड में स्क्रीन बदलकर नया और आकर्षक कंटेंट तलाशती हैं, वहां पारंपरिक और नीरस पोस्ट युवाओं को रोकने में नाकाम साबित हो रही हैं.
कांग्रेस बोली- युवाओं को रील्स नहीं रोजगार चाहिए
राजनीतिक हलकों में भी इस डिजिटल बदलाव को लेकर अपनी-अपनी राय है. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का मानना है कि पार्टी हर संभव मंच और तकनीक के माध्यम से जनता और युवाओं के साथ पारदर्शी संवाद स्थापित करने में विश्वास रखती है, और इसके लिए सोशल मीडिया का बेहतर इस्तेमाल किया जा रहा है.
अब स्क्रॉल से आगे टिकने की चुनौती
दूसरे शब्दों में कहें तो सियासत का दायरा अब मंच और माइक से निकलकर सीधे जनता के हाथ में मौजूद स्मार्टफोन की स्क्रीन तक पहुंच गया है. इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सिर्फ अकाउंट बना लेना या तस्वीरें अपलोड कर देना काफी नहीं है. असली चुनौती यह है कि हर स्क्रॉल के साथ दर्शक या युवा मतदाता यह तय करता है कि उसे उस पोस्ट पर रुकना है या आगे बढ़ जाना है. अब आने वाला समय ही बताएगा कि मध्यप्रदेश के नेता और मंत्री 'जेन-जी' की भाषा और उनकी प्राथमिकताओं के अनुसार खुद को ढाल पाते हैं, या फिर उनकी यह पूरी डिजिटल कवायद सिर्फ औपचारिक पोस्ट और आंकड़ों तक ही सिमटकर रह जाएगी.
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