Mobile Network Crisis: देश तेजी से डिजिटल इंडिया (Digital India Ground Reality) की ओर बढ़ रहा है. सरकारी योजनाओं से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, राशन वितरण और पंचायतों के कामकाज तक अधिकांश सेवाएं अब इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क पर निर्भर हो चुकी हैं. लेकिन मध्यप्रदेश के मैहर जिले के मुर्तिहाई, मनौरा और कंदवारी गांवों की तस्वीर इस डिजिटल बदलाव से बिल्कुल अलग नजर आती है. यहां मोबाइल नेटवर्क की समस्या इतनी गंभीर है कि लोगों को राशन लेने के लिए फिंगरप्रिंट सत्यापन कराने जंगल और पहाड़ियों पर चढ़ना पड़ता है. शिक्षक स्कूल पहुंचने के बावजूद ऑनलाइन अनुपस्थित दर्ज हो जाते हैं, पंचायत का काम मंदिर की पहाड़ी से संचालित होता है और आपात स्थिति में एंबुलेंस या पुलिस बुलाना भी चुनौती बन जाता है. वर्षों से मांग के बावजूद यहां नेटवर्क सुविधा अब तक नहीं पहुंच सकी है.
डिजिटल सेवाएं बढ़ीं, लेकिन नेटवर्क नहीं पहुंचा
देशभर में अधिकांश सरकारी व्यवस्थाएं ऑनलाइन हो चुकी हैं. राशन वितरण, छात्र उपस्थिति, आधार आधारित सेवाएं, पंचायत कार्य, सामाजिक सुरक्षा योजनाएं और प्रशासनिक प्रक्रियाएं इंटरनेट व मोबाइल नेटवर्क पर निर्भर हैं. इसके बावजूद मैहर जिले के मुर्तिहाई, मनौरा और कंदवारी गांव आज भी मोबाइल नेटवर्क से वंचित हैं. ग्रामीणों का कहना है कि दशकों से उन्हें नेटवर्क सुविधा का इंतजार है, लेकिन अब तक स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया. मुर्तिहाई गांव की आबादी करीब 5,400 है, जबकि यहां लगभग 2,500 मतदाता हैं. वहीं मनौरा गांव में करीब 150 मकान और लगभग 400 मतदाता हैं. इन सभी लोगों को नेटवर्क न होने के कारण रोजमर्रा की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

Mobile Network Crisis: इंटरनेट के लिए परेशान ग्रामीण
राशन के लिए भी करनी पड़ती है नेटवर्क की तलाश
सरकारी राशन वितरण व्यवस्था पूरी तरह डिजिटल हो चुकी है. हितग्राहियों को राशन प्राप्त करने के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन कराना पड़ता है. लेकिन इन गांवों में नेटवर्क न होने के कारण कई बार राशन वितरण प्रभावित हो जाता है. ग्रामीणों को नेटवर्क खोजने के लिए दूर-दूर तक भटकना पड़ता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि डिजिटल प्रणाली उनके लिए सुविधा से अधिक परेशानी का कारण बन गई है, क्योंकि तकनीकी व्यवस्था होने के बावजूद मूलभूत नेटवर्क उपलब्ध नहीं है.

Mobile Network Crisis: राशन के हितग्राही और शिक्षकों को भी होती है परेशानी
आपातकाल में भी नहीं लग पाता फोन
गांववासियों के अनुसार सबसे गंभीर समस्या आपातकालीन सेवाओं के दौरान सामने आती है. यदि किसी व्यक्ति की तबीयत अचानक बिगड़ जाए, दुर्घटना हो जाए या किसी अन्य आपदा की स्थिति पैदा हो जाए, तो एंबुलेंस, पुलिस या फायर ब्रिगेड को सूचना देना बेहद मुश्किल हो जाता है. ग्राम पंचायत के रोजगार सहायक संदीप सिंह बताते हैं कि गांव में किसी भी कंपनी का मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं है. यदि किसी को कॉल करनी हो तो जंगल के भीतर स्थित एक टीले या पहाड़ी पर चढ़ना पड़ता है. कई बार सहायता बुलाने के बाद भी लोगों को उसी स्थान पर खड़े होकर इंतजार करना पड़ता है.
स्कूल पहुंचने के बाद भी अनुपस्थित दर्ज हो जाते हैं शिक्षक
नेटवर्क की समस्या का असर शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ रहा है. मुर्तिहाई में चार प्राथमिक विद्यालय, एक माध्यमिक विद्यालय और एक हायर सेकेंडरी स्कूल संचालित हैं, जहां करीब 20 शिक्षक पदस्थ हैं. शिक्षक नियमित रूप से विद्यालय पहुंचते हैं, लेकिन ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती. कई बार नेटवर्क न होने के कारण मोबाइल एप में अटेंडेंस नहीं लगती और शिक्षक उपस्थित होने के बावजूद अनुपस्थित दर्ज हो जाते हैं. शिक्षक चंद्रशेखर बर्मन का कहना है कि दिनभर स्कूल में कार्य करने के बाद भी तकनीकी कारणों से उनकी उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती, जिससे वेतन और प्रशासनिक समस्याएं उत्पन्न होती हैं.

Mobile Network Crisis: यहां से चल रहा पंचायत का नेटवर्क
मंदिर की पहाड़ी से चल रही पंचायत
नेटवर्क संकट का असर ग्राम पंचायत के कामकाज पर भी साफ दिखाई देता है. मुर्तिहाई ग्राम पंचायत में पंचायत भवन मौजूद है, लेकिन डिजिटल कार्य वहां से नहीं हो पाते. पंचायत सचिव और रोजगार सहायक को ऑनलाइन कार्यों के लिए कई किलोमीटर दूर या शारदा मंदिर की पहाड़ी पर जाना पड़ता है, जहां किसी प्रकार नेटवर्क मिल पाता है. सरपंच रामबली वैस के अनुसार ग्राम पंचायत के लगभग सभी डिजिटल कार्यों के लिए कर्मचारियों को गांव छोड़कर दूसरे स्थानों पर जाना पड़ता है. इससे समय और संसाधनों दोनों की बर्बादी होती है.

Mobile Network Crisis: नेटवर्क की तलाश जारी
10 किलोमीटर दूर जाकर करना पड़ता है काम
रोजगार सहायक संदीप सिंह का कहना है कि वह वर्ष 2013 से यहां पदस्थ हैं और तब से स्थिति लगभग जस की तस बनी हुई है. उन्होंने बताया कि कई बार पंचायत संबंधी कार्यों के लिए 10 किलोमीटर दूर दूसरी ग्राम पंचायत मझटोलवा जाना पड़ता है, जहां मोबाइल नेटवर्क मिलता है. कई अवसरों पर देर रात तक कार्य करना पड़ता है और जंगल तथा पहाड़ी रास्तों से वापस लौटना जोखिम भरा होता है.
ग्रामीणों की बढ़ी परेशानी
स्थानीय निवासी सत्येंद्र सिंह के अनुसार नेटवर्क न होने से पूरे क्षेत्र के लोग प्रभावित हैं. उन्होंने बताया कि एंबुलेंस बुलाने, सड़क दुर्घटना की सूचना देने, पुलिस सहायता प्राप्त करने या फायर ब्रिगेड को कॉल करने जैसी बुनियादी सुविधाएं भी समय पर उपलब्ध नहीं हो पातीं. ग्रामीणों को साधारण फोन कॉल करने के लिए भी गांव से बाहर जाना पड़ता है. यह समस्या केवल एक मोहल्ले या एक गांव की नहीं, बल्कि पूरे पंचायत क्षेत्र की है.
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