श्योपुर: कूनो नेशनल पार्क के खुले जंगल में आजादी की रफ्तार भरने बाले चीतों को कूनो का जंगल छोटा पड़ने लगा है. शायद इसी वजह से रफ्तार के बादशाह कहे जाने वाले कूनो के चीते लगातार कूनो के जंगल की सीमा को लांघते हुए ग्रामीण इलाकों में पहुंच रहे हैं. एक बार फिर से कूनो नेशनल पार्क का एक चीता जंगल से निकल कर ग्रामीण इलाके में पहुंच गया है और खेतों के बीच डेरा डालकर घूम रहा है. वन विभाग ने ग्रामीणों को चीते से दूर रहने का अलर्ट जारी करते हुए लोगों से सतर्क रहने के साथ सावधानी बरतने की अपील की है.
कूनो से निकलकर इस बार चीता सोइकला इलाके में पहुंच गया है. चीता गुरुनावदा शंकरपुर गांव के खेतों की हरियाली के बीच डेरा डालकर घूम रहा है. चीता कभी बारिश के बीच गांव की सड़कों पर तो कभी धान के खेतों के बीच बड़े इत्मीनान से घूमते हुए दिख जाता है. चीते की वजह से ग्रामीणों मे डर और दहशत का माहौल है. साथ ही किसानों के लिए मुसीबत है.
खेतों की देखरेख में किसानों को हो रही समस्या
चीते के खेतों मे डेरा डाल कर बैठने से धान की फसल करने वाले किसान अपनी फसल की देखरेख नहीं कर पा रहे हैं. श्योपुर के ग्रामीण इलाकों के किसानों के खेतों में कभी नील गाय दिखा करती थी, आज वहां अफ्रीकी चीतों के दीदार बड़ी आसानी से हो रहे हैं. सोईकला और आस पास के इलाके में चीते की दस्तक के बाद वन विभाग ने ग्रामीणों को चीते से दूर रहने का अलर्ट जारी करते हुए लोगों से सतर्क रहने के साथ सावधानी बरतने की अपील की है.
लोगों में डर के साथ उत्साह, हर कदम पर टीम की नजर
उधर, ग्रामीण चीते को देखने के लिए भी उत्साहित हैं. कोई मोबाइल से फोटोज ले रहा है तो कोई वीडियो बना रहा है. जिस इलाके में चीता मौजूद है, उस इलाके की सीमा राजस्थान की सीमा जुड़ी है. इस वजह से चीता मॉनिटरिंग टीम लगातार चीते के बढ़ने वाले कदमों पर भी नजर बनाए हुए है. दरअसल, इससे पहले भी कुछ चीते कूनो के जंगल से निकलकर टाइगरों का घर कहे जाने बाले राजस्थान के सवाई माधोपुर इलाके की रंथमभौर टाइगर सफारी के जंगल इलाके के साथ बारां तक भी पहुंच चुके हैं, जिन्हें सुरक्षा कारणों के चलते ट्रेंकुलाइज करके वापस कूनो लाया जा चुका है.
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