- 15 जुलाई रात को संगठित गिरोह किले के पिछले सुरक्षा-विहीन रास्ते से घुसा था.
- जांच में पता चला कि 5 जुलाई को भी गिरोह ने तोप खिसकाने की कोशिश की थी, लेकिन नाकाम रहे.
- अब पुलिस को यह भी एंगल पता चला है कि तोप से पांचना डैम उड़ाने की है साजिश.
मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में स्थित ऐतिहासिक नरवर किले की ओपन कचहरी से 15 जुलाई की रात 400 साल पुरानी और लगभग 3.5 टन (3500 किलोग्राम) वजनी प्राचीन तोप चोरी होने के मामले ने अंतरराज्यीय तूल पकड़ लिया है. इस हाई-प्रोफाइल चोरी के तार अब राजस्थान के करौली जिले में हिंडौन सिटी क्षेत्र के तहत आने वाले गावड़ा मीणा (मीड़ा) गांव से जुड़ते नजर आ रहे हैं.
मध्य प्रदेश और राजस्थान पुलिस की संयुक्त टीम इस मामले में लगातार छापeमारी कर रही है और दो स्थानीय संदिग्धों (टिम्मू मीणा और अमन मीणा) को हिरासत में लेकर गहन पूछताछ की जा रही है.
क्या है पूरा घटनाक्रम?
ऐतिहासिक संदर्भों के अनुसार, राजा नल-दमयंती और बाद में कछवाहा राजपूतों व सिंधिया राजवंश से जुड़े नरवर किले के परिसर में 14 दुर्लभ तोपें प्रदर्शित थीं. 15 जुलाई की रात चोरों का एक संगठित गिरोह किले के पिछले पथरीले और सुरक्षा-विहीन रास्ते से घुसा. चोर बड़ी गाड़ियों और क्रेन/ट्रॉली की मदद से भारी-भरकम अष्टधातु व मिश्रित धातुओं से बनी तोप को नीचे उतारकर ले भागे.

राजस्थान के धौलपुर टोल के पास पिकअप में तोप ले जाते लोग.
जांच में सामने आया कि गिरोह ने इससे पहले 5 जुलाई को भी तोप खिसकाने का प्रयास किया था, लेकिन वजन अधिक होने के कारण वे पहली बार में नाकाम रहे थे.
राजस्थान के पांचना बांध से जुड़ा 'सनसनीखेज एंगल'
घटना की जांच के दौरान सुरक्षा एजेंसियों को कुछ ऐसे इनपुट मिले हैं, जिन्होंने पुलिस के होश उड़ा दिए हैं. राजस्थान के करौली-हिंडौन इलाके में स्थित पांचना बांध के पानी के बंटवारे को लेकर लंबे समय से स्थानीय स्तर पर खींचतान और संघर्ष का इतिहास रहा है. जांच के दौरान ऐसे दावे और इनपुट सामने आए हैं कि इस तोप की चोरी का मकसद अंतरराष्ट्रीय एंटीक स्मगलिंग के अलावा स्थानीय स्तर पर किसी बड़े मिट्टी के ढांचे यानी पांचना बांध को नुकसान पहुंचाने या उड़ाने की साजिश से भी जुड़ा हो सकता है.

मीणा गांव और पानी का संघर्ष
बताना जरूरी है कि विवाद की वजह (2006) आरक्षण आंदोलन के दौरान दोनों पक्षों में तनाव बढ़ा, जिसके चलते प्रशासन ने एहतियातन बांध की नहरों से पानी छोड़ना बंद कर दिया था.
क्या कह रहे दोनों पक्ष
मीणा समाज पक्ष, जो कमांड क्षेत्र में है, उसका कहना है कि नहरों से जुड़े 35 से अधिक गांव मीणा बहुल हैं. उनका तर्क है कि बांध का निर्माण उनकी खेती की सिंचाई के लिए हुआ था, इसलिए बंद नहरें तुरंत खोली जाएं.

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वहीं, गुर्जर समाज का पक्ष (डूब क्षेत्र) है कि बांध के आसपास और डूब क्षेत्र के लगभग 39 गांव गुर्जर बहुल हैं. उनका कहना है कि जब तक उनकी जमीनों के बदले लिफ्ट सिंचाई योजना और सही मुआवजा नहीं मिलता, तब तक पानी नीचे न छोड़ा जाए.
बांध को उड़ाने की साजिश
2006 से नहरें बंद रहने के कारण दर्जनों गांवों में सिंचाई का संकट बना हुआ है और यह मामला आज भी क्षेत्रीय राजनीति व सामाजिक खींचतान की बड़ी वजह है. यही माना जा रहा है कि इसी विवाद को हमेशा के लिए हल करने की कोशिश में मीणा समाज के लोग तोप से मिट्टी के पांचना बांध को उड़ा देने की साजिश रच रहे थे.
तोप की रेकी और क्षमता की जांच
इनपुट्स के मुताबिक, आरोपियों ने चोरी से पहले तोप के इतिहास, उसकी अष्टधातु की मजबूती और क्षमता को लेकर बाकायदा रेकी की थी. पूर्व में भी इस क्षेत्र में किसी पुरानी तोप से विस्फोट के नाकाम प्रयास की बातें कही जा रही हैं, जिसके बाद मजबूत अष्टधातु वाली इस ऐतिहासिक तोप को निशाना बनाया गया.
संयुक्त सर्च ऑपरेशन
मध्य प्रदेश पुलिस की टीम करौली पुलिस के साथ मिलकर गावड़ा मीणा गांव में डेरा डाले हुए हैं. तोप को जमीन में गाड़कर छिपाए जाने की आशंका के चलते जेसीबी (JCB) और मेटल डिटेक्टर्स की मदद से आधा दर्जन संदिग्ध स्थानों पर खुदाई की जा रही है.
दो संदिग्ध हिरासत में
पुलिस ने दो संदिग्ध युवकों को हिरासत में लिया है. पुलिस का मानना है कि इस अंतरराज्यीय गिरोह में 20 से 30 लोग शामिल हो सकते हैं.
10 हजार का इनाम घोषित
शिवपुरी के SP कार्यालय ने आरोपियों पर 10,000 रुपये का इनाम घोषित किया है. अधिकारियों का कहना है कि वे 'एंटीक तस्कर गिरोह' और 'बांध उड़ाने की साजिश' दोनों ही एंगलों पर गहराई से जांच कर रहे हैं.
जांच अधिकारी करेरा के एसडीओपी प्रशांत शर्मा ने बताया कि ऐतिहासिक तोप चोरी के मामले में हमें कई महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं. हमने कुछ आरोपियों को पूछताछ के लिए डिटेन किया है. हम पूरी तहकीकात के बाद जल्दी ही किसी नतीजे पर पहुंचेंगे. तोप को हासिल करने के प्रयास किया जा रहे हैं.
ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा पर उठे सवाल
नरवर किले से तोप गायब होने की यह पहली घटना नहीं है करीब दो दशक पहले भी यहां से एक प्राचीन तोप चोरी हुई थी, जिसका आज तक पता नहीं चल सका. 3.5 टन वजनी तोप को सुरक्षा घेरा तोड़कर ले जाना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है,
फिलहाल, मध्य प्रदेश और राजस्थान पुलिस का संयुक्त दल तोप की बरामदगी और इस पूरी साजिश के मास्टरमाइंड का पर्दाफाश करने के बेहद करीब है.
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