मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी हुई पदोन्नति सूची में एक बड़ी और अजीबोगरीब प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है. पुलिस मुख्यालय, भोपाल ने लंबे समय से इंतज़ार कर रहे 2035 सहायक उपनिरीक्षकों (ASI) और कार्यवाहक उपनिरीक्षकों को उपनिरीक्षक (SI) के पद पर प्रमोट तो कर दिया, लेकिन इस सूची में उन पुलिस अधिकारियों के नाम भी शामिल कर दिए जिनका महीनों पहले निधन हो चुका है. आठ महीने पहले दुनिया से अलविदा कह चुके अधिकारियों को कागजों में प्रमोशन दिए जाने से पुलिस मुख्यालय के वेरिफिकेशन और रिकॉर्ड सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
निधन के 8 महीने बाद भी लिस्ट में आया नाम
यह अजीब मामला आगर मालवा और पन्ना जिले से सामने आया है. 20 जुलाई 2026 को जारी हुई पदोन्नति सूची में 798वें नंबर पर जुगल किशोर सोनी का नाम दर्ज है, जिन्हें आगर मालवा में पदस्थ बताया गया है. जबकि सच्चाई यह है कि बीमारी के कारण 6 दिसंबर 2025 को ही उनका निधन हो चुका था. इसी तरह लिस्ट में 1115वें नंबर पर राकेश सिंह बघेल का नाम शामिल है, जिन्हें पन्ना जिले में तैनात दर्शाया गया है, जबकि उनका भी साल 2025 में ही कार्डियक अरेस्ट से निधन हो चुका था. दो-दो दिवंगत अधिकारियों के नाम प्रमोटेड लिस्ट में देखकर पुलिस महकमे के कर्मचारी खुद हैरान हैं.

मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी हुई पदोन्नति सूची में ASI जुगल किशोर का भी नाम है जिनका निधन 8 महीने पहले ही हो चुका है.
दावों की खुली पोल, वेरिफिकेशन सिस्टम पर उठे सवाल
पुलिस मुख्यालय का दावा रहता है कि प्रमोशन का कोई भी आदेश जारी करने से पहले जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर तक सेवा रिकॉर्ड, दस्तावेजों की जांच और वेरिफिकेशन किया जाता है. सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशों और एमपी लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 के तहत यह पूरी कवायद की गई थी. लेकिन सवाल ये है कि जब दिवंगत अधिकारियों का रिकॉर्ड ही अपडेट नहीं था, तो सत्यापन किस बात का किया गया? जानकारों का कहना है कि यह गलती बताती है कि जमीनी स्तर से आने वाले डेटा और पुलिस मुख्यालय के कागजों में तालमेल का अभाव है.
चूक की सूचना मुख्यालय को दी गई: एसपी
उधर आगर मालवा एसपी दिलीप कुमार सोनी ने NDTV को फोन पर बताया कि स्थानीय कार्यालय द्वारा कार्यवाहक उपनिरीक्षक जुगल किशोर सोनी की मृत्य के तत्काल बाद विभाग के संबंधित कार्यालय को अवगत कराया गया था. एसपी के मुताबिक ये पूरी प्रक्रिया मुख्यालय के द्वारा ही संचालित होती है. अब चूक हुई है उसकी सूचना फिर से पुलिस मुख्यालय को दे दी गई है. वर्तमान स्थिति से अवगत कराने के लिए पत्राचार किया जा रहा है.
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खुशी के माहौल के बीच उजागर हुई सिस्टम की नाकामी
कई सालों के लंबे इंतजार के बाद जब पदोन्नति का आदेश आया, तो हजारों पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई. लेकिन 8 महीने पहले गुजर चुके साथियों का नाम सूची में देखकर पूरी प्रक्रिया की सतर्कता पर सवाल खड़े हो रहे हैं. अब देखना यह होगा कि इस बड़ी प्रशासनिक चूक के बाद पुलिस मुख्यालय अपनी गलती सुधारते हुए कोई नया संशोधित आदेश निकालता है या फिर इस लापरवाही के जिम्मेदार अफसरों पर कोई कार्रवाई की जाती है.
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