मध्यप्रदेश के ग्रामीण इलाकों में चरमराती स्वास्थ्य सेवाएं हर गुजरते दिन के साथ गंभीर सवाल खड़ी कर रही हैं. बुधवार को मंडला से एक झकझोरने वाली खबर आई, जहां समय पर 108 एंबुलेंस न मिलने के कारण एक महिला ने ऑटो में ही चार बच्चों को जन्म दे दिया, लेकिन अफसोस कि किसी भी नवजात को बचाया नहीं जा सका.अब शिवपुरी से भी ऐसी ही लापरवाही सामने आई है. यहां 108 एंबुलेंस नहीं मिलने पर एक जनजातीय गर्भवती महिला को मजबूरी में बाइक से अस्पताल निकलना पड़ा. प्रसव पीड़ा बढ़ने के कारण भारी बारिश के बीच उसने सड़क किनारे ही बच्चे को जन्म दे दिया. हालांकि, इस बार राहत की बात यह रही कि बैराड़ तहसीलदार ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए जच्चा-बच्चा को अपनी सरकारी गाड़ी से अस्पताल पहुंचाया, जिससे दोनों की जान बच सकी.
सिस्टम फेल: भारी बारिश के बीच बाइक का सहारा
जानकारी के अनुसार, राजपुरा के टपरा निवासी संजू आदिवासी को बुधवार शाम अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हुई. परिजनों ने तुरंत 108 जननी एक्सप्रेस और एम्बुलेंस को फोन किया, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी कोई वाहन मौके पर नहीं पहुंचा. मजबूरी में परिजन दर्द से तड़पती गर्भवती को भारी बारिश के बीच ही मोटरसाइकिल पर बिठाकर बैराड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) के लिए रवाना हो गए.

शिवपुरी में आदिवासी महिला ने एंबुलेंस न मिलने पर सड़क पर ही बच्चे को जन्म दिया. सूचना मिलने पर तहसीलदार मौके पर पहुंचे और अपनी सरकारी गाड़ी से जच्चा-बच्चा को अस्पताल पहुंचाया. जिससे दोनों की जान बच सकी.
सड़क पर बच्चे का जन्म, राहगीर की सूचना पर पहुंचे तहसीलदार
अभी बाइक गोन्दोलीपुरा के पास ही पहुंची थी कि महिला की प्रसव पीड़ा असहनीय हो गई और बाइक को तुरंत सड़क किनारे रोकना पड़ा. कोई सुरक्षित जगह न होने के कारण महिला ने खुले आसमान और बारिश के बीच सड़क किनारे ही बच्चे को जन्म दिया. इस दौरान वहां से गुजर रहे बैराड़ निवासी धीरज ओझा ने जब यह स्थिति देखी, तो उन्होंने बिना वक्त गंवाए तत्काल बैराड़ तहसीलदार द्रगपाल सिंह बैस को फोन पर मामले की जानकारी दी.
ये भी पढ़ें: विज्ञान पर भारी पड़ा अंधविश्वास ! छत्तीसगढ़ के 'चावल वाले बाबा' ने नोएडा के डॉक्टर से ठगे 40 लाख रुपये
खुद अस्पताल लेकर पहुंचे तहसीलदार
सूचना मिलते ही तहसीलदार द्रगपाल सिंह बैस तुरंत मौके पर पहुंचे. उन्होंने दोबारा एम्बुलेंस का इंतजार कर समय गंवाने के बजाय, बिना किसी हिचकिचाहट के नवजात और प्रसूता को अपनी सरकारी गाड़ी में लिटाया. तहसीलदार खुद गाड़ी से उन्हें लेकर बैराड़ अस्पताल पहुंचे. उनकी इस त्वरित और प्रशासनिक सूझबूझ की वजह से दोनों को समय पर डॉक्टरी इलाज मिल सका. अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक, वर्तमान में जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह सुरक्षित हैं.उधर जब इस मामले पर NDTV ने शिवपुरी के CMHO संजय रिश्वेश्वर से सवाल किया तो उन्होंने बताया कि 108 एम्बुलेंस सर्विस एक सेंट्रलाइज्ड सर्विस सिस्टम के तहत भोपाल से ऑपरेट होती है. हमने मामले की जांच के आदेश दिए हैं जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
ये भी पढ़ें: MP के मंडला में ना एंबुलेंस मिली,ना डॉक्टर...महिला ने ऑटो में जन्मे 4 बच्चे, चारों की मौत
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं