- शिवपुरी मेडिकल कॉलेज में एंबुलेंस न मिलने का आरोप.
- हरिराम प्रजापति की ग्वालियर ले जाते समय मौत, बेटे ने शव के पास बैठकर रिकॉर्ड किया वीडियो.
- अस्पताल की लापरवाही की वजह से मौत का आरोप लगाया.
मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में एक अधेड़ की ग्वालियर ले जाते समय मौत हो गई. परिजनों का आरोप है कि शिवपुरी मेडिकल कॉलेज में एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं होने की वजह से हरिराम प्रजापति (50) को समय पर इलाज नहीं मिल सका, जिससे उसकी जान चली गई. पिता की मौत के बाद बेटे ने एक वीडियो भी जारी किया है, जिसमें वह शव के पास है. उसने डॉक्टर्स और स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं.
मामला, खनियाधाना तहसील के आहार बानपुर गांव का है. परिजनों का कहना है कि हरिराम प्रजापति की दोपहर में अचानक तबीयत खराब हुई थी. उनके पैरों में तेज दर्द था और मुंह भी नहीं खुल पा रहा था. हालत बिगड़ने पर परिजन उन्हें तुरंत खनियाधाना के सरकारी अस्पताल ले गए, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए शिवपुरी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया.
बेटे का आरोप- समय पर न इलाज मिला, डॉक्टर खेल रहे थे पब्जी
बेटे अरुण का आरोप है कि जब मेडिकल कॉलेज पहुंचे तो नर्सिंग स्टाफ ने कोई ध्यान नहीं दिया, जिससे उनकी हालत और बिगड़ती गई. जब स्थिति अधिक नाजुक हो गई तो उन्हें ग्वालियर रेफर करने को कह दिया. इस दौरान मेडिकल कॉलेज से न तो एंबुलेंस की व्यवस्था समय पर कराई गई और न ही इलाज उपलब्ध कराया. अरुण का कहना है कि पिता ने ग्वालियर पहुंचने से पहले ही रास्ते में दम तोड़ दिया.
उसने रोते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसमें अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगा रहा है. उसका कहना है कि डॉक्टर इलाज करने की बजाय पब्जी खेल रहे थे.
अस्पताल प्रशासन ने क्या कहा?
शिवपुरी मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने आरोपों पर डीन डॉ आशुतोष चौरसी ने सफाई देते हुए कहा कि मरीज को जब अस्पताल लाया गया था, तब उनकी हालत पहले से ही काफी चिंताजनक थी. ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों ने प्राथमिक स्तर पर जीवन रक्षक उपचार देने का प्रयास किया था, लेकिन स्थिति नियंत्रण से बाहर होने पर विशेषज्ञ देखभाल के लिए उन्हें ग्वालियर रेफर करना पड़ा.
स्वास्थ्य विभाग का भी आया बयान
मामले का वीडियो सामने आने और परिजनों के आरोपों के बाद जिला स्वास्थ्य विभाग ने संज्ञान लिया है. मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ संजय रिशेश्वर के अनुसार, मरीज के खनियाधाना अस्पताल से लेकर मेडिकल कॉलेज तक के पूरे इलाज के घटनाक्रम की समीक्षा की जा रही है. अगर ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों या स्टाफ की तरफ से किसी भी तरह की लापरवाही पाई जाती है तो जांच के बाद नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी.
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