मध्य प्रदेश के दमोह जिला अस्पताल से एक बेहद हैरान करने वाला 'गुटखा घोटाला' सामने आया है. अस्पताल में मरीजों के परिजनों से पोछा लगवाने का विवाद अभी थमा भी नहीं था कि एनडीटीवी (NDTV) की पड़ताल में एक और बड़े फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हुआ है. यहां तंबाकू नियंत्रण और जुर्माने के नाम पर मरीजों के गरीब परिजनों से सालों से अवैध वसूली का खेल चल रहा था. इस खेल में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि हूबहू फर्जी सरकारी रसीद बुक (बंदी) छपवाकर प्राइवेट सुरक्षा गार्ड्स के जरिए पैसे वसूले जा रहे थे और यह सारा पैसा सरकारी खजाने में जाने के बजाय कहीं और जा रहा था. जब एनडीटीवी ने अस्पताल अधीक्षक से इस लूट का जवाब मांगा, तो वे कैमरे से भागते नजर आए. वहीं, सिविल सर्जन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं.बता दें कि 31 मार्च 2026 के बाद से अभी तक इस मद में कोई भी पैसा सरकारी खजाने में जमा नहीं हुआ है.

Damoh District Hospital: मरीजों के परिजनों को घेरकर गार्ड्स इस तरह से करते हैं वसूली
गरीब दादा को गार्ड्स ने घेरा, वसूले पैसे
इस अवैध वसूली का शिकार पड़ोसी जिले सागर से आए एक गरीब बुजुर्ग राजाराम रजक बने. राजाराम अपने मासूम नाती का इलाज कराने दमोह जिला अस्पताल आए थे. उनका कहना है कि उनकी जेब में गलती से गुटखा रह गया था. बस फिर क्या था, अस्पताल के आधा दर्जन सुरक्षा गार्ड्स ने उन्हें इस तरह घेर लिया. सीधे-साधे और डरे हुए ग्रामीण से जुर्माने के रूप में दो सौ रुपये की मांग की गई. जब राजाराम ने मिन्नतें करते हुए कहा कि उनकी जेब में कुल 100 रुपये ही बचे हैं, तो गार्ड्स ने उनके वो 100 रुपये भी ले लिए और उन्हें एक रसीद थमा दी.
सरकारी रसीद के नाम पर बड़ा खेल
जब बुजुर्ग ने अपनी आपबीती एनडीटीवी की टीम को बताई और कैमरा ऑन हुआ, तो गरीबों से वसूली करने वाले गार्ड्स एक-एक कर वहां से भाग खड़े हुए. जब पीड़ित को दी गई रसीद की बारीकी से जांच की गई, तो पता चला कि रसीद पर 'मध्य प्रदेश शासन' तो लिखा था, लेकिन उसकी छपाई और रख-रखाव बिल्कुल फर्जी था. मतलब साफ है कि इस रसीद के जरिए चल रही वसूली का एक भी रुपया आज तक सरकारी खजाने में जमा नहीं हुआ. यानी फर्जी रसीद छपवाकर सरकारी खजाने को चूना लगाया जा रहा था.
कैमरे के सामने भागे अधीक्षक, अब होगी मामले की जांच
इस घोटाले को लेकर जब एनडीटीवी ने अस्पताल के अधीक्षक सुरेंद्र सिंह से सवाल पूछने चाहे, तो वे कैमरे के सामने बात करने से बचते रहे और भाग खड़े हुए. हालांकि, अस्पताल के तंबाकू नियंत्रण नोडल ऑफिसर पुष्पेंद्र सिंह और सिविल सर्जन डॉक्टर प्रहलाद पटेल ने इस लूट को बेहद गंभीर माना है. सिविल सर्जन ने एनडीटीवी को भरोसा दिलाया है कि इस पूरे मामले की गहराई से जांच के लिए एक टीम बना दी गई है और फर्जीवाड़ा करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा.उन्होंने ये भी बताया कि 31 मार्च 2026 से अब तक इस मद में कोई भी पैसा सरकारी खजाने में जमा नहीं हुआ है. इसकी जांच के लिए कमेटी का गठन कर दिया गया है. उन्होंने फर्जी पर्ची के बारे में जांच करने की बात कही है.
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