मध्य प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों के लिए लंबे इंतजार के बाद राहत भरी खबर सामने आई है. करीब 10 साल से अटकी पदोन्नति (प्रमोशन) प्रक्रिया अब फिर से शुरू होने जा रही है. सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने सभी विभागों, विभागाध्यक्षों और जिला कलेक्टरों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए हैं. महाधिवक्ता की कानूनी राय मिलने के बाद राज्य सरकार ने यह कदम उठाया है.
10 साल बाद शुरू होगी प्रमोशन प्रक्रिया
राज्य में पदोन्नति का मामला लंबे समय से विभिन्न कानूनी और प्रशासनिक कारणों से अटका हुआ था. अब सरकार ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे पदोन्नति प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाएं. इसके साथ ही विभागीय स्तर पर तैयारियां भी शुरू होने की संभावना है.
सामान्य प्रशासन विभाग ने अपर मुख्य सचिव (ACS), विभागाध्यक्षों, सभी विभागों और कलेक्टरों को पत्र जारी कर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है. सरकार चाहती है कि लंबे समय से लंबित पदोन्नति मामलों का जल्द निपटारा हो, ताकि प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूती मिल सके.
महाधिवक्ता की कानूनी राय के बाद फैसला
सरकार ने यह निर्णय महाधिवक्ता की कानूनी राय मिलने के बाद लिया है. कानूनी स्थिति स्पष्ट होने के बाद पदोन्नति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता खुल गया है. इसी आधार पर विभागों को आगे की कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए हैं.
हाईकोर्ट ने नहीं लगाया कोई स्थगन आदेश
सरकार का कहना है कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रमोशन नियम-2025 पर कोई रोक नहीं लगाई है. यही वजह है कि विभागीय पदोन्नति समितियों (DPC) की बैठकें आयोजित करने में अब कोई बाधा नहीं है. विभाग अपने-अपने स्तर पर पात्र कर्मचारियों के मामलों पर विचार कर सकेंगे.
डीपीसी की बैठकें अब हो सकेंगी
निर्देश जारी होने के बाद विभागीय पदोन्नति समितियां बैठकें आयोजित कर सकेंगी. इन बैठकों में कर्मचारियों की वरिष्ठता, पात्रता और अन्य नियमों के आधार पर पदोन्नति के प्रस्तावों पर निर्णय लिया जाएगा. इससे लंबे समय से रुकी हुई प्रशासनिक प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है.
अदालत के अंतिम फैसले के अधीन रहेंगे प्रमोशन
सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी पदोन्नतियां हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों के अंतिम फैसले के अधीन रहेंगी. यदि भविष्य में अदालत का कोई अलग निर्णय आता है, तो उसी के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी. यानी प्रमोशन प्रक्रिया शुरू होगी, लेकिन उस पर न्यायालय के अंतिम निर्णय का प्रभाव बना रहेगा.
कई विभागों में खाली पड़े हैं उच्च पद
सरकार का तर्क है कि लंबे समय से प्रमोशन नहीं होने के कारण कई विभागों में बड़ी संख्या में वरिष्ठ पद खाली पड़े हैं. इससे प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है और जिम्मेदार पदों पर अधिकारियों की कमी महसूस की जा रही है.
अधिकारियों के अनुसार, कुछ विभाग अपनी स्वीकृत क्षमता के लगभग 40 प्रतिशत स्तर पर ही काम कर रहे हैं. वरिष्ठ पद खाली रहने से न सिर्फ रोजमर्रा के प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि नई भर्ती प्रक्रियाओं पर भी असर पड़ रहा है. सरकार का मानना है कि पदोन्नति प्रक्रिया शुरू होने से इस समस्या में काफी हद तक सुधार आएगा.
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