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मैहर कुआं हादसा: 3 युवकों की मौत के बाद मीथेन गैस का दावा, ग्रामीणों ने बकरी उतारकर किया परीक्षण

मैहर जिले के खरमसेड़ा गांव में कुएं में उतरे 3 युवकों की मौत के बाद वैज्ञानिकों ने मीथेन गैस और ऑक्सीजन की कमी को संभावित कारण बताया है. रिपोर्ट पर संदेह जताते हुए ग्रामीणों ने बकरी को कुएं में उतारकर परीक्षण भी किया.

मैहर कुआं हादसा: 3 युवकों की मौत के बाद मीथेन गैस का दावा, ग्रामीणों ने बकरी उतारकर किया परीक्षण
मैहर कुआं हादसा: मीथेन गैस से हुई 3 युवकों की मौत; ग्रामीणों ने बकरी उतारकर किया परीक्षण

मैहर जिले के अमरपाटन क्षेत्र के खरमसेड़ा गांव में कुएं में उतरे तीन युवकों की दर्दनाक मौत के बाद हादसे को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं. वैज्ञानिकों की प्रारंभिक जांच में कुएं के भीतर मीथेन जैसी जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी को मौत का संभावित कारण बताया गया है. हालांकि गांव के कई लोग इस निष्कर्ष से सहमत नहीं हैं. इसी संदेह के चलते ग्रामीणों ने अपने स्तर पर एक अनोखा परीक्षण किया और रस्सी के सहारे एक बकरी को कुएं में उतार दिया. इस घटना ने पूरे क्षेत्र का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. प्रशासन ने लोगों से अफवाहों से बचने और वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट का इंतजार करने की अपील की है.

बैल को बचाने उतरे थे युवक, चली गई जान

खरमसेड़ा गांव में शुक्रवार शाम हादसा उस समय हुआ जब एक बैल कुएं में गिर गया था. जानकारी के अनुसार बैल को बाहर निकालने के लिए सबसे पहले एक युवक कुएं में उतरा. जब वह काफी देर तक बाहर नहीं आया तो उसे बचाने के लिए दो अन्य युवक भी नीचे चले गए. कुछ ही समय बाद तीनों अचेत हो गए. ग्रामीणों ने उन्हें बाहर निकालने का प्रयास किया, लेकिन तब तक तीनों की मौत हो चुकी थी. घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है.

Maihar Well Tragedy: मैहर के इसी स्थान पर हुआ था हादसा

Maihar Well Tragedy: मैहर के इसी स्थान पर हुआ था हादसा

वैज्ञानिकों की जांच में मिला अहम सुराग

हादसे के बाद मौके पर पहुंची विशेषज्ञों और प्रदूषण नियंत्रण विभाग की टीम ने कुएं का परीक्षण किया. क्षेत्रीय अधिकारी गणेश कुमार बैगा के अनुसार जांच के दौरान कुएं के भीतर मीथेन गैस का स्तर 12,900 PPM से अधिक पाया गया. वहीं ऑक्सीजन का स्तर मात्र 12 से 13 प्रतिशत दर्ज किया गया.
विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य वातावरण में ऑक्सीजन का स्तर लगभग 21 प्रतिशत होता है. ऐसे में ऑक्सीजन की भारी कमी और गैस की मौजूदगी इंसानों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है.

मीथेन गैस को मौत का कारण मान रहे विशेषज्ञ

साइंटिस्ट गणेश कुमार बैगा का मानना है कि लंबे समय से बंद या कम उपयोग वाले गहरे कुओं में जैविक पदार्थों के सड़ने से मीथेन जैसी गैसें जमा हो सकती हैं. जब इस तरह की गैसों का स्तर बढ़ जाता है तो वे ऑक्सीजन को विस्थापित कर देती हैं. ऐसी स्थिति में अंदर जाने वाले व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई होती है और कुछ ही समय में वह बेहोश हो सकता है. वैज्ञानिक टीम फिलहाल इसी संभावना को हादसे का प्रमुख कारण मान रही है.

Maihar Well Tragedy: गांव के लोग अपना परीक्षण करते हुए

Maihar Well Tragedy: गांव के लोग अपना परीक्षण करते हुए

ग्रामीणों ने किया अपना परीक्षण

वैज्ञानिकों के दावे के बावजूद गांव के कुछ लोग अभी भी पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं. इसी संदेह को दूर करने के लिए कुछ ग्रामीणों ने लकड़ी का एक अस्थायी मचान तैयार किया और रस्सी से बांधकर एक बकरी को कुएं में उतार दिया. ग्रामीण यह देखना चाहते थे कि यदि कुएं में जहरीली गैस मौजूद है तो उसका असर बकरी पर भी दिखाई देगा या नहीं. हालांकि कुछ देर बाद बकरी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचा.

प्रशासन ने जोखिम भरे प्रयोगों से किया मना

ग्रामीणों द्वारा किए गए इस प्रयोग के बाद प्रशासन ने चिंता जताई है. अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के जोखिम भरे परीक्षण खुद न करें. प्रशासन का कहना है कि इस तरह के प्रयोगों से जान-माल का नुकसान हो सकता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि हादसे के वास्तविक कारणों की पुष्टि वैज्ञानिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर ही होगी.

पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हादसा

तीन युवकों की मौत के बाद गांव और आसपास के क्षेत्रों में तरह-तरह की चर्चाएं जारी हैं. कुछ लोग वैज्ञानिकों की रिपोर्ट को सही मान रहे हैं, जबकि कुछ लोग अन्य संभावनाओं पर भी सवाल उठा रहे हैं. इस बीच पुलिस, प्रशासन और विशेषज्ञ टीम लगातार साक्ष्य जुटाने में लगी हुई है.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

अधिकारियों का कहना है कि अंतिम निष्कर्ष पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विस्तृत वैज्ञानिक विश्लेषण के बाद ही निकाला जाएगा. तब तक लोगों से संयम बरतने, अफवाहों से दूर रहने और कुएं के आसपास अनावश्यक भीड़ नहीं लगाने की अपील की गई है.

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