भारत दुनिया का सबसे बड़ दूध उत्पादक देश है, जहां सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, कुल उत्पादन 248 मिलियन टन पहुंच चुका है. वहीं दूसरी ओर देश में घरेलू खपत और तरल दूध की मांग भी अनुमानित तौर पर 240 मिलियन टन के आसपास बनी हुई है. यानी दूध के उत्पादन का अधिकांश हिस्सा देश में दूध के रूप में ही खप जा रहा है. सवाल उठता है कि होटल, मिठाई, चाय-दुकान, फूड प्रोसेसिंग और डेयरी उत्पादों में इस्तेमाल होने वाला दूध कहां से आता है.
जवाब शीशे की तरह सामने है! आए दिन सामने आ रहीं मिलावटखोरी की घटनाएं साफ करती हैं कि देश में बड़े पैमाने में मिलावट का धंधा बदस्तूर जारी है. ये धंधा केवल नकली दूध ही नहीं, नकली पनीर, नकली घी और अन्य डेयरी प्रॉडक्ट्स का भी है. मांग और आपूर्ति के बीच के इसी भारी दबाव और अधिक मुनाफे की चाहत ने मिलावटखोरों के लिए रास्ते खोल दिए हैं, जिससे आम जनता की सेहत पर बड़ा संकट मंडरा रहा है. आइए जरा आंकड़ों के जरिये समझने की कोशिश करते हैं.
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देश में दूध का उत्पादन और खपत का गणित
1950 में 17 मिलियन टन था जो बढ़कर 2025 में 247 मिलियन टन से ज्यादा हो गया. 2024-25 में 247.87 मिलियन टन, यानी करीब 24.79 करोड़ टन रहा. यह 2023-24 के 239.30 मिलियन टन से 3.58% अधिक है. प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 485 ग्राम प्रतिदिन रही.
हालांकि कुल खपत के लिए सरकार हर साल उत्पादन जैसा एक अलग आंकड़ा जारी नहीं करती, लेकिन उपलब्ध आधिकारिक Household Consumption Expenditure Survey के अनुसार 2023-24 में औसतन दूध की मासिक खपत ग्रामीण क्षेत्रों में 5.085 लीटर प्रति व्यक्ति और शहरी क्षेत्रों में 5.686 लीटर प्रति व्यक्ति थी. यानी मोटे तौर पर रोजाना करीब 170-190 मिलीलीटर प्रति व्यक्ति घरेलू खपत. इसमें होटल, मिठाई, चाय-दुकान, फूड प्रोसेसिंग और डेयरी उत्पादों में इस्तेमाल होने वाला दूध अलग है.

5 राज्यों की देश के कुल दूध उत्पादन में 54% हिस्सेदारी
- उत्तर प्रदेश - 15.6%
- राजस्थान - 14.8%
- मध्य प्रदेश - 9.1%
- गुजरात - 7.7%
- महाराष्ट्र - 6.7%
किस राज्य में कितनी दूध की खपत
पंजाब, राजस्थान और हरियाणा में लोग सबसे ज्यादा दूध पीते हैं. पंजाब में हर दिन प्रति व्यक्ति औसत मिल्क कंजंप्शन 1245 ग्राम है, जबकि राजस्थान में यही आंकड़ा 1171 ग्राम है. हरियाणा में एक व्यक्ति रोजाना औसतन 1105 ग्राम दूथ पी जाता है.
राज्य- प्रति व्यक्ति रोजाना खपत (ग्राम में)
- पंजाब - 1245
- राजस्थान - 1171
- हरियाणा - 1105
- आंध्र प्रदेश - 719
- गुजरात - 700
- मध्य प्रदेश - 673
- हिमाचल प्रदेश - 640
- जम्मू-कश्मीर - 577
- कर्नाटक - 543
- उत्तर प्रदेश - 450
- उत्तराखंड - 446
- तेलंगाना - 419
- तमिलनाडु - 384
- महाराष्ट्र - 347
- सिक्किम - 321
भारत में पनीर का बाजार
सबसे बड़े उपभोक्ता देश भारत का बाजार 2023 में 570 अरब रुपये का था, जिसके 2030 तक बढ़कर 1,848 अरब रुपये (अनुमानित) हो जाने की उम्मीद है, यह सालाना 14% की दर से बढ़ रहा है.
बाजार में ज्यादा लालच के लिए कुछ निर्माता लागत कम करने के लिए मिलावट करते हैं. इस नकली पनीर का वजन बढ़ाने के लिए स्टार्च जैसी चीजें मिलाई जाती हैं. इसके अलावा नकली पनीर सिंथेटिक दूध, डिटर्जेंट, कॉस्टिक सोडा और फॉर्मलिन (जो शरीर को संरक्षित करने में इस्तेमाल होता है!) जैसी चीजें मिलाई जा रही हैं.
पिछले साल नोएडा और ग्रेटर नोएडा में 122 पनीर सैंपल की जांच हुई. इनमें 83% गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे. जबकि 40% सैंपल सीधे तौर पर असुरक्षित पाए गए. यानी ये पनीर तो खाने लायक भी नहीं है.
दक्षिण भारत के हालात तो और भी गंभीर हैं. कर्नाटक में 163 सैंपल लिए गए, सिर्फ 4 ही सुरक्षित पाए गए. लखनऊ में 103 सैंपल जांचे गए, 50% असुरक्षित निकले थे.
भारत में घी का बाजार
दुनियाभर में होने वाले कुल घी के उत्पादन में से 78 फीसदी तो सिर्फ भारत में ही बनाया जाता है. 2024 के आंकड़े के आकड़ें के अनुसार, भारत में घी का कुल कारोबार करीब 3.48 लाख करोड़ रुपये का है, जो साल 2033 तक 7.17 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है.
नकली घी
फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) का अनुमान है कि देश के कुल घी के कारोबार में करीब 15 से 20 फीसदी हिस्सा नकली घी का हो सकता है. अगर इसे पैसों में देखा जाए तो नकली घी का सालाना कारोबार 52 हजार करोड़ से लेकर 70 हजार करोड़ रुपये तक हो सकता है.
डेयरी प्रॉडक्ट्स एक्सपोर्ट भी करता है भारत
निर्यात के मोर्चे पर बात करें तो भारत के डेयरी उत्पादों के सबसे बड़े खरीदार मुख्य रूप से मध्य पूर्व और एशिया के देश हैं. संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और ओमान जैसे देशों में भारतीय घी की खास पहचान है.
इसके अलावा बांग्लादेश, नेपाल और भूटान जैसे पड़ोसी देशों में भारतीय दूध और मिल्क पाउडर की अच्छी खपत होती है. अमेरिका, सिंगापुर, मलेशिया, फिलीपींस, नाइजीरिया और मिस्र भी भारत से डेयरी उत्पाद आयात करने वाले अहम देश हैं.
आंकड़े साफ गवाही दे रहे हैं कि देश में दूध का जितना उत्पादन है, लेकिन घरेलू खपत और निर्यात की मांग इससे कहीं अधिक है. इसी कमी (गैप) को भरने के लिए मिलावटखोर सिंथेटिक दूध, नकली पनीर और मिलावटी घी का सहारा ले रहे हैं.
इनपुट: रिसर्च डेस्क, NDTV
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