- टीकमगढ़ के स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी ने अपने तबादले को रद्द कराने के लिए फर्जी दस्तावेज बनाए.
- उन्होंने राज्य मंत्री कृष्णा गौर के नाम का नकली लेटरहेड और फर्जी हस्ताक्षर तैयार कराए.
- 7 जुलाई को एक फर्जी पत्र जिला चिकित्सा अधिकारी को भेजकर तबादला निरस्त करने और पुनः पदस्थ करने के आदेश दिए.
मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में तबादला रुकवाने के लिए कथित तौर पर ऐसा फर्जीवाड़ा किया गया, जिसने प्रशासन को भी हैरान कर दिया. स्वास्थ्य विभाग के एक कर्मचारी पर आरोप है कि उसने राज्य मंत्री कृष्णा गौर के नाम से फर्जी लेटरहेड तैयार कराया, उस पर नकली हस्ताक्षर किए और अपना ट्रांसफर रद्द कराने के लिए आदेश तक जारी करवा दिया. मामला तब खुला जब यह पत्र कलेक्टर के पास पहुंचा और उसमें मिली गड़बड़ी ने पूरे खेल की पोल खोल दी.
सूर्य प्रकाश गोस्वामी की रिपोर्ट...
तबादला रुकवाने के लिए रची गई कथित साजिश
टीकमगढ़ जिले के गौर उप स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ एमपीडब्ल्यू (मल्टी परपज वर्कर) के.एल. बंशकार का हाल ही में नई तबादला नीति के तहत उप स्वास्थ्य केंद्र दरगुआ में स्थानांतरण किया था. आरोप है कि तबादला रुकवाने के लिए उन्होंने एक सुनियोजित तरीके से फर्जी दस्तावेज तैयार कराए और उसे अधिकारियों तक पहुंचाने की कोशिश की.
मंत्री के नाम से तैयार किया फर्जी पत्र
आरोपों के अनुसार, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर के नाम से हूबहू लेटरहेड तैयार किया. इतना ही नहीं, उस पर मंत्री के कथित फर्जी हस्ताक्षर भी किए. इसके बाद 7 जुलाई 2026 की तारीख वाला एक पत्र जिला चिकित्सा अधिकारी को भेजा, जिसमें के.एल. बंशकार का तबादला निरस्त कर उन्हें फिर से गौर उप स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ करने और आदेश का तत्काल पालन करने के निर्देश लिखे थे.
बताया जा रहा है कि यह पत्र स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न स्तरों से होकर गुजरता रहा, लेकिन किसी अधिकारी या तबादला शाखा के कर्मचारी को इसमें कोई संदेह नहीं हुआ. फर्जी पत्र काफी समय तक विभागीय प्रक्रिया में चलता रहा और उसकी सत्यता पर सवाल नहीं उठे.
कलेक्टर की नजर पड़ते ही खुली पोल
मामला उस समय सामने आया जब यह पत्र टीकमगढ़ कलेक्टर विवेक कुमार श्रोतीय के पास पहुंचा. कलेक्टर ने पत्र की जांच की और उसमें नाम संबंधी त्रुटि समेत कुछ अन्य संदिग्ध बातें नोटिस कीं. इसके बाद दस्तावेज की पड़ताल कराई, जिसमें पत्र के फर्जी होने की बात सामने आ गई. इसके साथ ही पूरे मामले का खुलासा हो गया.
कर्मचारी निलंबित, जांच के आदेश
प्राथमिक जांच में मामला गंभीर पाए जाने के बाद कलेक्टर ने के.एल. बंशकार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया. साथ ही पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कराने के निर्देश दिए हैं. प्रशासन यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि फर्जी लेटरहेड और हस्ताक्षर किसने तैयार किए और कहीं इसके पीछे कोई संगठित गिरोह तो काम नहीं कर रहा. इस घटना ने सरकारी दस्तावेजों की सुरक्षा और उनकी सत्यता जांचने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.
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