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घटिया खाना खिलाने से हुई छात्र की मौत, कई स्टूडेंट्स हुए थे बीमार; जबलपुर के आदिवासी हॉस्टल मामले में बड़ा खुलासा

मध्य प्रदेश के जबलपुर में आदिवासी छात्रावास में एक छात्र की मौत के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है. जांच में पाया गया कि छात्रों को लंबे समय तक घटिया और दूषित खाद्य सामग्री परोसी जा रही थी, जिससे कई छात्र बीमार पड़ गए और एक की मौत हो गई.

घटिया खाना खिलाने से हुई छात्र की मौत, कई स्टूडेंट्स हुए थे बीमार; जबलपुर के आदिवासी हॉस्टल मामले में बड़ा खुलासा
आकांक्षा उपाध्याय, डीएसपी ग्रामीण.

जबलपुर के आदिवासी बहुल क्षेत्र में पांच माह पहले आदिवासी छात्रावास में हुई एक छात्र की मौत के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है. जांच में सामने आया है कि छात्रावास में बच्चों को लंबे समय तक घटिया और दूषित खाद्य सामग्री परोसी जा रही थी. इसी लापरवाही के चलते कई छात्र बीमार पड़े, जिनमें एक छात्र की मौत हो गई. कुंडम थाना पुलिस ने आदिवासी छात्रावास के अधीक्षक के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है.

यह मामला कुंडम थाना क्षेत्र के हरदुली स्थित आदिवासी छात्रावास का है, जहां 21 अगस्त को 14 वर्षीय छात्र राजकुमार धुर्वे की मौत हुई थी. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और विसरा जांच में यह स्पष्ट हुआ कि छात्र की मौत किसी बीमारी से नहीं, बल्कि दूषित भोजन के सेवन के कारण हुई थी. रीजनल फॉरेंसिक साइंस लैब की रिपोर्ट ने इस तथ्य की पुष्टि की है.

खराब गुणवत्ता की सामग्री मंगवाई जाती

जांच में यह भी सामने आया है कि छात्रावास अधीक्षक गजेन्द्र झारिया स्वयं निम्न गुणवत्ता की खाद्य सामग्री मंगवाते थे और कर्मचारियों पर दबाव बनाकर वही भोजन छात्रों को परोसा जाता था. इसी भोजन को खाने के बाद एक ही दिन में 13 छात्रों की तबीयत बिगड़ गई थी. किसी को उल्टियां हुईं तो कोई बेहोश हो गया.

9वीं की पढ़ाई कर रहा था छात्र

मृतक छात्र राजकुमार धुर्वे, कुंडम के ग्राम बिलटुकरी निवासी छोटेलाल धुर्वे का पुत्र था और वह हरदुली छात्रावास में रहकर कक्षा-9 की पढ़ाई कर रहा था. 20 अगस्त को भोजन करने के बाद उसकी हालत गंभीर हो गई. हालत बिगड़ने पर 21 अगस्त को उसे जबलपुर रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई.

खाद्य विभाग ने लिए थे नमूने

घटना के बाद खाद्य विभाग की टीम ने छात्रावास से गेहूं, आटा, चावल और अरहर दाल के नमूने लिए थे. जांच में ये सभी खाद्य पदार्थ निम्न गुणवत्ता के पाए गए, जिसकी रिपोर्ट खाद्य विभाग ने पुलिस को सौंपी.

हॉस्टल में नहीं दिखता था अधीक्षक

पुलिस जांच में यह भी उजागर हुआ कि छात्रावास अधीक्षक नियमित रूप से छात्रावास में उपस्थित नहीं रहता था और न ही बच्चों की उचित देखरेख की जाती थी. मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 एवं 125(A) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है. धारा 105 लापरवाही से हुई मृत्यु से संबंधित है, जबकि धारा 125(A) मानव जीवन को खतरे में डालने वाली गंभीर लापरवाही से जुड़े अपराधों पर लागू होती है.

इस मामले पर जब आदिवासी जनजातीय मंत्री कुमार विजय शाह से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस विषय में कोई जानकारी नहीं है. जानकारी प्राप्त करने के बाद ही वे कुछ कह पाएंगे. फिलहाल पुलिस आरोपी हॉस्टल अधीक्षक की तलाश में जुटी है और मामले की विस्तृत जांच जारी है.

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