इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों और सैकड़ों लोगों के बीमार पड़ने के बाद अब शहर की पेयजल व्यवस्था पर मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और एनजीटी (NGT) के नए खुलासों ने हड़कंप मचा दिया है. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में पेश की गई ताजा जांच रिपोर्ट में बेहद चिंताजनक सच सामने आया है. इसके मुताबिक शहर के भूजल स्रोतों यानि जमीन के नीचे के पानी में मलमूत्र का खतरनाक बैक्टीरिया या प्रदूषण फैल चुका है. रिपोर्ट के मुताबिक हालात बेहद खराब है क्योंकि जांच के लिए ले जाए गए 52 भूजल नमूनों में से 50 में टोटल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया और 40 नमूनों में ई-कोलाई जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए हैं. जिसे स्वास्थ्य विभाग ने भी बीमारी फैलने का सबसे प्रमुख कारण माना है. हाईकोर्ट और एनजीटी की सख्त हिदायतों के बीच अब इंदौर नगर निगम को अपनी पूरी पेयजल प्रणाली में पारदर्शिता लाने और मोबाइल ऐप के जरिए घर-घर तक पानी की शुद्धता की रियल टाइम जानकारी पहुंचाने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं.
ग्राउंड वॉटर रिपोर्ट में मलजनित प्रदूषण का खुलासा
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की इस रिपोर्ट ने प्रशासनिक दावों की पोल खोलकर रख दी है. प्रभावित इलाकों में लोगों द्वारा पानी के स्वाद और गंध में बदलाव की लगातार शिकायतें दर्ज कराई जा रही थीं, जिस पर स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट ने भी मुहर लगा दी है. रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि घरेलू पेयजल ही इस घातक संक्रमण और बीमारी का मुख्य जरिया बना. भूजल में ई-कोलाई और कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की इतनी बड़ी मौजूदगी यह साबित करती है कि सीवरेज का गंदा पानी पीने के पानी के स्रोतों में मिल रहा है, जो सीधे तौर पर आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है.
ई-कोलाई और कोलीफॉर्म बैक्टीरिया का खतरा क्या है?
पानी में कोलीफॉर्म और ई-कोलाई (E. coli) बैक्टीरिया की मौजूदगी का सीधा मतलब है कि पीने के पानी में सीवर या शौचालय की गंदगी का रिसाव हो रहा है. हेल्थ एकस्पर्ट्स के मुताबिक ई-कोलाई युक्त दूषित पानी पीने से पेट में मरोड़, उल्टी, दस्त, डायरिया और आंतों में गंभीर संक्रमण हो सकता है. बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों के लिए यह संक्रमण जानलेवा भी साबित हो सकता है. यही वजह है कि जल स्रोतों में इन घातक बैक्टीरिया का पाया जाना किसी भी शहर के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है.
311 ऐप पर मिलेगी पानी की शुद्धता की रिपोर्ट
दूसरी तरफ इस भीषण त्रासदी और एनजीटी व हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद अब इंदौर नगर निगम को पेयजल सप्लाई की व्यवस्था में अमूलचूल बदलाव करने पड़ रहे हैं. शहरवासियों को अब एक विशेष मोबाइल ऐप पर यह सीधी जानकारी दी जाएगी कि उनके नल में आने वाला पानी पीने योग्य है या नहीं. इस ऐप पर न केवल पानी की गुणवत्ता की जांच रिपोर्ट दिखेगी, बल्कि ओवरहेड वाटर टंकियों की सफाई की पिछली और अगली संभावित तारीख भी दर्ज होगी. पूरी व्यवस्था को इंदौर 311 ऐप से जोड़ा जाएगा और 24×7 हेल्पलाइन के जरिए पेयजल से जुड़ी शिकायतों की रियल टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी.
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एनजीटी में 16 सितंबर को अगली सुनवाई
भागीरथपुरा जल त्रासदी और पानी में बैक्टीरिया मिलने के इस गंभीर मामले की फिलहाल हाईकोर्ट द्वारा गठित न्यायिक आयोग जांच कर रहा है. प्रशासनिक लापरवाही और गिरते स्वास्थ्य मानकों को देखते हुए एनजीटी ने भी अधिकारियों को सख्त लहजे में जवाबदेही तय करने को कहा है. मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर 2026 को तय की गई है. अब देखना यह होगा कि नगर निगम प्रशासन एनजीटी और कोर्ट की गाइडलाइंस का पालन करते हुए इस नई डिजिटल पारदर्शी व्यवस्था को कितनी जल्दी जमीन पर उतार पाता है, ताकि इंदौर को इस तरह की जानलेवा त्रासदी से दोबारा न जूझना पड़े.
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