एक मां के लिए अपने बच्चे को खोने का दर्द शब्दों में बयां करना आसान नहीं होता. इंदौर सेंट्रल जेल में भी ऐसा ही एक दर्दनाक मामला सामने आया था, जहां अपनी मां के साथ जेल में रह रहे महज 4 माह के मासूम नक्ष की मौत हो गई थी. करीब तीन साल तक चली जांच और सुनवाई के बाद मध्य प्रदेश मानव अधिकार आयोग ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए इसे लापरवाही से जुड़ा मामला तो माना. लेकिन मुआवजे के लिए सिर्फ एक लाख रुपये की राशि तय की. हालांकि आयोग ने जेलों में बच्चों की देखभाल और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए.
मानव अधिकार आयोग का फैसला
मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने इंदौर सेंट्रल जेल में हुई 4 माह के मासूम नक्ष की मौत के मामले में बड़ा निर्णय सुनाया है. आयोग ने माना कि मामले में हुई लापरवाही के कारण बच्चे की जान गई. इसी आधार पर आयोग ने राज्य शासन को मृतक बच्चे के परिजनों को एक लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि देने की अनुशंसा की है.
मां के साथ जेल में रह रहा था मासूम
जानकारी के अनुसार, महिला बंदी नेहा पति पप्पू उर्फ देवेंद्र अग्रवाल, इंदौर सेंट्रल जेल में निरुद्ध थी. उसका चार माह का बेटा नक्ष भी अपनी मां के साथ जेल परिसर में रह रहा था. 18 सितंबर 2023 को शाम करीब 7:10 बजे मासूम की मौत हो गई. इस घटना की जानकारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, इंदौर द्वारा मानव अधिकार आयोग को भेजी थी.
आयोग ने खुद लिया था संज्ञान
मामले की गंभीरता को देखते हुए मानव अधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लेकर प्रकरण दर्ज किया. इसके बाद जेल अधीक्षक से विस्तृत रिपोर्ट मांगी. आयोग ने दस्तावेजों, रिपोर्टों और संबंधित पक्षों से मिली जानकारी के आधार पर लगातार सुनवाई की. जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के बाद आयोग ने माना कि बच्चे की मौत लापरवाही के चलते हुई.
मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष डॉ. अवधेश प्रताप सिंह ने प्रकरण क्रमांक 7321/इंदौर/2023 में आदेश जारी करते हुए राज्य शासन को निर्देशित किया है कि मृतक मासूम नक्ष की मां के उत्तराधिकारियों को एक माह के भीतर एक लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि प्रदान की जाए.
जेल में बच्चों के लिए अलग व्यवस्था करने के निर्देश
आयोग ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि इंदौर केंद्रीय जेल में बच्चों के इलाज और देखभाल के लिए बेहतर व्यवस्थाएं बनाई जाएं. इसके लिए प्रशिक्षित स्टाफ और केयरटेकर के साथ बच्चों हेतु अलग कक्ष या विशेष स्थान की व्यवस्था करने की अनुशंसा की गई है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो.
डॉक्टरों के खाली पद भरने पर जोर
मानव अधिकार आयोग ने जेल प्रशासन की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर भी चिंता जताई है. आयोग ने केंद्रीय जेल, इंदौर में डॉक्टरों के रिक्त पदों को जल्द से जल्द भरने की अनुशंसा की. आयोग का मानना है कि पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं और विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध होने से बंदियों और उनके साथ रह रहे बच्चों को समय पर उपचार मिल सकेगा.
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