Temple Bonds Ujjain Mahakal Mandir: मध्य प्रदेश सरकार देश में पहली बार 200 करोड़ रुपये के टेंपल बॉन्ड जारी करने की तैयारी में है. मकसद है सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन और मालवा के 11 प्रमुख धार्मिक स्थलों का करीब 1100 करोड़ रुपये से कायाकल्प. सरकार का दावा है कि यह मॉडल धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाई देगा, श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं देगा और आम लोगों को आस्था के विकास में निवेश का मौका देगा. लेकिन इस प्रयोग पर अब सियासत और संत समाज दोनों में सवाल उठने लगे हैं. कांग्रेस पूछ रही है कि लाखों करोड़ के कर्ज में डूबी सरकार के पास अब मंदिरों के लिए भी पैसा नहीं है क्या. वहीं कुछ संत और हिंदू संगठन कह रहे हैं कि बाबा महाकाल उज्जैन के राजा हैं, और राजा प्रजा से कर्ज नहीं लेता.
पुण्य भी, मुनाफा भी
उज्जैन, बाबा महाकाल की नगरी. सिंहस्थ की भूमि और अब आस्था के साथ अर्थव्यवस्था का नया प्रयोग. मध्य प्रदेश सरकार धार्मिक पर्यटन और मंदिर इंफ्रास्ट्रक्चर को ग्लोबल स्टैंडर्ड पर ले जाने के लिए एक अनोखा वित्तीय मॉडल लाने की तैयारी में है. महाकाल लोक की सफलता के बाद अब सरकार का फोकस उज्जैन और मालवा क्षेत्र के 11 बड़े धार्मिक स्थलों पर है. सिंहस्थ 2028 में करोड़ों श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देखते हुए सरकार ने करीब 1100 करोड़ रुपये का मेगा प्लान तैयार किया है. इसी योजना के तहत पहली बार टेंपल बॉन्ड जारी कर बाजार से 200 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी है.
सरकार इसे सिर्फ फंड जुटाने का रास्ता नहीं, बल्कि भक्ति को विकास से जोड़ने की पहल बता रही है. दलील है कि इससे सरकारी खजाने पर पूरा बोझ नहीं पड़ेगा. आम जनता भी इस धार्मिक विकास यात्रा में भागीदार बन सकेगी. पैसा निवेश होगा, ब्याज मिलेगा और धार्मिक स्थलों का विस्तार भी होगा.
भक्ति, बॉन्ड बाजार और विवाद
लेकिन आस्था और बाजार के इस संगम पर विवाद भी शुरू हो गया है. संत समाज का सवाल है कि बॉन्ड आखिर होता क्या है. बॉन्ड यानी एक तरह का ऋण. तो क्या अब मंदिरों और धार्मिक सुविधाओं का विकास भी कर्ज लेकर होगा?
महाकाल लोक के बाद अब सरकार उज्जैन और पूरे मालवा के धार्मिक भूगोल को नया रूप देना चाहती है. योजना बड़ी है. पैसा बड़ा है. और मॉडल भी नया है.
सिंहस्थ 2028 से पहले धार्मिक विकास का मेगा प्लान
- कुल परियोजना लागत लगभग 1100 करोड़ रुपये
- टेंपल बॉन्ड्स से 200 करोड़ रुपये की फंडिंग
- अर्बन चैलेंज फंड से 275 करोड़ रुपये की फंडिंग
- बैंक फाइनेंस से 625 करोड़ रुपये की फंडिंग
विपक्ष का क्या कहना है?
विपक्ष का ऐतराज है, कांग्रेस विधायक दिनेश जैन का कहना है कि महाकाल केवल मंदिर नहीं, उज्जैन के राजा हैं. और राजा को प्रजा से उधार लेने की जरूरत नहीं होनी चाहिए.
अब आगे क्या?
टेंपल बॉन्ड का मॉडल कुछ वैसा ही होगा, जैसा हाईवे, मेट्रो या इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में बॉन्ड के जरिए पैसा जुटाया जाता है. यानी तय समय के लिए निवेश. उस पर तय ब्याज. और राशि का उपयोग परियोजना निर्माण में. फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार परियोजना सड़क या मेट्रो की नहीं, मंदिरों और धार्मिक स्थलों की है.
यह भी पढ़ें : Mahakal Mandir Puja: महाकाल की शरण में पहुंचे CM मोहन यादव और JP नड्डा; अन्न क्षेत्र में ग्रहण किया प्रसाद
यह भी पढ़ें : CSPDCL का IPO लाएगी सरकार; कृषक उन्नत योजना के नए चरण की मंजूरी, जानिए साय कैबिनेट अहम फैसले
यह भी पढ़ें : भोपाल मेट्रो को 3052 करोड़ मंजूर, किसानों को मंडी शुल्क में राहत; जानिए MP कैबिनेट के बड़े फैसले
यह भी पढ़ें : लहसुन के दामों में जबरदस्त उछाल; मंडी में रिकॉर्ड भाव, एक महीने में कीमतें दोगुनी, किसान-व्यापारियों ने ये कहा
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं