आमतौर पर भारत में जब कोई नई तकनीक आती है तो उसे घर-घर तक पहुंचने में दशकों नहीं तो साल तो लग ही जाते हैं. लेकिन UPI के साथ ऐसा नहीं हुआ. अगस्त 2016 में UPI को लॉन्च किया गया था और हर साल यह तेजी से आगे बढ़ता चला गया.
UPI के इतनी तेजी से आगे बढ़ने की दो बड़ी वजह थी. पहली तो ये कि ये पूरी तरह से फ्री था. इसमें कितना ही पेमेंट कर लो, कोई एक्स्ट्रा चार्ज नहीं लगता. जबकि, 'रूपे', 'मास्टरकार्ड' और 'वीजा' जैसे डेबिट या क्रेडिट कार्ड के जरिए पेमेंट पर कुछ चार्ज लगता है. इसे मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR कहा जाता है.
और दूसरी कि डेबिट और क्रेडिट कार्ड से पेमेंट की तरह इसमें कोई झंझट भी नहीं है. डेबिट कार्ड की तुलना में UPI से पेमेंट करना ज्यादा आसान, किफायती और कम झंझट वाला है.
अगस्त 2016 में जब UPI को लॉन्च किया गया था तो RBI के तत्कालीन गवर्नर रघुराम राजन ने कहा था कि यह भारत में बैंकिंग को पूरी तरह बदल देगा और कैश पर निर्भरता को कम कर देगा. हुआ भी ऐसा ही. आज के समय में हर तरह की पेमेंट के लिए UPI का ही इस्तेमाल होता है. डेबिट कार्ड आज के समय में सिर्फ ATM से कैश निकालने में ही इस्तेमाल होता है, जबकि हर छोटी-बड़ी चीज के लिए पेमेंट अब UPI से ही हो रही है.
UPI कैसे बना पेमेंट का किंग?
अप्रैल 2016 में UPI को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लॉन्च किया गया था. फिर अगस्त 2016 में इसे सबके लिए लॉन्च कर दिया गया. UPI का सारा काम नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) संभालती है.
UPI के लिए सबसे बड़ा गेमचेंजर साबित हुई नोटबंदी. नवंबर 2016 में जब नोटबंदी हुई और जेब में रखा 500 और 1000 का नोट किसी काम का नहीं रह गया तो UPI ने रफ्तार पकड़ी और आज ये हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया.
अब UPI का इस्तेमाल सिर्फ कोई सामान खरीदने के लिए ही नहीं होता, बल्कि किसी को उधार देना हो या किसी से उधार लेना हो, उसमें भी UPI का इस्तेमाल होता है. और तो और, बैंक अकाउंट में पैसा है या नहीं, अब ये भी UPI ऐप्स से ही चेक हो जाता है.
आज UPI का इस्तेमाल किस हद तक बढ़ गया है. इसे कुछ आंकड़ों से समझा जा सकता है. NPCI के डेटा के मुताबिक, UPI के जरिए सिर्फ 3 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ था. जबकि, जुलाई 2026 में इससे 29.87 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का लेन-देन हुआ. इस हिसाब से हर दिन औसतन 96,383 करोड़ रुपये का लेन-देन UPI से किया गया.
यह भी पढ़ेंः इंश्योरेंस नहीं तो पेट्रोल नहीं पर हो रहा विचार, लेकिन गाड़ी का बीमा नहीं ये कैसे पता लगाएगी सरकार? Explained

कहां और कैसे इस्तेमाल होता है UPI?
UPI के जरिए सबसे ज्यादा ट्रांजेक्शन आम लोगों के बीच होता है. केंद्र सरकार के मुताबिक, 2025-26 में UPI के जरिए जितने पैसों का लेन-देन हुआ, उसमें से 71% पैसा पर्सन-टू-पर्सन भेजा गया. हालांकि, वॉल्यूम के हिसाब से देखें तो पर्सन-टू-पर्सन सिर्फ 37% ही था, जबकि पर्सन-टू-मर्चेंट 63% था.
ऐसा इसलिए क्योंकि लोग UPI से दुकानदारों को छोटी-मोटी रकम ट्रांसफर करते हैं, जबकि लोगों को बड़ी रकम.
डेटा के मुताबिक, 2025-26 में 59% पर्सन-टू-पर्सन ट्रांजेक्शन 500 रुपये से कम के थे. जबकि, 21% ट्रांजेक्शन 500 से 1000 और 20% ट्रांजेक्शन 2000 रुपये से ज्यादा के थे. इसके उलट, पर्सन-टू-मर्चेंट ट्रांजेक्शन में 86% ऐसे थे, जिनमें 500 रुपये से कम की पेमेंट हुई थी. 10% में 500 से 1000 और सिर्फ 4% में ही पेमेंट 2000 रुपये से ज्यादा की थी.
यह भी पढ़ेंः UPI करने पर चार्ज लगा तो क्या असर होगा? दूध-सब्जी खरीदना भी महंगा हो जाएगा? FAQ
UPI ने कैसे खत्म किया कार्ड्स का दबदबा?
एक समय में डिजिटल पेमेंट सिस्टम में कार्ड्स का दबदबा हुआ करता था. लेकिन अब डेबिट कार्ड का इस्तेमाल सिर्फ ATM से कैश निकालने में होता है. आज डेबिट कार्ड के जरिए होने वाले हर 10 में से 8 ट्रांजेक्शन में सिर्फ ATM से पैसा ही निकाला जाता है.
RBI का डेटा बताता है कि जून 2026 में देश में डेबिट कार्ड के जरिए जितना ट्रांजेक्शन हुआ, उसमें से 80.4% में ATM से कैश निकाला गया. वहीं, दुकानों पर कार्ड स्वाइप करने का चलन सिमट कर सिर्फ 14.4% रह गया. जबकि, ऑनलाइन शॉपिंग के लिए सिर्फ 5.2% ट्रांजेक्शन ही डेबिट कार्ड के जरिए हो रहा है.
मई 2026 में आई RBI की 'पेमेंट सिस्टम रिपोर्ट' बताती है कि 5 साल में डेबिट कार्ड से होने वाले लेन-देन में भारी गिरावट आई है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में 85.5% पेमेंट अकेले सिर्फ UPI के जरिए हुई है, जबकि कार्ड्स का इस्तेमाल सिर्फ 2.6% पेमेंट्स में ही हुआ है. इसे 100 रुपये के उदाहरण से समझा जाए तो 85.5 रुपये का लेन-देन UPI से हुआ, जबकि कार्ड्स से सिर्फ 2.6 रुपये ही भेजे गए.

RBI की रिपोर्ट बताती है कि 2021 से 2025 तक डेबिट कार्ड के जरिए होने वाले ट्रांजेक्शन में तेजी से गिरावट आई है. 2021 में डेबिट कार्ड से 408.7 करोड़ ट्रांजेक्शन में 7.4 लाख करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ था, जबकि 2025 में 133.6 करोड़ ट्रांजेक्शन में 4.5 लाख करोड़ रुपये का लेन-देन ही हुआ.
इस हिसाब से डेबिट कार्ड से होने वाले ट्रांजेक्शन में हर साल औसतन 24.4% और रकम की लेन-देन में 11.7% की गिरावट आई है.
दूसरी तरफ, क्रेडिट कार्ड से लेन-देन काफी बढ़ा है. RBI के मुताबिक, क्रेडिट कार्ड के जरिए 2021 में 8.9 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए थे, जबकि 2025 में इससे 23.2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का लेन-देन हुआ.
यह भी पढ़ेंः संसद परिसर में ड्रामे पर हुई FIR तो पप्पू यादव गिनाने लगे नियम-कायदे... क्या वाकई सांसद पर नहीं हो सकता केस?
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं