Gwalior High Court Verdict: मध्य प्रदेश में ग्वालियर हाईकोर्ट ने एक अहम और संवेदनशील मामले में दुष्कर्म पीड़ित दिव्यांग विधवा महिला को गर्भपात की अनुमति दे दी है. कोर्ट ने महिला की शारीरिक और मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह फैसला सुनाया. फैसले में अदालत ने साफ कहा कि किसी भी महिला को उसकी इच्छा के विरुद्ध गर्भ जारी रखने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता. यह आदेश न सिर्फ पीड़िता के अधिकारों की पुष्टि करता है, बल्कि महिलाओं की स्वायत्तता और dignity को भी रेखांकित करता है. कोर्ट के निर्देश पर गर्भपात की प्रक्रिया 11 अप्रैल को विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में कराई जाएगी.
मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट का फैसला
ग्वालियर हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट और पीड़िता की वर्तमान स्थिति पर गंभीरता से विचार किया. कोर्ट ने पाया कि महिला लगभग 19 सप्ताह की गर्भवती है और सुरक्षित गर्भपात चिकित्सकीय रूप से संभव है. विशेषज्ञों की राय को स्वीकार करते हुए अदालत ने गर्भपात की अनुमति प्रदान की.

Gwalior High Court Verdict: दिव्यांग विधवा गर्भपात हाईकोर्ट अनुमति
शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बताया सर्वोपरि
कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि महिला का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य सर्वोपरि है. अदालत ने कहा कि किसी महिला को उसकी इच्छा के खिलाफ गर्भ धारण जारी रखने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता, विशेष रूप से तब जब गर्भावस्था यौन शोषण का परिणाम हो.
दिव्यांग है पीड़िता, सुनने-बोलने में असमर्थ
पीड़िता दिव्यांग है और सुनने एवं बोलने में असमर्थ बताई जा रही है. महिला विधवा है और उस पर हुए यौन शोषण के बाद वह गर्भवती हो गई थी. इस स्थिति में गर्भ जारी रखना न केवल उसके लिए मानसिक रूप से कठिन होता, बल्कि उसकी सेहत के लिए भी जोखिम भरा माना गया.
भाई ने दायर की थी याचिका
पीड़िता के भाई ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर गर्भपात की अनुमति मांगी थी. याचिका में बताया गया कि गर्भावस्था यौन शोषण का परिणाम है और महिला की स्थिति को देखते हुए गर्भपात ही उचित विकल्प है. कोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए मेडिकल बोर्ड की राय के बाद अंतिम आदेश दिया.
डॉक्टरों की निगरानी में होगा गर्भपात
कोर्ट के आदेशानुसार गजराराजा मेडिकल कॉलेज (GRMC) और कमला राजा अस्पताल (KRH) के मेडिकल बोर्ड की निगरानी में गर्भपात की प्रक्रिया कराई जाएगी. अदालत ने यह भी निर्देश दिए हैं कि प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित तरीके से और सभी मेडिकल प्रोटोकॉल का पालन करते हुए की जाए.
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