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इंडिया नहीं, अब भारत लिखेगा गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय; डिग्री और मार्कशीट में होगा बदलाव

बिलासपुर स्थित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय ने डिग्री, अंकतालिका और आधिकारिक दस्तावेजों में ‘India’ की जगह ‘Bharat’ शब्द इस्तेमाल करने का निर्णय लिया है. कुलपति ने इसे भारतीय परंपरा और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ा.

इंडिया नहीं, अब भारत लिखेगा गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय; डिग्री और मार्कशीट में होगा बदलाव
गुरु घासीदास विश्वविद्यालय का बड़ा फैसला; ‘इंडिया’ की जगह ‘भारत’ लिखेगा

Guru Ghasidas University Bharat vs India: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और सांस्कृतिक निर्णय लेते हुए अपनी डिग्री, अंकतालिका और आधिकारिक संवाद में ‘इंडिया' की जगह ‘भारत' शब्द का उपयोग करने का फैसला किया है. विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय भारतीय परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक पहचान को अधिक महत्व देने की सोच के तहत लिया गया है. कुलपति प्रो. आलोक कुमार चक्रवाल के अनुसार विश्वविद्यालय की स्थायी समिति ने करीब छह माह पहले इस संबंध में प्रस्ताव पारित किया था. फिलहाल पुराने दस्तावेजों का स्टॉक समाप्त होने के बाद नए प्रारूप में बदलाव लागू किया जाएगा. विश्वविद्यालय के इस फैसले ने शिक्षा जगत में नई चर्चा को जन्म दे दिया है.

डिग्री और अंकतालिका में होगा बदलाव

गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय ने निर्णय लिया है कि भविष्य में जारी होने वाली डिग्री, अंकतालिका और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों में अंग्रेजी में लिखे जाने वाले “India” शब्द के स्थान पर “Bharat” लिखा जाएगा. कुलपति प्रो. आलोक कुमार चक्रवाल ने बताया कि वर्तमान में विश्वविद्यालय के प्रमाणपत्रों पर अंग्रेजी में “India” और हिंदी में “भारत” अंकित रहता है. नए निर्णय के बाद अंग्रेजी संस्करण में भी “Bharat” शब्द का उपयोग किया जाएगा.

Guru Ghasidas University: छत्तीसगढ़ का केंद्रीय विश्वविद्यालय

Guru Ghasidas University: छत्तीसगढ़ का केंद्रीय विश्वविद्यालय
Photo Credit: ggu.ac.in

छह महीने पहले पारित हुआ था प्रस्ताव

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार यह कोई तात्कालिक फैसला नहीं है. करीब छह माह पहले विश्वविद्यालय की स्थायी समिति ने इस संबंध में प्रस्ताव पारित किया था. प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब इसे लागू करने की तैयारी की जा रही है. हालांकि यह परिवर्तन चरणबद्ध तरीके से लागू होगा और मौजूदा प्रिंटेड डिग्री एवं अंकतालिकाओं का स्टॉक समाप्त होने के बाद नए प्रारूप का उपयोग शुरू किया जाएगा.

G20 सम्मेलन का दिया संदर्भ

कुलपति प्रो. चक्रवाल ने इस निर्णय के पीछे की सोच स्पष्ट करते हुए वर्ष 2023 में भारत की अध्यक्षता में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि उस दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से जारी आधिकारिक रात्रिभोज के निमंत्रण पत्र में “President of Bharat” शब्द का इस्तेमाल किया गया था. उनके अनुसार जब देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद से जुड़े आधिकारिक दस्तावेजों में “भारत” शब्द का उपयोग किया जा सकता है, तो विश्वविद्यालय भी इस परंपरा का पालन कर सकता है.

‘भारत' हमारी सांस्कृतिक पहचान: कुलपति

प्रो. चक्रवाल ने कहा कि “भारत” शब्द भारतीय सभ्यता और संस्कृति से गहराई से जुड़ा हुआ है. उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक रूप से आर्यावर्त और जंबूद्वीप के रूप में पहचाने जाने वाले इस भूभाग को लंबे समय तक “भारत” कहा जाता रहा है. उनके अनुसार “इंडिया” नाम का प्रयोग बाद के दौर में बाहरी लोगों द्वारा किया गया. कुलपति का कहना है कि विश्वविद्यालय अपनी सांस्कृतिक जड़ों और परंपराओं को मजबूत करने के उद्देश्य से यह कदम उठा रहा है.

Guru Ghasidas University: कुलपति प्रो. आलोक कुमार चक्रवाल

Guru Ghasidas University: कुलपति प्रो. आलोक कुमार चक्रवाल
Photo Credit: @ggv_smc

अन्य विश्वविद्यालयों ने नहीं लिया ऐसा निर्णय

गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के इस फैसले के बाद राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों की प्रतिक्रिया भी सामने आई है. रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय और बिलासपुर के अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने बताया कि उनके संस्थानों में फिलहाल ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य या केंद्र स्तर से इस संबंध में कोई आधिकारिक निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है.

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अजय कुमार पटेल
उप समाचार संपादक
कुछ नया जानने, सीखने और नया करने की ललक के साथ आगे बढ़ना है. इसी सोच के साथ पत्रकारिता कर रहा हूं. माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश... और पढ़ें
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