Dairy Scam MP: मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डेयरी योजना और किसानों के मुद्दों को लेकर सियासत तेज हो गई है. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार पर दलितों और आदिवासियों के नाम पर डेयरी सब्सिडी घोटाले का आरोप लगाया है. उनका दावा है कि अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के लिए मिलने वाली अतिरिक्त सब्सिडी का लाभ वास्तविक हितग्राहियों के बजाय प्रभावशाली लोगों ने उठाया. वहीं उन्होंने राज्य सरकार द्वारा घोषित ‘कृषक कल्याण वर्ष' पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर किसान खाद, बीज, सिंचाई और प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे हैं. सिंघार के आरोपों के बाद डेयरी योजना और किसानों के मुद्दे पर प्रदेश में राजनीतिक बहस तेज हो गई है.
डेयरी योजना में घोटाले का आरोप
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया के माध्यम से राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डेयरी योजना के तहत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितग्राहियों को दो भैंसों की एक यूनिट पर करीब 2.23 लाख रुपये की सब्सिडी मिलती है, जबकि सामान्य वर्ग को लगभग 1.49 लाख रुपये का लाभ मिलता है. सिंघार का आरोप है कि प्रति यूनिट लगभग 74 हजार रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी का फायदा वास्तविक पात्र लोगों को नहीं बल्कि प्रभावशाली लोगों को मिला.
दलित-आदिवासियों के नाम पर डेयरी घोटाला?
— Umang Singhar (@UmangSinghar) June 20, 2026
मुख्यमंत्री डेयरी योजना में दो भैंसों की एक यूनिट पर SC/ST हितग्राहियों को करीब ₹2.23 लाख की सब्सिडी मिलती है, जबकि सामान्य वर्ग को सिर्फ ₹1.49 लाख। यानी प्रति यूनिट लगभग ₹74 हजार की अतिरिक्त सब्सिडी।
अब खुलासा हुआ है कि कई मामलों में…
‘भैंसें कहीं और, लाभार्थी कहीं और'
कांग्रेस नेता का दावा है कि कई मामलों में दलित और आदिवासी हितग्राहियों के नाम पर सब्सिडी स्वीकृत कराई गई, लेकिन खरीदी गई भैंसें उनके घरों में नहीं मिलीं. उन्होंने आरोप लगाया कि कहीं लाभार्थी मजदूरी कर रहा है और उसे अपनी डेयरी परियोजना की जानकारी तक नहीं है, तो कहीं पशुपालन के लिए बुनियादी व्यवस्था ही मौजूद नहीं है. कुछ मामलों में परिवार के सदस्यों को भी यह जानकारी नहीं थी कि उनके नाम पर डेयरी यूनिट स्वीकृत हुई है.
पशुपालन मंत्री के क्षेत्र का मामला बताया
उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि यह पूरा मामला पशुपालन मंत्री लखन पटेल के क्षेत्र से जुड़ा हुआ है. उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासनिक गड़बड़ी नहीं, बल्कि दलितों और आदिवासियों के अधिकारों पर सुनियोजित हमला है. उनके मुताबिक गरीब लोग सिर्फ दस्तावेजों में लाभार्थी बनकर रह गए, जबकि वास्तविक लाभ दूसरे लोगों ने उठाया.
‘जांच हो और जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो'
नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाया कि दलित और आदिवासी समाज के नाम पर करोड़ों रुपये की सब्सिडी का लाभ किसके संरक्षण में उठाया गया. उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को चिन्हित किया जाए और सरकारी योजनाओं में हुई कथित अनियमितताओं की जवाबदेही तय की जाए.
‘कृषक कल्याण वर्ष' पर भी साधा निशाना
डेयरी योजना के साथ-साथ उमंग सिंघार ने राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2026 को ‘कृषक कल्याण वर्ष' घोषित किए जाने पर भी सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार किसानों के कल्याण के बड़े दावे कर रही है, दूसरी ओर जमीनी स्तर पर किसान समस्याओं से जूझ रहे हैं. खरीफ सीजन शुरू होने के बावजूद कई क्षेत्रों में खाद और बीज की उपलब्धता को लेकर चिंता बनी हुई है.
बड़वानी और खरगोन का किया जिक्र
सिंघार ने दावा किया कि बड़वानी जिले में आंधी और बारिश के कारण केले की फसल को भारी नुकसान हुआ, जिससे किसान आर्थिक संकट में आ गए. इसके अलावा खरगोन में किसानों को सिंचाई के पानी की मांग को लेकर सड़क पर उतरना पड़ा. उन्होंने कहा कि कई जगह खाद संकट की शिकायतें भी सामने आ रही हैं.
सरकार से पूछा ‘कहां है कृषक कल्याण?'
विपक्ष के नेता ने कहा कि जब किसान प्राकृतिक आपदाओं, सिंचाई संकट और प्रशासनिक लापरवाही से जूझ रहा है तो सरकार का कथित कृषक कल्याण जमीनी स्तर पर दिखाई क्यों नहीं दे रहा. उन्होंने कहा कि किसानों को भाषण नहीं बल्कि समय पर खाद, बीज, सिंचाई सुविधा, फसल नुकसान का मुआवजा और ठोस कृषि नीति की आवश्यकता है.
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